नई दिल्ली. श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले भारतीय टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल विरोधी टीम से पार पाने की नहीं, बल्कि सही प्लेइंग इलेवन चुनने की भी है. गाले और कोलंबो में होने वाले दोनों टेस्ट में परिस्थितियां स्पिन गेंदबाजों के लिए मददगार रहने की उम्मीद है. ऐसे में भारतीय टीम प्रबंधन को बल्लेबाजी में गहराई, विकेट लेने वाले गेंदबाजों की संख्या और विकेटकीपर के चयन के बीच संतुलन बनाना होगा.
सबसे ज्यादा निगाहें ऋषभ पंत पर रहेंगी. लंबे समय से टेस्ट टीम के महत्वपूर्ण सदस्य रहे पंत के लिए हाल का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है. श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो में हुए अभ्यास मैच में वह पहली पारी में दो और दूसरी पारी में 28 रन ही बना सके. ऐसे में उनके चयन को लेकर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि उनकी क्षमता और टेस्ट क्रिकेट में मैच का रुख बदलने की योग्यता को देखते हुए गाले टेस्ट से उन्हें बाहर रखना लगभग असंभव माना जा रहा है.
पंत का मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उनके साथ ध्रुव जुरेल के चयन का सवाल जुड़ा हुआ है. जुरेल ने पिछले कुछ समय में लगातार अच्छा प्रदर्शन कर अपनी दावेदारी मजबूत की है. भारत ए की ओर से श्रीलंका दौरे पर भी उन्होंने रन बनाए थे. ऐसे में टीम प्रबंधन के सामने सवाल यह है कि क्या पंत को विकेटकीपर के रूप में खिलाकर जुरेल को विशेषज्ञ बल्लेबाज के तौर पर अंतिम एकादश में शामिल किया जाए या टीम में अतिरिक्त गेंदबाज को जगह दी जाए.
भारतीय शीर्ष क्रम में फिलहाल कुछ स्थान अपेक्षाकृत स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं. यशस्वी जायसवाल और केएल राहुल के पारी की शुरुआत करने की संभावना है, जबकि देवदत्त पडिक्कल को तीसरे नंबर पर उतारा जा सकता है. साई सुदर्शन चोट के कारण सीरीज से बाहर हो चुके हैं और उनकी जगह सरफराज खान को टीम में शामिल किया गया है. बीसीसीआई ने नौ अगस्त को सुदर्शन के सीरीज से बाहर होने और सरफराज को उनके स्थान पर शामिल किए जाने की पुष्टि की थी.
पडिक्कल ने कोलंबो के अभ्यास मैच में नाबाद 142 रन बनाकर चयनकर्ताओं के सामने अपना पक्ष मजबूती से रख दिया है. ऐसे समय में जब भारतीय मध्यक्रम को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उनका यह प्रदर्शन टीम प्रबंधन के लिए राहत देने वाला है. कप्तान शुभमन गिल के चौथे नंबर पर बल्लेबाजी करने की संभावना है. इसके बाद टीम संयोजन को लेकर सबसे बड़ा फैसला करना होगा.
पंत और जुरेल दोनों को एक साथ खिलाने से भारत की बल्लेबाजी में गहराई बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में जुरेल को विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में छठे नंबर पर उतारा जा सकता है और पंत विकेटकीपर की जिम्मेदारी संभाल सकते हैं. लेकिन इसके लिए गेंदबाजी विभाग में एक स्थान कम हो जाएगा. दूसरी ओर रवींद्र जडेजा को बल्लेबाजी क्रम में ऊपर भेजकर एक अतिरिक्त विशेषज्ञ गेंदबाज को शामिल करने का विकल्प भी टीम प्रबंधन के सामने है.
श्रीलंका की परिस्थितियों में स्पिन गेंदबाजी भारत की रणनीति का अहम हिस्सा होगी. भारतीय टीम के पास रवींद्र जडेजा, कुलदीप यादव और मानव सुथार जैसे स्पिन विकल्प हैं. समस्या यह है कि जडेजा और सुथार दोनों बाएं हाथ के ऑर्थोडॉक्स स्पिनर हैं, जबकि कुलदीप बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर हैं. तीनों को एक साथ खिलाने पर गेंदबाजी में विविधता सीमित हो सकती है.
यही कारण है कि सरांश जैन के नाम पर भी चर्चा हो रही है. मध्य प्रदेश के ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सरांश जैन के पास दाएं हाथ की ऑफ स्पिन के साथ निचले क्रम में बल्लेबाजी करने की क्षमता है. इससे टीम को गेंदबाजी में विविधता के साथ बल्लेबाजी में भी एक अतिरिक्त विकल्प मिल सकता है. हालांकि मानव सुथार को बाहर करना आसान फैसला नहीं होगा, क्योंकि उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ अपने टेस्ट पदार्पण में प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए मैच में सात विकेट लिए थे.
भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता तेज गेंदबाजी विभाग भी है. जसप्रीत बुमराह की अनुपस्थिति टीम के लिए बड़ा झटका है. ऐसे में मोहम्मद सिराज पर नई गेंद और विकेट लेने की बड़ी जिम्मेदारी होगी. बुमराह की गैरमौजूदगी में सिराज को श्रीलंकाई परिस्थितियों में तेज गेंदबाजी आक्रमण की अगुआई करनी होगी. टीम प्रबंधन को उनके साथ किस तेज गेंदबाज को उतारना है, यह भी महत्वपूर्ण फैसला होगा.
प्रसिद्ध कृष्णा के पास अंतरराष्ट्रीय अनुभव है, लेकिन अनकैप्ड गुरनूर बराड़ ने भी अपनी दावेदारी मजबूत की है. भारत ए के श्रीलंका दौरे में बराड़ ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मैच में 10 विकेट हासिल किए थे. अभ्यास मैच में उन्होंने बल्ले से भी तेजी से 36 रन बनाए. उनकी लंबाई और अतिरिक्त उछाल श्रीलंकाई बल्लेबाजों के खिलाफ उपयोगी साबित हो सकता है. हाल में श्रीलंका के पूर्व ऑलराउंडर फरवीज महरूफ ने भी बराड़ को भारत के संभावित एक्स-फैक्टर खिलाड़ियों में शामिल किया है.
ऐसे में भारत के सामने संभावित रूप से कई संयोजन हैं. एक विकल्प पंत को विकेटकीपर रखते हुए जुरेल को विशेषज्ञ बल्लेबाज के रूप में खिलाना है. दूसरा विकल्प जुरेल को विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी देकर पंत को बाहर रखने का होगा, लेकिन पंत की टेस्ट क्षमता को देखते हुए यह बेहद बड़ा फैसला होगा. तीसरा विकल्प अतिरिक्त स्पिनर या तेज गेंदबाज को जगह देकर बल्लेबाजी को थोड़ा कमजोर करना हो सकता है.
श्रीलंका में होने वाली टेस्ट सीरीज में पिच का स्वरूप भी अंतिम एकादश तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा. गाले और कोलंबो में मैच आगे बढ़ने के साथ स्पिनरों को मदद मिलने की संभावना रहती है. इसलिए भारत के लिए केवल रन बनाने वाले खिलाड़ियों का चयन पर्याप्त नहीं होगा. उसे ऐसे गेंदबाजी संयोजन की जरूरत होगी जो 20 विकेट लेने की क्षमता रखता हो. यही वजह है कि पंत और जुरेल के बीच चयन से कहीं अधिक बड़ा सवाल टीम के पूरे संतुलन का है.
भारत के लिए यह सीरीज विश्व टेस्ट चैंपियनशिप के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण है. टीम को अंक हासिल करने के लिए श्रीलंका में बेहतर प्रदर्शन करना होगा. पिछले कुछ समय में भारतीय टीम के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव रहा है और घरेलू मैदान पर दक्षिण अफ्रीका के हाथों 2-0 की हार ने टीम संयोजन और बल्लेबाजी को लेकर सवाल खड़े किए थे. अब श्रीलंका की परिस्थितियां भारतीय बल्लेबाजों और गेंदबाजों दोनों की परीक्षा लेंगी.
ऐसे में गाले टेस्ट से पहले कप्तान शुभमन गिल और मुख्य कोच गौतम गंभीर के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि वे अनुभव, मौजूदा फॉर्म और परिस्थितियों में संतुलन कैसे बनाते हैं. पंत का अनुभव, जुरेल की फॉर्म, पडिक्कल की शानदार अभ्यास मैच की पारी, स्पिन विकल्पों की विविधता और बुमराह की गैरमौजूदगी में तेज गेंदबाजी का नेतृत्व—इन सभी पहलुओं का सीधा असर अंतिम एकादश पर पड़ेगा.
सीरीज का पहला टेस्ट 15 अगस्त से गाले में खेला जाएगा और दूसरा टेस्ट 23 अगस्त से कोलंबो में होना है. भारत के लिए दोनों मुकाबले केवल सीरीज जीतने का अवसर नहीं होंगे, बल्कि विश्व टेस्ट चैंपियनशिप अभियान को मजबूत करने और टीम के नए संयोजन की दिशा तय करने का भी मौका होंगे. ऐसे में इस बार मैदान पर उतरने से पहले ही चयन की लड़ाई बेहद दिलचस्प हो चुकी है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

