राजकोट. गुजरात के भावनगर जिले में नकली शराब पीने से हुई मौतों का आंकड़ा बढ़कर आठ हो गया है, जबकि 31 लोग अलग-अलग अस्पतालों में उपचाराधीन हैं. मामले की जांच में कथित तौर पर एक संगठित नेटवर्क के जरिए मिथेनॉल मिलाकर नकली शराब तैयार करने और उसे असली ब्रांड की बोतलों में भरकर बेचने का खुलासा हुआ है. पुलिस ने मामले में 21 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया है और अब तक 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. घटना की गंभीरता को देखते हुए छह पुलिसकर्मियों को भी निलंबित किया गया है.
पुलिस जांच के अनुसार नकली शराब तैयार करने के लिए मध्य प्रदेश के उज्जैन से नरेंद्रसिंह यादव उर्फ ‘डॉक्टर’ को बुलाया गया था. बताया जा रहा है कि उसे शराब तैयार करने की प्रक्रिया में विशेषज्ञता के कारण भावनगर लाया गया था. हालांकि, जिस जहरीली शराब को तैयार करने के लिए उसे बुलाया गया था, वही उसके लिए भी जानलेवा साबित हुई और उसकी भी मौत हो गई. मामले की जांच में गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच फैले नेटवर्क की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने कई ठिकानों पर कार्रवाई तेज कर दी है.
जांच में सामने आया है कि इस नेटवर्क में गौतम सोलंकी और मध्य प्रदेश के रईश सहित कई अन्य लोग कथित रूप से शामिल थे. पुलिस ने मुख्य आरोपी रईश को इंदौर से गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी है. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली शराब बनाने के लिए जरूरी सामग्री कहां से लाई जाती थी, इसे तैयार करने के बाद किन इलाकों में भेजा जाता था और इस पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की क्या भूमिका थी.
पुलिस के मुताबिक नकली शराब तैयार करने के लिए अहमदाबाद से मिथेनॉल, सफेद तरल पदार्थ, खाली बोतलें, ढक्कन और एक लोकप्रिय शराब ब्रांड के नकली स्टिकर लाए जाते थे. इसके बाद भावनगर जिले के वरतेज क्षेत्र में नकली शराब तैयार की जाती थी. जांच में शराब तैयार करने के तीन अलग-अलग चरण सामने आए हैं. पहली खेप में तैयार 51 पेटियां कथित तौर पर बाजार में पहुंचाई गईं. दूसरी खेप को खराब गुणवत्ता के कारण नष्ट कर दिया गया, जबकि तीसरी खेप की 25 पेटियां भावनगर और आसपास के गांवों में बिक्री के लिए भेजे जाने की बात सामने आई है.
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जहरीली शराब को असली विदेशी शराब की तरह दिखाने के लिए नकली लेबल और पैकेजिंग का इस्तेमाल किया गया. इसी वजह से पीने वालों को यह अंदाजा नहीं हो सका कि बोतल में मौजूद तरल पदार्थ कितना खतरनाक था. दूसरी ओर, जांच एजेंसियां शराब में मौजूद मिथेनॉल की मात्रा और उसके कारण हुए विषाक्त प्रभाव की भी जांच कर रही हैं. स्वतंत्र रिपोर्टों में भी इस घटना में मिथेनॉल मिले नकली शराब की बात सामने आई है.
घटना के बाद भावनगर जिले में स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था दोनों स्तर पर प्रशासन ने अतिरिक्त इंतजाम किए हैं. अलग-अलग स्थानों पर कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए बोटाद और अमरेली से करीब 100 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है. अस्पतालों में भी चिकित्सकीय व्यवस्थाएं बढ़ाई गई हैं. भावनगर के सर टी. अस्पताल में मरीजों के इलाज के लिए चार मेडिकल टीमें लगाई गई हैं. गंभीर मरीजों के उपचार के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद भी ली जा रही है.
मरीजों की स्थिति को देखते हुए मुंबई से विशेष इंजेक्शन मंगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है. वहीं अहमदाबाद के इंस्टीट्यूट ऑफ किडनी डिजीज एंड रिसर्च सेंटर से किडनी और लीवर विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी भावनगर बुलाया गया है. अस्पताल प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि जहरीले पदार्थ के प्रभाव से प्रभावित मरीजों को समय पर जरूरी उपचार उपलब्ध कराया जाए. मिथेनॉल विषाक्तता में समय पर इलाज नहीं मिलने पर स्थिति गंभीर हो सकती है, इसलिए स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं.
इस मामले में पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे हैं. घटना के बाद छह पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है. इनमें एलसीबी के पुलिस निरीक्षक मयूरध्वजसिंह सरवैया, वरतेज थाने के पुलिस निरीक्षक ए.बी. पढेरिया, सहायक उप निरीक्षक धर्मपालसिंह गोहिल, डी-स्टाफ के हेड कांस्टेबल जयराजसिंह और अनिरुद्धसिंह तथा कांस्टेबल शक्तिसिंह सरवैया शामिल हैं. पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई से यह संकेत मिला है कि जांच में अवैध शराब के नेटवर्क के साथ-साथ निगरानी और पुलिस स्तर पर संभावित लापरवाही की भी पड़ताल की जा रही है.
भावनगर की घटना इसलिए भी गंभीर है क्योंकि गुजरात में शराबबंदी लागू है. ऐसे में अवैध शराब का नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय रहना और जहरीली शराब की खेप लोगों तक पहुंचना प्रशासन के लिए बड़ा सवाल बन गया है. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि नकली शराब तैयार करने और उसके वितरण का नेटवर्क कितने समय से चल रहा था और इसमें कितने लोग शामिल थे.
जांच के दौरान पुलिस को नकली शराब की बड़ी खेप भी मिलने की जानकारी सामने आई है. अधिकारियों का फोकस अब उन लोगों तक पहुंचने पर है, जिन्होंने मिथेनॉल और अन्य सामग्री की व्यवस्था की, शराब तैयार कराई, बोतलों की पैकिंग कराई और फिर उसे अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचाया. पुलिस यह भी जांच कर रही है कि नकली शराब की बिक्री से होने वाली रकम किसके पास पहुंचती थी और क्या इस नेटवर्क का संबंध दूसरे राज्यों में सक्रिय अवैध शराब कारोबारियों से है.
मामले में गिरफ्तार 13 आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस नेटवर्क की अगली कड़ियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है. चूंकि जांच में मध्य प्रदेश के उज्जैन और इंदौर का नाम सामने आया है, इसलिए गुजरात पुलिस की कार्रवाई का दायरा दूसरे राज्यों तक भी बढ़ सकता है. मुख्य आरोपी रईश की गिरफ्तारी को जांच में महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है. उसके जरिए पुलिस नकली शराब की आपूर्ति, निर्माण और वितरण से जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही है.
घटना के बाद प्रशासन ने लोगों से भी सतर्क रहने की अपील की है. पिछले दिनों कथित रूप से संदिग्ध शराब का सेवन करने वाले लोगों से स्वास्थ्य संबंधी लक्षण दिखाई देने पर तत्काल अस्पताल पहुंचने को कहा गया है. विशेषज्ञों के अनुसार मिथेनॉल से प्रभावित व्यक्ति की हालत तेजी से बिगड़ सकती है, इसलिए उपचार में देरी जानलेवा हो सकती है.
भावनगर में हुई इस घटना ने एक बार फिर अवैध और नकली शराब के कारोबार के खतरनाक स्वरूप को सामने ला दिया है. एक तरफ आठ लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के अस्पताल में भर्ती होने से परिवारों में मातम और चिंता का माहौल है, वहीं दूसरी तरफ पुलिस और प्रशासन के सामने पूरे नेटवर्क को उजागर करने की चुनौती है. फिलहाल 21 आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर 13 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. छह पुलिसकर्मियों पर भी निलंबन की कार्रवाई की गई है. जांच आगे बढ़ने के साथ इस नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और नकली शराब की पूरी आपूर्ति श्रृंखला का खुलासा होने की उम्मीद है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

