बांका में सांसद के आवास पर पुलिस कार्रवाई से गरमाया मामला, गिरिधारी यादव ने उठाए सवाल, एसपी ने आरोपों को बताया निराधार

बांका में सांसद के आवास पर पुलिस कार्रवाई से गरमाया मामला, गिरिधारी यादव ने उठाए सवाल, एसपी ने आरोपों को बताया निराधार

प्रेषित समय :21:46:01 PM / Sun, Aug 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बांका. बिहार के बांका में जदयू सांसद गिरिधारी यादव के आवासों पर पुलिस की कथित कार्रवाई को लेकर रविवार को राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई. सांसद ने पुलिस पर बिना सर्च वारंट उनके आवासों में पहुंचने और तलाशी लेने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की वैधता पर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है और कहा है कि मामले को भागलपुर प्रक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक के संज्ञान में भी लाया जाएगा. दूसरी ओर, बांका के पुलिस अधीक्षक अमितेश कुमार ने सांसद के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि पुलिस सांसद के आवास पर गई ही नहीं थी. उनके मुताबिक पुलिस की कार्रवाई एक कथित अवैध मिट्टी खनन मामले की जांच से जुड़ी थी और जांच के दौरान सामने आए एक व्यक्ति के घर पर पुलिस टीम पहुंची थी.

मामले ने उस समय तूल पकड़ा, जब सांसद ने रविवार को सिंचाई विभाग के विश्रामगृह में पत्रकारों से बातचीत करते हुए पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए. सांसद का कहना है कि उनके चांदन और देवघर स्थित आवासों पर पुलिस पहुंची और वहां मौजूद लोगों को कार्रवाई की जानकारी दी गई. उनके अनुसार, देवघर स्थित आवास पर मौजूद महिलाओं ने फोन कर पुलिस के पहुंचने की सूचना दी. इसके बाद उन्होंने फोन पर पुलिसकर्मियों से कार्रवाई का आधार और तलाशी वारंट के संबंध में जानकारी मांगी. सांसद के मुताबिक, उन्हें बताया गया कि पुलिस के पास कोई सर्च वारंट नहीं था.

गिरिधारी यादव ने इस घटनाक्रम को सामान्य पुलिस जांच से अलग बताते हुए सवाल उठाया कि यदि किसी जनप्रतिनिधि के आवास पर तलाशी या कार्रवाई की जाती है तो उसकी प्रक्रिया और कानूनी आधार स्पष्ट होना चाहिए. उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मिलने का प्रयास किया था. सांसद के अनुसार, उन्होंने अपने लेटर पैड पर मुलाकात के लिए समय भी मांगा, लेकिन उन्हें मिलने का अवसर नहीं मिला. उन्होंने पुलिस अधीक्षक से फोन पर संपर्क करने की कोशिश का भी उल्लेख किया.

सांसद ने कहा कि यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ पुलिस कार्रवाई को लेकर ऐसी स्थिति पैदा हो सकती है तो आम नागरिकों के सामने आने वाली परिस्थितियों का अंदाजा लगाया जा सकता है. इसी वजह से उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है. उनका कहना है कि वह मामले को भागलपुर प्रक्षेत्र के आईजी के सामने रखेंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पुलिस किस मामले में और किस आधार पर उनके आवासों तक पहुंची थी.

हालांकि पुलिस प्रशासन ने सांसद की ओर से लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया है. बांका के एसपी अमितेश कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस सांसद गिरिधारी यादव के घर गई ही नहीं थी. उन्होंने बताया कि प्रस्तावित बीएमपी-10 की जमीन मौथावाड़ी क्षेत्र से कथित अवैध मिट्टी खनन के मामले में पहले अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. पुलिस ने मामले की जांच आगे बढ़ाई तो जांच के दौरान प्रिंस कंस्ट्रक्शन का नाम सामने आया. इसी क्रम में पुलिस लालधारी यादव के घर पहुंची थी, जिन्हें सांसद का भाई बताया गया है.

पुलिस अधीक्षक के अनुसार, कार्रवाई का संबंध सांसद के पद या उनके आवास से नहीं था, बल्कि एक दर्ज मामले की जांच से था. पुलिस का कहना है कि अनुसंधान के दौरान जिन लोगों या संस्थानों की भूमिका सामने आती है, उनसे संबंधित जानकारी जुटाना जांच का हिस्सा होता है. इसी प्रक्रिया के तहत पुलिस टीम संबंधित व्यक्ति के घर पहुंची थी.

इस पूरे विवाद में सबसे अहम अंतर सांसद और पुलिस के दावों के बीच है. सांसद का कहना है कि पुलिस उनके तीन आवासों पर पहुंची और तलाशी जैसी कार्रवाई की गई, जबकि एसपी का कहना है कि पुलिस सांसद के घर गई ही नहीं. पुलिस प्रशासन के मुताबिक टीम जिस घर पर पहुंची, वह सांसद के भाई लालधारी यादव का था. ऐसे में अब जांच का केंद्र यह भी बन गया है कि पुलिस टीम वास्तव में किन परिसरों में गई थी और वहां किस उद्देश्य से कार्रवाई की गई.

मामले की पृष्ठभूमि में अवैध मिट्टी खनन की शिकायत भी महत्वपूर्ण है. पुलिस के मुताबिक प्रस्तावित बीएमपी-10 की जमीन से मिट्टी खनन का मामला सामने आया था. इस संबंध में प्रारंभिक स्तर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी. बाद की जांच में प्रिंस कंस्ट्रक्शन का नाम सामने आने के बाद पुलिस ने संबंधित लोगों से पूछताछ और तथ्यों की पड़ताल शुरू की. इसी जांच की कड़ी में सांसद के भाई के घर तक पुलिस पहुंचने की बात पुलिस अधिकारी ने कही है.

सांसद की आपत्ति हालांकि सिर्फ कार्रवाई के स्थान तक सीमित नहीं है. उनका मुख्य सवाल तलाशी की प्रक्रिया और उसके लिए जरूरी कानूनी औपचारिकताओं को लेकर है. वह चाहते हैं कि यह स्पष्ट किया जाए कि पुलिस के पास किस प्रकार का आदेश था, किस मामले में कार्रवाई की जा रही थी और किन परिस्थितियों में आवास तक पुलिस टीम पहुंची. यही कारण है कि उन्होंने मामले की जांच किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से कराने की मांग उठाई है.

दूसरी ओर एसपी अमितेश कुमार ने सांसद के साथ किसी प्रकार के टकराव या व्यक्तिगत कार्रवाई की बात से इनकार किया है. उन्होंने कहा कि सांसद के साथ कई कार्यक्रमों में वह स्वयं मौजूद रहे हैं और उनसे मुलाकात नहीं करने का कोई कारण नहीं है. एसपी ने सांसद द्वारा उनसे समय नहीं दिए जाने के आरोप पर भी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं है कि वह सांसद से मुलाकात न करें.

इस विवाद ने पुलिस कार्रवाई की पारदर्शिता और जनप्रतिनिधियों के अधिकारों से जुड़े सवालों को भी चर्चा में ला दिया है. किसी आपराधिक मामले की जांच में पुलिस की भूमिका और दूसरी ओर नागरिकों के कानूनी अधिकार, दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी माना जाता है. ऐसे मामलों में कार्रवाई की प्रक्रिया को लेकर उठने वाले सवालों का स्पष्ट जवाब प्रशासन की ओर से सामने आना महत्वपूर्ण होता है, ताकि किसी तरह की गलतफहमी की स्थिति न बने.

फिलहाल बांका में मामला दो अलग-अलग दावों के बीच खड़ा है. सांसद पुलिस कार्रवाई को लेकर गंभीर आपत्ति जता रहे हैं और उच्च स्तर पर जांच की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अवैध मिट्टी खनन मामले की जांच का हिस्सा थी और सांसद के आवास पर पुलिस गई ही नहीं. अब निगाह इस बात पर रहेगी कि प्रस्तावित बीएमपी-10 की जमीन से जुड़े मामले की जांच आगे किस दिशा में बढ़ती है और सांसद द्वारा उठाए गए सवालों पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी स्तर से क्या स्पष्टीकरण सामने आता है. इस बीच, आरोप और प्रत्यारोप के बीच इतना साफ है कि बांका में पुलिस की कार्रवाई ने एक सामान्य जांच को राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का मुद्दा बना दिया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-