महाराष्ट्र के स्कूल में भूत की दहशत से 608 छात्राएं भागी, विभाग कह रहा यह मास हिस्टीरिया का मामला

महाराष्ट्र के स्कूल में भूत की दहशत से 608 छात्राएं भागी, विभाग कह रहा यह मास हिस्टीरिया का मामला

प्रेषित समय :12:59:47 PM / Sun, Aug 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. महाराष्ट्र के अमरावती जिले के आदिवासी बहुल मेलघाट इलाके में एक सरकारी आश्रम स्कूल में छात्राओं के अचानक रोने, हंसने और फिर शांत हो जाने की घटना ने पूरे गांव में दहशत फैला दी. कुछ छात्राओं को बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक हंसते हुए देखा गया, जिसके बाद स्कूल परिसर में भूत होने की अफवाह फैल गई. डर इतना बढ़ा कि डोमा गांव स्थित आश्रम स्कूल के 608 छात्र-छात्राएं अपने घर लौट गए.

मामले की जानकारी मिलने के बाद प्रशासन और डॉक्टरों की टीम स्कूल पहुंची. चिकित्सकों ने इसे मास हिस्टीरिया यानी सामूहिक मनोवैज्ञानिक बीमारी का मामला बताया. अधिकारियों के मुताबिक, तनाव और डर के कारण कई छात्रों में एक जैसी शारीरिक और मानसिक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं.

16 छात्राओं से शुरू हुआ मामला

अधिकारियों के अनुसार, यह घटना एक सप्ताह से अधिक समय पहले शुरू हुई थी. शुरुआत में करीब 16 छात्र अचानक रोने, हंसने और फिर सुन्न पडऩे लगे. कुछ छात्रों ने दावा किया कि उन्हें स्कूल परिसर में घुंघरुओं की आवाज सुनाई दी. इसके बाद स्कूल के हॉस्टल के गलियारों से शुरू हुई अफवाह धीरे-धीरे पूरे गांव तक पहुंच गई. छात्रों और ग्रामीणों में स्कूल परिसर को लेकर डर बढ़ता गया और कई अभिभावक अपने बच्चों को वापस घर ले गए.

डॉक्टरों ने बताया मास साइकोजेनिक इलनेस

तालुका चिकित्सा अधिकारी डॉ. अभिषेक नायडू ने बताया कि छात्रों में तनाव और चिंता के कारण सामूहिक प्रतिक्रिया देखने को मिली. चिकित्सा विज्ञान में इसे मास साइकोजेनिक इलनेस कहा जाता है. अधिकारियों का कहना है कि ऐसी स्थिति में डर, चिंता और अफवाह तेजी से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकती है. इससे कई लोगों में एक जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं, भले ही उनके पीछे कोई वास्तविक बाहरी कारण न हो.

आश्रम स्कूल की व्यवस्थाओं पर भी उठे सवाल

इस घटना ने सरकारी आश्रम स्कूल की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं को भी सामने ला दिया है. आदिवासी विकास विभाग के अधिकारियों के अनुसार, स्कूल में छात्रों के लिए पर्याप्त जगह की कमी, कमरों में क्षमता से ज्यादा छात्र, भोजन की खराब गुणवत्ता और साफ-सफाई की समस्या जैसी शिकायतें सामने आई हैं. अधिकारियों ने यह भी माना कि छात्रों के लिए समय पर काउंसलिंग की व्यवस्था नहीं की गई. शुरुआती घटना के बाद तत्काल प्रभावी प्रतिक्रिया नहीं मिलने से डर और अफवाहों को फैलने का मौका मिला.

महुआ के पेड़ से जुड़ी अफवाह भी फैली

कुछ अभिभावकों ने दावा किया कि स्कूल परिसर में महुआ का पेड़ काटे जाने के बाद यह घटना शुरू हुई. हालांकि, स्कूल के प्रधानाध्यापक संजय चौधरी ने इस दावे को खारिज कर दिया. उन्होंने बताया कि संबंधित पेड़ करीब छह साल पहले ही काटा गया था, इसलिए हाल की घटना को उससे जोडऩा सही नहीं है.

अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता अभियान

मामले की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को राज्य की आदिवासी आयुक्त लीना राठौड़ ने डोमा गांव पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया. प्रशासन की ओर से छात्रों और ग्रामीणों को घटना के वास्तविक कारणों के बारे में समझाने का प्रयास किया जा रहा है. अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की एक टीम भी स्कूल पहुंची और छात्रों की काउंसलिंग की. संगठन की राज्य कार्यकारिणी के सदस्य गणेश हलकरे ने बताया कि मेलघाट में अंधविश्वास के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है.
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-