छात्रों की गूंज कार्यक्रम: राहुल गांधी बोले- लड़कियों का आजाद होना जरूरी, उनकी पहचान पिता, पति या बेटे से नहीं

छात्रों की गूंज कार्यक्रम: राहुल गांधी बोले- लड़कियों का आजाद होना जरूरी, उनकी पहचान पिता, पति या बेटे से नहीं

प्रेषित समय :21:48:22 PM / Sat, Aug 22nd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

पुणे. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम में छात्राओं से संवाद किया. इस दौरान उन्होंने कहा कि देश की महिलाओं और लड़कियों का स्वतंत्र होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि किसी महिला का अपने पिता, पति या बेटे से रिश्ता जरूर हो सकता है, लेकिन उसकी पहचान केवल इन रिश्तों से तय नहीं होनी चाहिए.

राहुल गांधी ने कार्यक्रम की शुरुआत में कहा कि वह छात्राओं को कोई भाषण देने या राजनीति पर चर्चा करने नहीं आए हैं. उनका उद्देश्य छात्राओं को अपनी बात रखने का मौका देना है. उन्होंने कहा कि वह जानना चाहते हैं कि युवा महिलाएं क्या सोचती हैं और देश तथा समाज को लेकर उनकी क्या राय है.

आप बोलें, हम आपके विचारों पर चर्चा करेंगे
राहुल गांधी ने कहा कि वह छात्राओं को यह बताने नहीं आए हैं कि वह खुद क्या सोचते हैं. उन्होंने कहा कि आज का कार्यक्रम युवतियों को अपनी बात खुलकर रखने का अवसर देने के लिए है. उन्होंने कहा कि छात्राएं अपने विचार और अनुभव साझा करेंगी और उनके साथ उन मुद्दों पर चर्चा की जाएगी. कार्यक्रम में केवल छात्राओं की भागीदारी रही. इस दौरान छात्राओं ने राहुल गांधी के समर्थन में नारे भी लगाए. कार्यक्रम के लिए पुलिस की ओर से करीब 30 शर्तों के साथ अनुमति दिए जाने की बात कही गई है.

पहले भी छात्रों से कर चुके हैं संवाद

राहुल गांधी इससे पहले भी छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम कर चुके हैं. उन्होंने 17 जून को कोटा, 17 जुलाई को देहरादून और 8 अगस्त को प्रयागराज में छात्रों से बातचीत की थी. इन कार्यक्रमों में उन्होंने पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और युवाओं से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की थी.

आदमी महिला को नियंत्रित क्यों करना चाहता है?

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने एक छात्रा से सवाल किया कि आखिर एक पुरुष किसी महिला को नियंत्रित क्यों करना चाहता है. उन्होंने पूछा कि क्या छात्राएं महसूस करती हैं कि पितृसत्तात्मक व्यवस्था के कारण महिलाओं को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है. जवाब में छात्रा ने कहा कि वह खुद को सबसे पहले एक इंसान के रूप में देखती है और उसे तब गुस्सा आता है जब लोग उसकी पहचान को केवल महिला होने तक सीमित कर देते हैं.

महिला अपना हिस्सा मांगे तो उसे अलग नजर से क्यों देखा जाता है?

राहुल गांधी ने परिवार में महिलाओं के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि अगर कोई भाई परिवार में अपना हिस्सा मांगता है तो उसे अधिकार माना जाता है, लेकिन जब कोई महिला अपने हिस्से की मांग करती है तो उसे अलग नजरिए से देखा जाता है. एक छात्रा ने बताया कि परिवार और समाज अक्सर महिलाओं से नौकरी करने के साथ-साथ घर के काम, खाना बनाने और बच्चों की जिम्मेदारी निभाने की भी अपेक्षा करते हैं.

भारत की असली ताकत लोगों के सपने और विचार

राहुल गांधी ने कहा कि भारत की ताकत केवल सेना या किसी एक संस्था में नहीं है. उनके अनुसार, देश की सबसे बड़ी ताकत उसके करोड़ों लोगों के सपने, विचार और कल्पनाशक्ति हैं. उन्होंने कहा कि महिलाओं को अक्सर पत्नी, बेटी और मां जैसे पारिवारिक रिश्तों के आधार पर देखा जाता है. राहुल गांधी ने कहा कि ये रिश्ते महत्वपूर्ण हैं, लेकिन किसी महिला की पूरी पहचान इन्हीं तक सीमित नहीं होनी चाहिए.

महिलाएं किसी पर आश्रित नहीं हैं

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र होना चाहिए और उनकी अपनी अलग पहचान होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि महिला का अपने पिता, पति और बेटे से रिश्ता हो सकता है, लेकिन उसकी पहचान इन रिश्तों से निर्धारित नहीं होती. उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपनी पसंद, विचार और जीवन के फैसले खुद लेने का अधिकार होना चाहिए. राहुल गांधी ने कार्यक्रम में मौजूद छात्राओं से अपने विचार खुलकर रखने और अपनी पहचान को स्वतंत्र रूप से स्थापित करने का आह्वान किया.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-