कन्नौज. अनौगी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में अव्यवस्थाओं और प्रधानाचार्य के कथित व्यवहार से नाराज 10वीं से 12वीं कक्षा के 95 छात्रों ने गुरुवार को हॉस्टल में खुद को बंद कर भूख हड़ताल शुरू कर दी. छात्रों ने प्रधानाचार्य को हटाने के साथ ही विद्यालय में भोजन, स्वच्छता, पेयजल और खेल सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं का तत्काल समाधान कराने की मांग की. छात्रों का आरोप है कि स्वतंत्रता दिवस की तैयारी के दौरान ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाने पर प्रधानाचार्य नाराज हो गए थे. मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने विद्यालय पहुंचकर छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र अपनी मांगों पर अड़े रहे.
अनौगी स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा छह से 12वीं तक करीब 550 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं और उनके लिए अलग-अलग छात्रावास की व्यवस्था है. गुरुवार सुबह 10वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों ने नाश्ता लेने से इनकार कर दिया. इसके बाद करीब 95 छात्र एकजुट होकर हॉस्टल में चले गए और अंदर से दरवाजा बंद कर भूख हड़ताल शुरू कर दी. छात्रों के इस कदम की जानकारी मिलते ही प्रशासन में हड़कंप मच गया और अधिकारियों की टीम विद्यालय पहुंची.
मामले की सूचना पर जिला विद्यालय निरीक्षक पप्पू सरोज, सदर एसडीएम वैभव गुप्ता, सीओ सिटी शिल्पा वर्मा और नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी विद्यालय पहुंचे. अधिकारियों ने छात्रों से करीब आधे घंटे तक बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं. बातचीत के दौरान छात्रों ने विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर शिकायतें रखीं. उनका कहना था कि कई बार उन्हें ठीक से पका हुआ भोजन नहीं मिलता. छात्रों ने आरोप लगाया कि भोजन में कच्चे चावल तक परोसे गए हैं. बुधवार को भोजन कम पड़ने के कारण कई छात्रों को खाना नहीं मिल पाने की शिकायत भी सामने आई.
छात्रों ने विद्यालय की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उनका कहना था कि मेस में भोजन तैयार करने और परोसने की व्यवस्था संतोषजनक नहीं है. इसके अलावा शुद्ध पेयजल की समस्या, खेल मैदान और खेल सुविधाओं की कमी तथा छात्रावास से जुड़ी अन्य अव्यवस्थाओं को लेकर भी छात्रों ने नाराजगी जताई. छात्रों का आरोप है कि मेस से संबंधित शिकायतों के बावजूद समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा है.
विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू स्वतंत्रता दिवस की तैयारियों से जुड़ा बताया जा रहा है. छात्रों का आरोप है कि बुधवार को स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम की तैयारी के दौरान जब कुछ छात्रों ने ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाए तो प्रधानाचार्य नाराज हो गए. छात्रों ने आरोप लगाया कि नारे लगाने वाले छात्रों के लिए दो मिनट का मौन भी रखवाया गया. छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि प्रार्थना से पहले उनके साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इन आरोपों पर विद्यालय प्रशासन का पक्ष सामने आना अभी बाकी है.
छात्रों ने प्रधानाचार्य के कथित व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई. उनका आरोप है कि विद्यालय की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता और शिकायत करने पर छात्रों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाता. छात्रों ने प्रधानाचार्य को हटाने के अलावा मेस के हेड कुक और सामाजिक विषय के शिक्षक के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है.
प्रशासनिक अधिकारियों ने छात्रों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन छात्र तत्काल समाधान की मांग पर अड़े रहे. छात्रों ने अधिकारियों से कहा कि केवल आश्वासन से समस्या का समाधान नहीं होगा और वे जिलाधिकारी से सीधे बात करना चाहते हैं. इसके बाद एसडीएम ने छात्रों की जिलाधिकारी से मोबाइल फोन पर बातचीत कराई. जिलाधिकारी ने छात्रों की समस्याएं सुनीं और उन्हें समाधान का आश्वासन दिया. साथ ही उन्होंने 16 अगस्त को विद्यालय पहुंचकर छात्रों की समस्याएं स्वयं सुनने की बात कही.
प्रशासन के आश्वासन के बाद भी छात्रों की नाराजगी का मूल कारण केवल भोजन या अन्य सुविधाओं तक सीमित नहीं दिखाई दिया. छात्रों ने विद्यालय के समग्र वातावरण और अधिकारियों के व्यवहार से जुड़ी शिकायतें भी रखीं. उनका कहना था कि वे लंबे समय से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं और शिकायतों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हो रही है. यही वजह रही कि उन्होंने सामूहिक रूप से हॉस्टल में खुद को बंद कर भूख हड़ताल का रास्ता अपनाया.
जवाहर नवोदय विद्यालय जैसे आवासीय विद्यालय में बड़ी संख्या में छात्रों का सामूहिक रूप से विरोध में उतरना प्रशासन के लिए गंभीर स्थिति मानी जा रही है. यहां रहने वाले विद्यार्थियों की भोजन, पेयजल, स्वच्छता, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की नियमित निगरानी महत्वपूर्ण होती है. ऐसे में छात्रों द्वारा एक साथ कई व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए जाने के बाद प्रशासन के सामने शिकायतों की वास्तविक स्थिति की जांच करने की चुनौती है.
फिलहाल प्रशासन ने छात्रों को उनकी समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया है. जिलाधिकारी के 16 अगस्त को विद्यालय पहुंचने के आश्वासन के बाद अब छात्रों की अगली प्रतिक्रिया पर नजर रहेगी. साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन विद्यालय में भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, पेयजल, खेल सुविधाओं और मेस व्यवस्था की जांच किस स्तर पर करता है और छात्रों द्वारा लगाए गए प्रधानाचार्य के व्यवहार संबंधी आरोपों की क्या पड़ताल होती है.
इस पूरे घटनाक्रम ने विद्यालय प्रबंधन और छात्रों के बीच संवाद की आवश्यकता को भी सामने ला दिया है. यदि छात्रों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक समस्याओं का समाधान किया जाता है तो स्थिति सामान्य हो सकती है. वहीं, नारे लगाने को लेकर लगाए गए आरोपों सहित अन्य शिकायतों की तथ्यात्मक जांच के बाद ही जिम्मेदारी तय हो सकेगी. फिलहाल 95 छात्रों की भूख हड़ताल और हॉस्टल में उनके सामूहिक विरोध ने कन्नौज के जवाहर नवोदय विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

