रोज के सिर्फ 3 मिनट बदल सकते हैं सेहत का रुख, 13 तरह के कैंसर के कम जोखिम से जुड़ी तेज गतिविधि

रोज के सिर्फ 3 मिनट बदल सकते हैं सेहत का रुख, 13 तरह के कैंसर के कम जोखिम से जुड़ी तेज गतिविधि

प्रेषित समय :22:48:21 PM / Sun, Aug 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

दिनभर की व्यस्तता में व्यायाम के लिए अलग से समय निकालना कई लोगों के लिए मुश्किल होता है. घंटों कार्यालय में बैठना, घर पर लगातार स्क्रीन देखना और छोटी दूरी के लिए भी वाहन का इस्तेमाल करना आधुनिक जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है. ऐसे लोगों के लिए हाल ही में सामने आई एक वैज्ञानिक स्टडी महत्वपूर्ण संकेत देती है. शोधकर्ताओं के मुताबिक, रोजमर्रा की निष्क्रियता के बीच थोड़े समय की तेज शारीरिक गतिविधि भी कैंसर के जोखिम से जुड़ी हो सकती है. खास तौर पर दिन में करीब तीन मिनट की जोरदार गतिविधि को लेकर अध्ययन में सकारात्मक संबंध सामने आया है. 

हालांकि, इसे इस रूप में समझना सही नहीं होगा कि रोज केवल तीन मिनट व्यायाम करने से कैंसर से बचाव की गारंटी मिल जाती है. अध्ययन में शारीरिक गतिविधि और कैंसर के जोखिम के बीच संबंध देखा गया है. शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि दिन के कुछ निष्क्रिय समय को चलने-फिरने या अधिक तीव्र गतिविधि से बदलने पर जोखिम किस तरह बदल सकता है. इसलिए इस शोध का सबसे अहम संदेश यह है कि शरीर को लंबे समय तक लगातार निष्क्रिय रखने के बजाय दिनचर्या में गतिविधि बढ़ाना फायदेमंद हो सकता है.

करीब 60 हजार लोगों के आंकड़ों का अध्ययन
यह शोध बीएमसी मेडिसिन में प्रकाशित हुआ है. इसमें यूके बायोबैंक के 59,218 वयस्कों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया. प्रतिभागियों की औसत उम्र करीब 61.7 वर्ष थी और इनमें 55 प्रतिशत महिलाएं थीं. इन लोगों की रोजाना गतिविधियों को पहनने योग्य उपकरणों के माध्यम से दर्ज किया गया था. इसके बाद स्वास्थ्य रिकॉर्ड के आधार पर वर्षों तक उनके स्वास्थ्य पर नजर रखी गई. 

अध्ययन में प्रतिभागियों की गतिविधियों को केवल इस आधार पर नहीं देखा गया कि वे व्यायाम करते हैं या नहीं. शोधकर्ताओं ने यह भी देखा कि लोग दिन के 24 घंटे में कितना समय सोते हैं, कितना समय बैठे रहते हैं, कितनी देर खड़े रहते हैं और अलग-अलग तीव्रता से कितना चलते या व्यायाम करते हैं. इस तरीके से यह समझने की कोशिश की गई कि एक तरह की गतिविधि के स्थान पर दूसरी गतिविधि आने से कैंसर के जोखिम में क्या संबंध दिखाई देता है. 

करीब आठ साल तक स्वास्थ्य पर नजर
अध्ययन में शामिल लोगों का औसत अनुवर्ती समय करीब आठ वर्ष रहा. इस दौरान 2,385 लोगों में अध्ययन से जुड़े 13 प्रकार के कैंसर में से किसी एक का नया मामला सामने आया. शोधकर्ताओं ने इन कैंसरों को एक संयुक्त श्रेणी में रखा, क्योंकि पहले के शोधों में इनका संबंध शारीरिक निष्क्रियता से पाया गया था. 

इसका अर्थ यह नहीं है कि अध्ययन ने यह साबित किया कि 13 अलग-अलग कैंसर केवल तीन मिनट की गतिविधि से रुक जाएंगे. बल्कि शोध में शारीरिक गतिविधि के स्तर और इन 13 कैंसरों की घटनाओं के बीच संबंध का अध्ययन किया गया. यही अंतर इस शोध को समझने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है.

तीन मिनट की तेज गतिविधि पर क्यों हुआ ध्यान
शोध में गतिविधियों की तीव्रता को भी अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया. इसमें हल्की शारीरिक गतिविधि, मध्यम गतिविधि और जोरदार गतिविधि शामिल थी. औसतन प्रतिभागियों के दिन में जोरदार शारीरिक गतिविधि का समय बहुत कम था—करीब तीन मिनट. 

जब शोधकर्ताओं ने यह मॉडल किया कि रोजाना तीन मिनट के अन्य व्यवहार की जगह जोरदार शारीरिक गतिविधि की जाए, तो कैंसर के जोखिम का अनुमान कम दिखाई दिया. उदाहरण के तौर पर तीन मिनट बैठे रहने, सोने या हल्की गतिविधि के स्थान पर जोरदार गतिविधि रखने के मॉडल में जोखिम अनुपात करीब 0.96 रहा, यानी लगभग चार प्रतिशत कम जोखिम से संबंध दिखाई दिया. 

यहां यह समझना जरूरी है कि यह चार प्रतिशत कोई गारंटीकृत व्यक्तिगत लाभ नहीं है. यह अध्ययन के सांख्यिकीय मॉडल से निकला संबंध है. वास्तविक जीवन में किसी व्यक्ति का जोखिम उसकी उम्र, आनुवंशिक पृष्ठभूमि, वजन, खान-पान, धूम्रपान, शराब का सेवन, अन्य बीमारियों और कई दूसरे कारकों पर निर्भर करता है.

सीढ़ियां चढ़ना या तेज दौड़ना हो सकता है उदाहरण
तेज शारीरिक गतिविधि का मतलब केवल जिम में जाकर भारी कसरत करना नहीं है. दिनचर्या में कुछ ऐसी गतिविधियां भी शामिल हो सकती हैं, जिनसे थोड़े समय के लिए सांस और हृदय की गति तेज हो जाए. उदाहरण के तौर पर तेजी से सीढ़ियां चढ़ना, थोड़ी देर तेज दौड़ना या किसी जरूरी काम के लिए तेजी से चलना ऐसी गतिविधियों के उदाहरण हो सकते हैं.

लेकिन हर व्यक्ति की शारीरिक क्षमता एक जैसी नहीं होती. उम्रदराज व्यक्ति, लंबे समय से निष्क्रिय रहने वाले लोग या किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों को अचानक बहुत तेज गतिविधि शुरू करने के बजाय अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधि बढ़ानी चाहिए.

15 मिनट की गतिविधि भी महत्वपूर्ण
अध्ययन का संदेश केवल तीन मिनट की जोरदार गतिविधि तक सीमित नहीं है. शोध में सामान्य रूप से अधिक चलने-फिरने को भी कम कैंसर जोखिम से जोड़ा गया. शोधकर्ताओं ने पाया कि रोजाना के व्यवहार में बैठने या अन्य गतिविधियों के स्थान पर चलने का समय बढ़ाने से भी जोखिम कम होने का संबंध दिखाई देता है. उदाहरण के तौर पर 15 मिनट की गतिविधि को निष्क्रिय समय के स्थान पर रखने पर करीब दो प्रतिशत कम जोखिम का संबंध देखा गया. 

इससे यह संकेत मिलता है कि अगर कोई व्यक्ति जोरदार गतिविधि करने की स्थिति में नहीं है, तब भी दिनभर में अधिक चलना, खड़े होना और लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचना उपयोगी आदत हो सकती है.

लंबे समय तक बैठना बना अहम सवाल
इस शोध में केवल व्यायाम पर ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि यह भी देखा गया कि व्यक्ति दिन का कितना हिस्सा निष्क्रिय अवस्था में बिताता है. अध्ययन में जिन लोगों में बाद में कैंसर के मामले सामने आए, उनमें शुरुआती स्तर पर कम चलने और अधिक समय तक बैठे रहने का पैटर्न देखा गया. 

यानी रोज एक घंटे जिम जाने के बाद बाकी पूरा दिन बैठे रहना और पूरे दिन छोटे-छोटे अंतराल में सक्रिय रहना एक जैसा व्यवहार नहीं है. शोध का एक महत्वपूर्ण संकेत यह है कि बैठने के समय को कम करके सामान्य गतिविधि बढ़ाना भी स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकता है.

शोध ने किन कैंसरों को देखा
अध्ययन में शारीरिक गतिविधि से जुड़े माने जाने वाले 13 कैंसर स्थलों को एक संयुक्त परिणाम के रूप में देखा गया. शोधपत्र में यह श्रेणी पहले के प्रमाणों के आधार पर तैयार की गई थी. इसमें शारीरिक निष्क्रियता से जुड़े कैंसरों की घटनाओं को सामूहिक रूप से देखा गया, न कि हर कैंसर के लिए तीन मिनट की गतिविधि का अलग-अलग प्रभाव साबित किया गया.इसलिए सोशल मीडिया या सामान्य सुर्खियों में दिखाई देने वाले इस दावे को कि "तीन मिनट की गतिविधि 13 कैंसर रोक देती है", वैज्ञानिक निष्कर्ष के रूप में स्वीकार करना सही नहीं होगा. सही निष्कर्ष यह है कि थोड़े समय की अधिक तीव्र गतिविधि और कम कैंसर जोखिम के बीच संबंध पाया गया है.

क्या सिर्फ तीन मिनट की कसरत काफी है
विशेषज्ञों के लिए भी इस अध्ययन का महत्व इसी बात में है कि यह कम समय की गतिविधि के संभावित लाभों पर ध्यान दिलाता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि लंबे समय तक नियमित व्यायाम की जरूरत खत्म हो गई. सामान्य स्वास्थ्य के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद, स्वस्थ वजन बनाए रखना और तंबाकू से दूरी जैसे उपाय अभी भी महत्वपूर्ण हैं.

इस अध्ययन में भी शोधकर्ताओं ने गतिविधि के अलग-अलग स्तरों को देखा और पाया कि अधिक मध्यम से जोरदार गतिविधि का संबंध कम कैंसर जोखिम से था. 

दिनचर्या में ऐसे बढ़ाएं गतिविधि
अगर कोई व्यक्ति लगातार बैठकर काम करता है तो हर कुछ समय बाद उठकर थोड़ा चलना शुरू किया जा सकता है. लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल, छोटी दूरी पर पैदल जाना, फोन पर बात करते समय खड़े रहना और खाली समय में तेज चाल से चलना रोज की गतिविधि बढ़ाने के आसान तरीके हो सकते हैं.

जिन लोगों की क्षमता अनुमति देती है, वे दिन में थोड़े समय के लिए तेज गतिविधि भी शामिल कर सकते हैं. हालांकि अचानक बहुत अधिक जोरदार व्यायाम शुरू करने के बजाय धीरे-धीरे गतिविधि बढ़ाना बेहतर है.

शोध का सबसे बड़ा संदेश
इस अध्ययन का सबसे व्यावहारिक संदेश यह है कि शारीरिक गतिविधि के लिए हमेशा लंबा समय निकालना जरूरी नहीं कि शरीर को सक्रिय करने का कोई भी अवसर छोड़ दिया जाए. कुछ मिनट की तेज गतिविधि और दिनभर में बैठने के समय को कम करना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है. शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला कि अन्य व्यवहारों की जगह अधिक चलना और विशेष रूप से अधिक मध्यम से जोरदार गतिविधि कैंसर की घटनाओं के कम जोखिम से जुड़ी थी. 

फिर भी कैंसर एक जटिल बीमारी है और उसका जोखिम केवल व्यायाम से तय नहीं होता. इसलिए इस शोध को बचाव की गारंटी के बजाय जीवनशैली में छोटे लेकिन नियमित बदलावों के पक्ष में मिले एक वैज्ञानिक संकेत के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा. दिनभर बैठे रहने के बजाय शरीर को बार-बार सक्रिय करना, अपनी क्षमता के अनुसार नियमित व्यायाम करना और संतुलित जीवनशैली अपनाना लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए ज्यादा व्यापक रणनीति हो सकती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-