CG: अंबिकापुर में फसल तबाही से नाराज किसान 50+ बेसहारा मवेशी हांककर पहुंचे कलेक्ट्रेट

CG: अंबिकापुर में फसल तबाही से नाराज किसान 50+ बेसहारा मवेशी हांककर पहुंचे कलेक्ट्रेट

प्रेषित समय :15:18:38 PM / Thu, Aug 13th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अंबिकापुर. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के मुख्यालय अंबिकापुर में गुरुवार को किसानों का एक अनोखा और अभूतपूर्व विरोध प्रदर्शन देखने को मिला. शहर के आवारा एवं बेसहारा मवेशियों द्वारा फसलों को पहुंचाए जा रहे भारी नुकसान से तंग आकर ग्रामीण किसानों ने 50 से अधिक मवेशियों को लगभग 13 किलोमीटर पैदल हांककर कलेक्ट्रेट परिसर में लाकर खड़ा कर दिया.

कलेक्ट्रेट परिसर में पसरा अनूठा नजारा
ग्राम पंचायत परसा और देवगढ़ के किसानों ने एकजुट होकर दोपहर में कलेक्ट्रेट की ओर रुख किया. कलेक्ट्रेट के मुख्य प्रवेश द्वार और कलेक्टर चैंबर के ठीक सामने बड़ी संख्या में गाय, बैल और बछड़े बैठ गए. मवेशियों के साथ ही परेशान किसान भी अपनी मांगों को लेकर वहीं धरने पर बैठ गए. इस अचानक हुए प्रदर्शन से कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया.

इस सत्याग्रह का नेतृत्व परसा के सरपंच मनोज सिंह और देवगढ़ के सरपंच सन्यासी कुमार कर रहे थे.

नगर निगम पर सुनियोजित तरीके से मवेशी छोड़ने का आरोप
प्रदर्शनकारी किसानों का आरोप है कि नगर निगम अंबिकापुर के पास शहर के बेसहारा पशुओं को रखने के लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं है. निगम के कर्मचारी 'काऊ कैचर' वाहनों के जरिए शहर से आवारा पशुओं को उठाते हैं और रात के अंधेरे में उन्हें आसपास के ग्रामीण इलाकों में छोड़ आते हैं.

परसा गांव के ग्रामीणों ने बताया कि उनके अकेले गांव में ही इन बाहरी पशुओं ने करीब 50 एकड़ में लगी फसलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है. जब ग्रामीणों ने जांच-पड़ताल की तो पता चला कि इनमें से एक भी मवेशी स्थानीय ग्रामीणों का नहीं है, बल्कि सभी शहर से लाकर वहां छोड़े गए हैं.

आसपास के दर्जनों गांव प्रभावित
किसानों के अनुसार, यह समस्या सिर्फ परसा या देवगढ़ तक सीमित नहीं है. शहर से लगे अन्य ग्रामीण इलाकों जैसे:

रजपुरी

करमहा

हसूली

भकुरा

नवापारा

खैरबार

श्रीगढ़

नवागढ़

इन सभी क्षेत्रों में अंबिकापुर शहर के मवेशियों को छोड़ा जा रहा है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक क्षति पहुंच रही है. इसके अलावा राष्ट्रीय राजमार्गों पर मवेशियों का जमावड़ा रहने से आए दिन सड़क दुर्घटनाएं भी हो रही हैं.

गौठानों का संचालन ठप, कांजी हाउस की क्षमता कम
ग्रामीणों का कहना है कि शहर में मौजूद नगर निगम का कांजी हाउस काफी छोटा है और उसकी क्षमता बेहद सीमित है. जिले में सीतापुर के सोनतराई में एक 'गोधाम' स्वीकृत हुआ था, लेकिन उसका संचालन अब तक शुरू नहीं हो सका है. इसके अलावा पूर्व में संचालित गौठान भी वर्तमान में बंद पड़े हैं.

किसानों की प्रमुख मांगें
धरने पर बैठे किसानों ने प्रशासन के सामने स्पष्ट रुख अपनाया है:

बेसहारा मवेशियों के रखरखाव के लिए तुरंत स्थायी गोधाम/कांजी हाउस की व्यवस्था की जाए.

फसलों के नुकसान का उचित मुआवजा दिया जाए.

मवेशियों को सड़कों और ग्रामीण क्षेत्रों में खुला छोड़ने वाले लापरवाह पशुपालकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए.

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने बेसहारा मवेशियों के लिए जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो वे रोजाना इसी तरह मवेशियों को हांककर कलेक्ट्रेट परिसर लाते रहेंगे.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-