लालू यादव की तस्वीर का 251 किलो दूध से अभिषेक, समर्थक बोले कृष्ण ने मथुरा बचाई थी कलयुग में लालू बिहार की रक्षा करेंगे

लालू यादव की तस्वीर का 251 किलो दूध से अभिषेक, समर्थक बोले कृष्ण ने मथुरा बचाई थी कलयुग में लालू बिहार की रक्षा करेंगे

प्रेषित समय :21:48:43 PM / Sun, Aug 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र/पटना. सावन के महीने में भगवान शिव के जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक की परंपरा के बीच बिहार के वैशाली जिले में एक ऐसा आयोजन चर्चा का विषय बन गया, जिसमें भगवान शिव के बजाय राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की तस्वीर का 251 किलो दूध से अभिषेक किया गया. राजद नेता केदार प्रसाद यादव की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में आचार्य की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चार के बीच लालू यादव के चित्र पर दूध चढ़ाया गया. इस दौरान समर्थकों ने लालू यादव के समर्थन में नारे लगाए और उन्हें भगवान कृष्ण का अवतार बताते हुए कहा कि जिस तरह द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने मथुरा की रक्षा की थी, उसी तरह कलयुग में लालू यादव बिहार की रक्षा कर रहे हैं.

वैशाली में आयोजित इस कार्यक्रम ने सावन के धार्मिक माहौल के बीच राजनीतिक रंग ले लिया. लालू यादव की तस्वीर को फूलों से सजाया गया था और आचार्य अभय पंडित के सानिध्य में पूरे विधि-विधान के साथ दुग्धाभिषेक कराया गया. कार्यक्रम में स्थानीय राजद कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ जुटी. दूध से अभिषेक के दौरान समर्थक लगातार नारेबाजी करते रहे और लालू यादव के प्रति अपनी राजनीतिक निष्ठा का प्रदर्शन किया.

आयोजक केदार प्रसाद यादव ने लालू प्रसाद यादव को अपने लिए किसी सामान्य राजनेता से कहीं अधिक बताया. उन्होंने कहा कि लालू यादव ने लंबे समय तक शोषित, पिछड़े और वंचित वर्गों के अधिकारों की लड़ाई लड़ी तथा सामाजिक न्याय की राजनीति को मजबूत किया. इसी वजह से उनके समर्थकों के बीच उनके प्रति गहरी श्रद्धा है. इसी श्रद्धा को व्यक्त करने के लिए उन्होंने लालू यादव की तस्वीर का दुग्धाभिषेक करने का निर्णय लिया.

कार्यक्रम के दौरान केदार प्रसाद यादव ने लालू यादव की तुलना भगवान कृष्ण से करते हुए कहा कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने मथुरा की रक्षा की थी, जबकि आज के कलयुग में लालू यादव बिहार की रक्षा कर रहे हैं. उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने भी जोरदार नारे लगाए. धार्मिक अनुष्ठान के रूप में शुरू हुआ यह आयोजन कुछ ही देर में लालू यादव के राजनीतिक प्रभाव और समर्थकों की भावनाओं को प्रदर्शित करने वाला कार्यक्रम बन गया.

सावन का महीना हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दौरान देशभर में शिवालयों में श्रद्धालु जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक करते हैं. इसके साथ ही बेलपत्र, धतूरा, शमी पत्र और अन्य पूजन सामग्री भगवान शिव को अर्पित करने की परंपरा है. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार रुद्राभिषेक तथा अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी कराते हैं. ऐसे धार्मिक वातावरण के बीच किसी राजनीतिक नेता की तस्वीर का दूध से अभिषेक किया जाना स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया.

वैशाली में हुए इस आयोजन में धार्मिक कर्मकांड के साथ राजनीतिक संदेश भी दिखाई दिया. कार्यक्रम में शामिल समर्थकों ने लालू यादव के सामाजिक न्याय के राजनीतिक विचारों को याद किया और उनके योगदान को अपने तरीके से सम्मान देने की बात कही. आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन किसी राजनीतिक सभा की सामान्य शैली में नहीं था, बल्कि लालू यादव के प्रति समर्थकों की व्यक्तिगत श्रद्धा और भावनात्मक जुड़ाव को प्रदर्शित करने के उद्देश्य से किया गया था.

कार्यक्रम में आचार्य अभय पंडित की मौजूदगी भी रही. उनके सानिध्य में तस्वीर को फूलों से सजाया गया और मंत्रोच्चार के बीच दुग्धाभिषेक कराया गया. हालांकि, धार्मिक परंपराओं में देवताओं के अभिषेक का विशेष स्थान है, लेकिन किसी जीवित राजनीतिक व्यक्ति की तस्वीर का इस तरह धार्मिक अनुष्ठान के माध्यम से अभिषेक करना अपने आप में अलग तरह का राजनीतिक-सामाजिक दृश्य सामने लाता है.

आयोजन के दौरान 251 किलो दूध का इस्तेमाल किया गया. बड़ी मात्रा में दूध के इस्तेमाल के कारण भी यह कार्यक्रम लोगों के बीच चर्चा में आया. समर्थकों के लिए यह लालू यादव के प्रति सम्मान और आस्था का प्रतीक था. वहीं, राजनीतिक दृष्टि से देखें तो इस तरह का आयोजन किसी नेता के समर्थक आधार में मौजूद भावनात्मक जुड़ाव को भी सामने लाता है.

लालू प्रसाद यादव लंबे समय से बिहार की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे हैं. सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्गों की राजनीति के मुद्दों के कारण उनका एक मजबूत समर्थक वर्ग रहा है. उनके समर्थक अक्सर उन्हें सामाजिक परिवर्तन की राजनीति से जोड़कर देखते हैं. वैशाली में आयोजित कार्यक्रम में भी यही राजनीतिक भाव धार्मिक प्रतीकों के माध्यम से सामने आया.

कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों ने कहा कि लालू यादव ने राजनीति में उन वर्गों की आवाज उठाई जिन्हें लंबे समय तक मुख्यधारा में पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिला. इसी कारण उनके लिए लालू यादव केवल एक राजनीतिक नेता नहीं हैं, बल्कि सामाजिक सम्मान और अधिकारों की लड़ाई का प्रतीक हैं. केदार यादव ने इसी भावना को धार्मिक उपमा के माध्यम से व्यक्त किया.

हालांकि, इस आयोजन को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ सकती हैं. एक ओर समर्थक इसे अपने नेता के प्रति श्रद्धा और सम्मान का प्रदर्शन बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजनीतिक व्यक्तित्व को धार्मिक प्रतीकों से जोड़ने की प्रवृत्ति पर सवाल भी उठ सकते हैं. फिलहाल वैशाली का यह आयोजन सावन के दौरान हुए उन कार्यक्रमों में शामिल हो गया है, जिसमें धार्मिक अनुष्ठान और राजनीति का अनोखा मेल देखने को मिला.

251 किलो दूध से लालू यादव की तस्वीर का अभिषेक और उन्हें भगवान कृष्ण के अवतार के रूप में प्रस्तुत करने वाला समर्थकों का बयान इस आयोजन को सामान्य राजनीतिक कार्यक्रमों से अलग बनाता है. वैशाली में हुए इस आयोजन ने एक बार फिर यह दिखाया कि बिहार की राजनीति में नेताओं के प्रति समर्थकों की भावनाएं केवल चुनावी समर्थन तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि कई बार वे व्यक्तिगत श्रद्धा और धार्मिक प्रतीकों तक भी पहुंच जाती हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-