भोपाल. सरकारी पद की पहचान, प्रभाव जमाने के लिए ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा, नकली सीबीआई पहचान पत्र, फर्जी लेटर हेड और महंगी जीवनशैली...इन तमाम चीजों के सहारे लोगों को प्रभावित करने के आरोप में गिरफ्तार तृप्ति राजपूत के मामले की जांच अब भोपाल तक पहुंच गई है. चंदेरी पुलिस ने तृप्ति और उसके भाई को भोपाल लाकर बागमुगालिया स्थित उसके घर तथा अलकापुरी स्थित ससुराल में छापेमारी की. पुलिस की इस कार्रवाई में फर्जी सीबीआई कार्ड, सरकारी लेटरहेड और ठगी से जुड़े कई दस्तावेज मिलने की बात सामने आई है. जांच का दायरा अब इस बात तक बढ़ गया है कि फर्जी पहचान तैयार करने और उसके जरिए लोगों को प्रभावित करने में उसके साथ और कौन-कौन लोग जुड़े थे.
पुलिस के अनुसार तृप्ति राजपूत पर आरोप है कि वह खुद को आईएएस अधिकारी और मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग की एडिशनल हेड बताकर लोगों के बीच अपनी पहचान बनाती थी. इसी कथित फर्जी पहचान और सरकारी पद का प्रभाव दिखाकर उसने एक कारोबारी को अपने झांसे में लिया. मामले में 9.80 लाख रुपये की ठगी का आरोप है. पुलिस जांच में यह बात भी सामने आई है कि कथित फर्जी पहचान के आधार पर कारोबारी से शादी भी की गई. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह केवल एक व्यक्ति को निशाना बनाने का मामला था या इसी तरीके से अन्य लोगों को भी ठगा गया.
तृप्ति के खिलाफ कार्रवाई का मामला तब गंभीर हुआ, जब पुलिस को उसकी कथित गतिविधियों में सरकारी संस्थाओं के नाम और पहचान का इस्तेमाल किए जाने के संकेत मिले. जांच में फर्जी सीबीआई कार्ड और लेटरहेड मिलने के बाद पुलिस इस बिंदु पर भी पड़ताल कर रही है कि इन दस्तावेजों को तैयार कहां कराया गया और इन्हें उपलब्ध कराने वाला कोई अलग नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था. सरकारी पहचान से जुड़े दस्तावेजों की नकल तैयार करना और उनका इस्तेमाल लोगों पर प्रभाव डालने के लिए करना जांच एजेंसियों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे यह पता चल सकता है कि आरोपी ने कितने समय से यह तरीका अपनाया हुआ था.
भोपाल में हुई छापेमारी में पुलिस ने तृप्ति के बागमुगालिया स्थित घर और अलकापुरी स्थित ससुराल की तलाशी ली. पुलिस का फोकस उन दस्तावेजों और सामान पर रहा, जिनसे उसकी कथित फर्जी पहचान की पुष्टि या उसके नेटवर्क के बारे में जानकारी मिल सकती है. जांच के दौरान मिले फर्जी सीबीआई कार्ड, लेटरहेड और अन्य दस्तावेजों को पुलिस महत्वपूर्ण साक्ष्य मानकर आगे की जांच कर रही है. इनके जरिए यह भी पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि तृप्ति किन लोगों से संपर्क में थी और सरकारी अधिकारियों या संस्थानों के नाम का इस्तेमाल किस तरह किया जाता था.
इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प कड़ी ‘भारत सरकार’ लिखी इनोवा कार को बताया जा रहा है. पुलिस के अनुसार तृप्ति और उसके सहयोगी रुतबा दिखाने के लिए ऐसी इनोवा का इस्तेमाल करते थे, जो किराये की थी और जिस पर ‘भारत सरकार’ लिखा हुआ था. सामान्य तौर पर सरकारी वाहन से जुड़ी पहचान आम लोगों पर तत्काल प्रभाव डालती है. पुलिस अब यह पता लगा रही है कि वाहन किसके नाम पर था, उसे किससे किराये पर लिया गया और उस पर सरकारी पहचान दर्शाने की अनुमति या व्यवस्था किसने कराई. वाहन का इस्तेमाल किन-किन स्थानों पर किया गया, इसकी जानकारी भी जुटाई जा रही है.
जांच का एक दूसरा पहलू तृप्ति की कथित जीवनशैली से जुड़ा है. पुलिस को महंगे आईफोन और अन्य लक्जरी सामान मिलने की जानकारी है. जांच एजेंसियों को आशंका है कि महंगे सामान, सरकारी पद की पहचान और वीआईपी अंदाज को एक साथ इस्तेमाल कर ऐसा माहौल बनाया जाता था, जिससे सामने वाला व्यक्ति उसकी बातों पर आसानी से भरोसा कर सके. अब पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि इन सामानों की खरीद किस स्रोत से हुई और इनके लिए धन कहां से आया.
मामले में 9.80 लाख रुपये की कथित ठगी की जांच भी अहम है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रकम किस माध्यम से ली गई, उसका इस्तेमाल कहां किया गया और क्या इस रकम के अलावा भी कोई आर्थिक लेनदेन हुआ था. यदि जांच में अन्य लेनदेन या पीड़ित सामने आते हैं तो मामले का दायरा और बढ़ सकता है. पुलिस ऐसे लोगों की जानकारी भी जुटा रही है, जो तृप्ति की कथित फर्जी पहचान से प्रभावित हुए हों.
तृप्ति द्वारा खुद को आईएएस अधिकारी बताए जाने का पहलू भी जांच के केंद्र में है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उसने अपनी कथित सरकारी पहचान को साबित करने के लिए कौन-कौन से दस्तावेज या पहचान प्रस्तुत किए थे. इसके अलावा मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग से जुड़ी पद की पहचान का इस्तेमाल किस तरह किया गया, इसकी भी जांच की जा रही है. पुलिस यह स्पष्ट करना चाहती है कि क्या किसी सरकारी कार्यालय, अधिकारी या विभाग के नाम का भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष इस्तेमाल किया गया.
फर्जी सीबीआई कार्ड की बरामदगी के बाद जांच अब केवल ठगी के मामले तक सीमित नहीं रह गई है. पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि कार्ड तैयार करने, प्रिंट कराने या उपलब्ध कराने में किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं. इसी तरह फर्जी लेटरहेड कहां तैयार हुए और उनमें सरकारी संस्थाओं के नाम तथा प्रतीकों का इस्तेमाल कैसे किया गया, यह भी जांच का हिस्सा है. यदि इन दस्तावेजों के पीछे कोई संगठित व्यवस्था सामने आती है तो पुलिस कार्रवाई का दायरा कई लोगों तक पहुंच सकता है.
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, तृप्ति की कथित गतिविधियों से जुड़े लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है. उसके भाई को साथ लेकर भोपाल पहुंची पुलिस ने दोनों ठिकानों की तलाशी ली है. अब बरामद दस्तावेजों और अन्य सामान के आधार पर पूछताछ को आगे बढ़ाया जाएगा. पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी ने अपनी पहचान और प्रभाव का इस्तेमाल केवल व्यक्तिगत संबंधों में किया या नौकरी, कारोबार, सरकारी काम अथवा अन्य मामलों में भी लोगों को प्रभावित किया.
मामले की जांच में यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि एक महिला कथित तौर पर लंबे समय तक सरकारी अधिकारी की पहचान के साथ लोगों के बीच कैसे सक्रिय रही. यदि कोई व्यक्ति आईएएस या सीबीआई अधिकारी होने का दावा करता है तो उसकी पहचान और पद की पुष्टि संबंधित सरकारी अभिलेखों से की जा सकती है. इसके बावजूद यदि कोई व्यक्ति फर्जी पहचान के साथ लोगों को प्रभावित करने में सफल रहा, तो यह सरकारी संस्थाओं के नाम और पद का दुरुपयोग रोकने की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है.
फिलहाल चंदेरी पुलिस का जोर बरामद दस्तावेजों की पड़ताल, वाहन के इस्तेमाल की जानकारी जुटाने, कथित आर्थिक लेनदेन का पता लगाने और संभावित अन्य पीड़ितों तक पहुंचने पर है. पुलिस यह भी तलाश रही है कि फर्जी पहचान के पीछे अकेली तृप्ति थी या उसके साथ कोई और व्यक्ति या समूह काम कर रहा था. 9.80 लाख रुपये की कथित ठगी से शुरू हुई जांच अब फर्जी सरकारी पहचान, सीबीआई कार्ड, सरकारी लेटरहेड और ‘भारत सरकार’ लिखी कार तक पहुंच चुकी है. आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजों की जांच से यह साफ होगा कि तृप्ति ने इस कथित पहचान का इस्तेमाल कितने समय तक किया और उसके इस पूरे नेटवर्क में कितने लोग शामिल थे.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

