जबलपुर में वृद्ध दम्पति को सीबीआई अधिकारी बनकर किया डिजिटल अरेस्ट, 22 लाख रुपए हड़पे, 12 दिन तक उठने नहीं दिया

जबलपुर में वृद्ध दम्पति को सीबीआई अधिकारी बनकर किया डिजिटल अरेस्ट, 22 लाख रुपए हड़पे, 12 दिन तक उठने नहीं दिया

प्रेषित समय :18:44:59 PM / Wed, Aug 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी के जबलपुर को साइबर ठगों ने सबसे सुरक्षित स्थान मान लिया है, यहां पर लगातार हो रही साइबर ठगी की वारदातों से आम शहरी अब डरा हुआ है. ऐसा ही एक मामला सिविल लाइन क्षेत्र में सामने आया है. यहां पर ठगों ने सीबीआई अधिकारी बनकर वृद्ध दम्पति को 12 दिन तक डिजिटल अरेस्ट रखा. ठगों ने दंपती को मनी लॉन्ड्रिंग और ड्रग्स के कारोबार में फंसाने व गिरफ्तारी की धमकी देकर 22 लाख रुपए अपने बताए बैंक खाते में ट्रांसफर करा लिए.

पुलिस अधिकारियों के अनुसार डिफेंस कॉलोनी निवासी प्रकाश पाल शेजवाल प्राइवेट कंपनी से रिटायर्ड हैं. 22 जुलाई को उनके मोबाइल पर वॉट्सऐप कॉल आया. कॉल करने वाले ने खुद को ष्टक्चढ्ढ अधिकारी बताते हुए कहा कि प्रकाश और उनका परिवार मनी लॉन्ड्रिंग व ड्रग्स के कारोबार से जुड़ा है. गिरफ्तारी की धमकी के बाद अलग-अलग नंबरों से लगातार कॉल किए गए. ठगों ने वॉट्सऐप पर सीबीआई के नाम और लोगो वाला फर्जी नोटिस भेजा. इसके बाद दंपती को भरोसा हो गया कि उनके खिलाफ सरकारी जांच चल रही है. 23 जुलाई से ठगों ने उन्हें घर से बाहर निकलने और परिवार या रिश्तेदारों से बात करने पर रोक लगा दी. आरोपियों ने धमकी देते हुए कहा कि उनकी हर गतिविधि कैमरे से रिकॉर्ड की जा रही है. हर दो घंटे में पूछताछ की जाती थी और वीडियो कॉल के जरिए उनकी निगरानी रखी जाती थी.

एफडी के 22 लाख रुपए दूसरे एकाउंट में कराए ट्रांसफर-

साइबर ठगों ने दंपती से कहा कि एफडी में जमा रकम एक व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर करनी होगी. उन्होंने धमकी भरे लहजे में कहा कि खाते के मालिक का संबंध  अपराध से है और उसकी गिरफ्तारी के लिए यह रकम ट्रांसफर करना जरूरी है. रकम ट्रांसफर होने के बाद रिसीव लेटर देने और जांच पूरी होने पर पैसे वापस करने का झांसा दिया गया. दबाव में प्रकाश 2 अगस्त को बैंक पहुंचे और एफडी में जमा 22 लाख रुपए आरोपियों द्वारा बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए.

सीबीआई व आरबीआई के नाम से फर्जी दस्तावेज भेजे-

ठगों ने वृद्ध दम्पति को अपने ठगी के जाल में फंसाए रखने के लिए  रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के नाम से फर्जी दस्तावेज भी भेजे. इनमें जितेंद्र सिंह राणा के नाम और आईसीआईसीआई बैंक खाते का उल्लेख था. पुलिस का कहना है कि उक्त दस्तावेज फर्जी हैं. रकम ट्रांसफर होने के बाद भी ठगों ने दंपती से संपर्क जारी रखा और डराकर वॉट्सऐप कॉल से जुड़े नंबर व रिकॉर्ड तक डिलीट करवा दिए.

11 अगस्त को अधिवक्ता को बताई पूरी घटना-

दंपती इतने डरे हुए थे कि उन्होंने कई दिनों तक किसी परिचित को घटना की जानकारी नहीं दी. 11 अगस्त की रात प्रकाश अपने परिचित अधिवक्ता अन्वेष वर्मा के पास पहुंचे और पूरी घटना बताई. इसके बाद सिविल लाइन थाने में शिकायत दर्ज कराई गई. पुलिस अधिकारियों ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है. 
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-