जबलपुर. प्रदेश में बिजली उत्पादन व्यवस्था को अधिक सुरक्षित, दक्ष और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की दिशा में मध्यप्रदेश पावर जनरेटिंग कंपनी ने अपनी कार्यप्रणाली में अंतरराष्ट्रीय मानकों को शामिल करने की तैयारी तेज कर दी है. इसी सिलसिले में नयागांव स्थित नवनिर्मित प्रशिक्षण संस्थान में एक दिवसीय तकनीकी कार्यशाला आयोजित की गई. इसमें कंपनी के 15 अभियंताओं ने भाग लेकर बिजली संयंत्रों के संचालन, गुणवत्ता नियंत्रण, सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर प्रशिक्षण लिया.
कार्यशाला का उद्देश्य केवल प्रमाणन हासिल करना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानकों को संयंत्रों की रोजमर्रा की कार्यप्रणाली का हिस्सा बनाना रहा. अधिकारियों ने कहा कि बिजली उत्पादन की बढ़ती जरूरतों के बीच संयंत्रों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए तकनीकी दक्षता के साथ व्यवस्थित प्रबंधन प्रणाली जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए कंपनी के ताप और जल विद्युत गृहों में मानकीकृत प्रक्रियाओं को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
प्रशिक्षण में चार प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानकों को एक-दूसरे से जोड़कर लागू करने की रणनीति पर चर्चा हुई. गुणवत्ता प्रबंधन से संबंधित आईएसओ 9001 के माध्यम से प्रक्रियाओं में एकरूपता और नियंत्रण बेहतर करने पर जोर दिया गया. वहीं आईएसओ 14001 के तहत विद्युत उत्पादन से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की पहचान और उनके नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत करने पर चर्चा हुई. संयंत्रों में कर्मचारियों और तकनीकी टीम की सुरक्षा से जुड़े जोखिम कम करने के लिए आईएसओ 45001 तथा ऊर्जा के बेहतर उपयोग और खपत में कमी के लिए आईएसओ 50001 को महत्वपूर्ण बताया गया.
अधिकारियों के अनुसार इन मानकों को अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी तक सीमित रखने के बजाय एकीकृत प्रबंधन प्रणाली के रूप में लागू करने से अधिक प्रभावी परिणाम मिल सकते हैं. इसके लिए आंतरिक निरीक्षण, दस्तावेजीकरण, प्रक्रिया की नियमित समीक्षा और सुधारात्मक कार्रवाई को भी व्यवस्था का हिस्सा बनाने पर जोर दिया गया. प्रशिक्षण के दौरान अभियंताओं को बताया गया कि किसी भी मानक की सफलता तभी मानी जाएगी, जब उसका प्रभाव संयंत्र की वास्तविक कार्यप्रणाली में दिखाई दे.
कंपनी अब मौजूदा बिजली संयंत्रों के साथ भविष्य में विकसित होने वाली नई इकाइयों को भी आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था से जोड़ने की तैयारी कर रही है. चचाई और सारनी में प्रस्तावित सुपरक्रिटिकल ताप विद्युत इकाइयों के संचालन में शुरुआत से ही आधुनिक तकनीकी और प्रबंधन मानकों को शामिल करने की योजना है. इससे नई इकाइयों में गुणवत्ता, सुरक्षा और ऊर्जा दक्षता को प्रारंभिक स्तर से ही प्राथमिकता दी जा सकेगी.
कार्यशाला में प्रबंध संचालक मनजीत सिंह की अध्यक्षता में अधिकारियों ने तकनीकी बदलावों के साथ मानव संसाधन की भूमिका पर भी चर्चा की. प्रबंधन का मानना है कि युवा अभियंताओं की तकनीकी दक्षता और आधुनिक प्रशिक्षण के जरिए विद्युत गृहों की कार्यक्षमता में सुधार किया जा सकता है. निदेशक तकनीकी सुबोध निगम सहित अन्य अधिकारियों ने मानकों को केवल कागजी प्रक्रिया न बनाकर नियमित कामकाज में लागू करने की आवश्यकता बताई.
कंपनी के मुख्यालय के कार्यालय पहले ही संबंधित प्रमाणन हासिल कर चुके हैं. अब संयंत्र स्तर पर इन व्यवस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है. इससे बिजली उत्पादन की गुणवत्ता के साथ सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा बचत को एक साथ साधने का प्रयास किया जाएगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

