26 हजार रुपये की ड्रेस पर बवाल, साड़ी को नया नाम देने पर फैशन ब्रांड घिरा

26 हजार रुपये की ड्रेस पर बवाल, साड़ी को नया नाम देने पर फैशन ब्रांड घिरा

प्रेषित समय :20:09:29 PM / Sun, Aug 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. भारतीय परिधान और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े एक नए विवाद ने सोशल मीडिया पर जोर पकड़ लिया है. अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित एक फैशन ब्रांड की करीब 26 हजार रुपये कीमत वाली पोशाक को लेकर लोगों ने सवाल उठाए हैं. शुरुआत में जिस परिधान को पश्चिमी शैली की ‘ड्रेप्ड मैक्सी ड्रेस’ के रूप में पेश किया गया था, उसमें साड़ी की पारंपरिक बनावट और पहनने की शैली दिखाई देने पर सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने इसे साड़ी का नया नाम देकर बेचने की कोशिश बताया.

विवाद उस समय शुरू हुआ जब सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने पोशाक की तस्वीरों को ध्यान से देखा. इसमें कमर के आसपास की प्लीट्स और कंधे पर डाला गया पल्लू जैसी संरचना स्पष्ट दिखाई देती है. इन विशेषताओं को देखते हुए लोगों ने सवाल किया कि जिस परिधान की मूल शैली भारतीय साड़ी से मेल खाती है, उसे पश्चिमी पोशाक के रूप में अलग पहचान देकर बाजार में क्यों पेश किया जा रहा है.

मामले ने इसलिए भी ध्यान खींचा क्योंकि पोशाक की कीमत करीब 26 हजार रुपये बताई गई. सोशल मीडिया पर आलोचकों का कहना है कि किसी पारंपरिक परिधान से प्रेरणा लेना अलग बात है, लेकिन उसकी मूल सांस्कृतिक पहचान का उल्लेख किए बिना उसी शैली को नए नाम और ऊंची कीमत के साथ पेश करना सांस्कृतिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल खड़े करता है.

इस विवाद में एक और दिलचस्प पहलू सामने आया. संबंधित ब्रांड के संस्थापक एशियाई मूल के पति-पत्नी बताए जा रहे हैं और उनका कारोबार कैलिफोर्निया से संचालित होता है. इसके बावजूद सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने कहा कि किसी समुदाय से संबंध होना अपने आप में किसी दूसरे समुदाय की पारंपरिक पोशाक को अलग नाम देने के सवाल को खत्म नहीं करता. कुछ लोगों ने इसे प्रवासी समाज में सांस्कृतिक पहचान और व्यावसायिक फैशन के बीच पैदा होने वाले तनाव का उदाहरण बताया.

सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं. कुछ उपयोगकर्ताओं ने साफ कहा कि तस्वीरों में दिखाई दे रही पोशाक को साड़ी से अलग मानना मुश्किल है. वहीं कुछ प्रतिक्रियाओं में यह सवाल भी उठाया गया कि वैश्विक फैशन उद्योग में पारंपरिक परिधानों से प्रेरणा लेते समय उनकी सांस्कृतिक जड़ों का उल्लेख किस हद तक जरूरी होना चाहिए.

विवाद बढ़ने के बाद ब्रांड की ओर से परिधान के नाम में बदलाव किए जाने की जानकारी सामने आई. पहले इसे ‘ड्रेप्ड मैक्सी ड्रेस’ के नाम से सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन बाद में इसका नाम बदलकर ‘एम्बेलिश्ड साड़ी-इंस्पायर्ड गाउन’ कर दिया गया. नाम में बदलाव के बाद यह संकेत जरूर मिला कि परिधान की साड़ी से समानता को अब उत्पाद विवरण में अधिक स्पष्ट रूप से स्वीकार किया गया है.

हालांकि नाम बदलने के बाद भी बहस खत्म नहीं हुई. सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि विवाद केवल नाम का नहीं, बल्कि किसी पारंपरिक परिधान को किस तरह प्रस्तुत और बाजार में स्थापित किया जाता है, इसका है. उनके अनुसार साड़ी केवल कपड़े की एक लंबी पट्टी या पहनने की शैली नहीं, बल्कि भारतीय समाज और संस्कृति से जुड़ी एक विशिष्ट पोशाक है, जिसकी अपनी ऐतिहासिक और क्षेत्रीय विविधताएं हैं.

दूसरी ओर फैशन उद्योग में पारंपरिक परिधानों से प्रेरणा लेकर नए डिजाइन तैयार करना लंबे समय से सामान्य प्रक्रिया रही है. डिजाइनर अलग-अलग संस्कृतियों के वस्त्रों की संरचना, सिल्हूट और पहनने के तरीके से प्रेरणा लेते हैं और उन्हें आधुनिक फैशन के अनुरूप ढालते हैं. विवाद तब गहराता है जब प्रेरणा और मूल सांस्कृतिक पहचान के बीच की सीमा को लेकर उपभोक्ताओं और समुदायों की राय अलग हो जाती है.

भारत से जुड़े पारंपरिक परिधानों को लेकर अंतरराष्ट्रीय फैशन बाजार में इससे पहले भी विवाद सामने आते रहे हैं. ऐसे मामलों में भारतीय सोशल मीडिया उपयोगकर्ता अक्सर यह सवाल उठाते हैं कि वैश्विक ब्रांड भारतीय डिजाइन और पारंपरिक वस्त्रों से व्यावसायिक लाभ लेते समय उनके मूल स्रोत और सांस्कृतिक संदर्भ को कितना महत्व देते हैं.

इस मामले ने फिलहाल साड़ी की पहचान को लेकर सोशल मीडिया पर नई बहस शुरू कर दी है. एक ओर ब्रांड ने उत्पाद के नाम में बदलाव कर उसे साड़ी से प्रेरित बताया है, वहीं दूसरी ओर आलोचक इसे केवल नाम बदलने से आगे का विषय मान रहे हैं. अब चर्चा इस बात पर केंद्रित है कि वैश्विक फैशन बाजार में पारंपरिक भारतीय परिधानों को आधुनिक रूप देते समय सांस्कृतिक पहचान, श्रेय और व्यावसायिक प्रस्तुति के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-