केपीएससी भर्ती घोटाले की जांच में ईडी का बड़ा एक्शन,आईएएस ज्ञानेंद्र गंगवार के बेंगलुरु और बरेली ठिकानों पर छापा

केपीएससी भर्ती घोटाले की जांच में ईडी का बड़ा एक्शन,आईएएस ज्ञानेंद्र गंगवार के बेंगलुरु और बरेली ठिकानों पर छापा

प्रेषित समय :20:30:29 PM / Sun, Aug 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बेंगलुरु. कर्नाटक लोक सेवा आयोग की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले की जांच अब वरिष्ठ नौकरशाही तक पहुंचती दिखाई दे रही है. प्रवर्तन निदेशालय ने रविवार को 2016 बैच के आईएएस अधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार गंगवार से जुड़े बेंगलुरु और उत्तर प्रदेश के बरेली स्थित परिसरों पर तलाशी ली. यह कार्रवाई उस जांच का अगला चरण है, जिसमें इससे पहले केपीएससी मुख्यालय और आयोग से जुड़े पूर्व पदाधिकारियों के परिसरों की तलाशी ली जा चुकी है. 

गंगवार फिलहाल कर्नाटक के उद्योग एवं वाणिज्य विभाग में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम निदेशक के पद पर तैनात हैं. इससे पहले वह कर्नाटक लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. इसी वजह से भर्ती परीक्षा से जुड़े कथित घटनाक्रम की जांच के दौरान उनकी भूमिका और उस समय उनके पास मौजूद प्रशासनिक जिम्मेदारियां जांच एजेंसी के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं. उन्हें इस वर्ष मार्च में परीक्षा नियंत्रक के पद से हटा दिया गया था. हालांकि उपलब्ध जानकारी के आधार पर ईडी ने गंगवार को आरोपी घोषित किया है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. 

ईडी की रविवार की कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई. बेंगलुरु और बरेली स्थित परिसरों की तलाशी के दौरान क्या-क्या दस्तावेज या अन्य सामग्री मिली, इसकी विस्तृत जानकारी फिलहाल सार्वजनिक नहीं की गई है. यह भी तत्काल स्पष्ट नहीं हुआ कि तलाशी के समय गंगवार इनमें से किसी परिसर में मौजूद थे या नहीं. इसलिए कार्रवाई को जांच के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है, न कि किसी निष्कर्ष के रूप में. 

मामले की जड़ कर्नाटक में पशुचिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी है. जांच एजेंसियों के सामने आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में उम्मीदवारों से कथित तौर पर पैसे की मांग की गई. पहले सामने आए आरोपों के मुताबिक बिचौलियों ने कुछ उम्मीदवारों से चयन कराने के नाम पर प्रति उम्मीदवार 70 से 80 लाख रुपये तक की कथित रिश्वत मांगी थी. अब ईडी की जांच का एक प्रमुख पहलू यह पता लगाना है कि कथित अवैध धन का प्रवाह कहां हुआ और उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन की कड़ियां किन लोगों और संस्थाओं तक पहुंचती हैं.

इस मामले में ईडी ने 18 अगस्त को पहली बड़ी कार्रवाई की थी. उस दौरान बेंगलुरु स्थित केपीएससी कार्यालय के अलावा आयोग के पूर्व अध्यक्ष शिवशंकरप्पा एस. सहूकर, सदस्य शांता होसमनी और कुछ अन्य लोगों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई थी. इसके बाद रविवार को गंगवार से जुड़े परिसरों पर कार्रवाई होने से जांच का दायरा और महत्वपूर्ण हो गया है.

जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि भर्ती प्रक्रिया में परीक्षा संचालन से जुड़े अधिकारियों की भूमिका और निर्णयों की पड़ताल की जाए. गंगवार परीक्षा नियंत्रक के रूप में जिस अवधि में जिम्मेदारी संभाल रहे थे, उसी दौरान पशुचिकित्सा अधिकारियों की भर्ती परीक्षा हुई थी. हालांकि किसी अधिकारी का किसी पद पर होना अपने आप में उसके खिलाफ आरोप सिद्ध नहीं करता. जांच एजेंसी को यदि कोई वित्तीय या दस्तावेजी कड़ी मिलती है तो उसकी पुष्टि आगे की जांच से होगी.

गंगवार को लेकर कार्रवाई ऐसे समय हुई जब एक दिन पहले उनके कुछ घंटों तक संपर्क में नहीं होने की खबरों ने भी चर्चा पैदा कर दी थी. बाद में कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने स्पष्ट किया कि अधिकारी लापता नहीं थे और पारिवारिक आपात स्थिति के कारण उत्तर प्रदेश स्थित अपने गृह नगर गए थे. मंत्री के मुताबिक उनके पिता के स्वास्थ्य से जुड़ी स्थिति के कारण उन्होंने कर्नाटक से बाहर जाने का फैसला किया था और बाद में सरकार से उनका संपर्क स्थापित हो गया. 

गंगवार के संपर्क से बाहर रहने की खबर और उसी दौरान चल रही केपीएससी जांच के कारण अटकलों को हवा मिली थी. हालांकि राज्य सरकार की ओर से इन दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध से इनकार किया गया है. इसलिए इस पहलू को जांच से जोड़कर देखना फिलहाल उचित नहीं होगा. उपलब्ध जानकारी के अनुसार उनकी यात्रा को पारिवारिक आपात स्थिति से जोड़ा गया है. 

इस पूरे मामले में अब जांच का फोकस केवल परीक्षा में कथित अनियमितता तक सीमित नहीं रह गया है. धनशोधन की जांच होने के कारण कथित रिश्वत की रकम का स्रोत, उसका इस्तेमाल, बैंकिंग लेनदेन और उससे जुड़े लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है. यदि जांच एजेंसी को ऐसे वित्तीय लेनदेन मिलते हैं जो भर्ती प्रक्रिया से कथित अवैध धन को जोड़ते हैं, तो मामले की तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.

केपीएससी जैसी संवैधानिक भर्ती संस्था से जुड़ी कथित अनियमितताओं का असर केवल कुछ उम्मीदवारों तक सीमित नहीं रहता. सरकारी नौकरी की चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता पर भरोसा इससे सीधे प्रभावित होता है. इसी कारण परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड, अधिकारियों की भूमिका और कथित धन लेनदेन की जांच को अहम माना जा रहा है.

रविवार की तलाशी के बाद अब जांच एजेंसी के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कथित भर्ती अनियमितता और धनशोधन के बीच वित्तीय कड़ी कितनी मजबूत है. 18 अगस्त की कार्रवाई के बाद गंगवार से जुड़े परिसरों तक पहुंची जांच से संकेत मिलता है कि एजेंसी मामले में अलग-अलग स्तरों पर मौजूद संभावित संपर्कों और दस्तावेजी साक्ष्यों को जोड़ने की कोशिश कर रही है. फिलहाल ईडी की कार्रवाई जारी है और किसी व्यक्ति की दोषसिद्धि या अंतिम जिम्मेदारी तय करने से पहले जांच के निष्कर्षों और उपलब्ध साक्ष्यों का सामने आना जरूरी होगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-