कोलंबो टेस्ट में भारत की चूक पर कैफ का बड़ा बयान, बोले विराट कोहली होते तो नतीजा अलग होता

कोलंबो टेस्ट में भारत की चूक पर कैफ का बड़ा बयान, बोले विराट कोहली होते तो नतीजा अलग होता

प्रेषित समय :21:26:52 PM / Fri, Aug 28th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. श्रीलंका के खिलाफ कोलंबो टेस्ट में जीत के बेहद करीब पहुंचकर भारत के ड्रॉ पर रुक जाने के बाद पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद कैफ ने टीम के रवैये और मैदान पर ऊर्जा को लेकर सवाल उठाए हैं. कैफ का मानना है कि अगर पूर्व भारतीय कप्तान विराट कोहली इस मुकाबले में खेल रहे होते तो आखिरी दिन टीम का रवैया और आक्रामक हो सकता था और मैच का परिणाम भारत के पक्ष में जा सकता था. कोहली मई 2025 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और अब टेस्ट टीम का हिस्सा नहीं हैं. 

कोलंबो में भारत और श्रीलंका के बीच दूसरा टेस्ट गुरुवार को ड्रॉ पर समाप्त हुआ. भारत ने पहली पारी में 503 रन पर नौ विकेट के स्कोर पर पारी घोषित की थी, जिसके जवाब में श्रीलंका की पहली पारी 290 रन पर सिमट गई. भारत ने फॉलोऑन लागू किया और उस समय मुकाबला उसके नियंत्रण में दिखाई दे रहा था. लेकिन श्रीलंकाई बल्लेबाजों ने दूसरी पारी में जबरदस्त संघर्ष करते हुए भारत को जीत से रोक दिया. श्रीलंका ने 429 रन पर नौ विकेट के बाद पारी घोषित की और मुकाबला ड्रॉ हो गया. 

भारत की ओर से जीत की उम्मीद इसलिए मजबूत थी क्योंकि टीम ने पहली पारी में बड़ी बढ़त हासिल कर ली थी और फॉलोऑन के बाद श्रीलंका के सामने लगातार दबाव बनाए रखा. अंतिम दिन भारत को कुछ विकेट की जरूरत थी, लेकिन सोनल दिनूषा ने लंबी पारी खेलते हुए श्रीलंका की उम्मीदें जिंदा रखीं. उन्होंने दूसरी पारी में नाबाद शतक लगाया और निचले क्रम के साथ मिलकर भारतीय गेंदबाजों को लंबे समय तक विकेट से दूर रखा. अंततः दोनों टीमों ने मैच को ड्रॉ पर समाप्त करने का फैसला किया. 

यही वह स्थिति थी जिस पर कैफ ने भारतीय टीम के रवैये पर सवाल उठाए. उनका कहना था कि टेस्ट क्रिकेट में केवल लगातार गेंदबाजी करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि बल्लेबाजों पर मानसिक और शारीरिक दबाव बनाए रखना भी जरूरी है. कैफ के अनुसार भारत के गेंदबाज कई मौकों पर इस भरोसे में दिखाई दिए कि पिच से मिल रही टर्न अपने आप विकेट दिला देगी. उनके मुताबिक टीम को खुद मौके बनाने और बल्लेबाजों को गलती करने के लिए मजबूर करने की कोशिश करनी चाहिए थी.

कैफ ने इसी संदर्भ में विराट कोहली की कप्तानी शैली का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि कोहली मैदान पर लगातार खिलाड़ियों से संवाद करते, उन्हें सक्रिय रखते और लंबे टेस्ट मुकाबले में ऊर्जा बनाए रखने के लिए प्रेरित करते. कैफ के अनुसार यदि कोहली इस मुकाबले में मौजूद होते तो वह लगातार खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते और टीम को आखिरी गेंद तक आक्रामक बने रहने के लिए प्रेरित करते.

कैफ ने कहा कि कोहली की मौजूदगी केवल उनकी बल्लेबाजी तक सीमित नहीं होती. उनके मुताबिक पूर्व कप्तान का मैदान पर व्यक्तित्व ही ऐसा था कि वह आसपास के खिलाड़ियों को भी लगातार सक्रिय रखते थे. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोहली खिलाड़ियों को नाम लेकर प्रोत्साहित करते और विपक्षी बल्लेबाज के खिलाफ भी लगातार दबाव बनाने की कोशिश करते. कैफ का मानना है कि यही आक्रामकता कोलंबो के अंतिम दिन भारत के लिए निर्णायक साबित हो सकती थी.

हालांकि, कैफ की टिप्पणी को मौजूदा भारतीय टीम पर एक राय के रूप में देखा जा रहा है, न कि मैच के संभावित परिणाम का निश्चित आकलन. कोहली टेस्ट क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और उनकी जगह अब भारतीय टीम की नई पीढ़ी के खिलाड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. मौजूदा कप्तान शुभमन गिल ने भी मैच के बाद टीम के प्रयासों का बचाव किया था. उन्होंने कहा कि टीम ने जीत हासिल करने के लिए पूरी कोशिश की और परिस्थितियां हमेशा योजना के अनुसार नहीं चलतीं. 

गिल के नेतृत्व में भारत ने हालांकि दो टेस्ट की सीरीज 1-0 से अपने नाम कर ली. गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भारत ने जीत हासिल की थी, जबकि कोलंबो टेस्ट ड्रॉ रहा. इसके बावजूद दूसरा टेस्ट भारत के लिए इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि जीत उसे सीरीज में 2-0 की क्लीन स्वीप दिलाती और विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की तालिका में भी स्थिति बेहतर कर सकती थी. 

कोलंबो के नतीजे का असर भारत की विश्व टेस्ट चैंपियनशिप की राह पर भी पड़ा है. भारत इस समय तालिका में पांचवें स्थान पर है और उसके अभियान में अब सात टेस्ट बाकी हैं. शीर्ष दो में जगह बनाने के लिए उसे अपने बाकी मुकाबलों में बेहद मजबूत प्रदर्शन करना होगा. इनमें न्यूजीलैंड के खिलाफ दो टेस्ट और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट शामिल हैं. ऐसे में कोलंबो में मिली जीत का मौका गंवाना भारत के लिए महंगा माना जा रहा है. (Reuters)

कोलंबो टेस्ट की सबसे बड़ी कहानी श्रीलंका की वापसी भी रही. भारत ने उसे पहली पारी में 290 रन पर आउट करने के बाद फॉलोऑन दिया था. इसके बावजूद मेजबान टीम ने दूसरी पारी में 429 रन बनाकर मैच बचा लिया. सोनल दिनूषा ने दोनों पारियों में शतक लगाकर श्रीलंका के प्रतिरोध की अगुआई की. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने भी उनकी दूसरी पारी की शतकीय पारी को श्रीलंका के उल्लेखनीय बचाव का केंद्र बताया. (icc)

भारत के लिए यह मुकाबला इसलिए भी सबक देने वाला रहा क्योंकि टीम ने मैच के बड़े हिस्से में दबदबा बनाए रखने के बावजूद निर्णायक क्षणों में जीत हासिल नहीं की. मुख्य कोच गौतम गंभीर ने भी मैच के बाद टेस्ट क्रिकेट में धैर्य और चरित्र की अहमियत पर जोर दिया. वहीं गिल ने श्रीलंकाई टीम की वापसी की सराहना करते हुए कहा कि इससे भारतीय टीम को सीखने का अवसर मिला. (The Times of India)

कैफ की टिप्पणी ने इसी बहस को नया आयाम दिया है कि टेस्ट क्रिकेट में कप्तान और मैदान पर नेतृत्व की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण होती है. उनके अनुसार कोहली की आक्रामक शैली और लगातार संवाद करने की आदत भारत को उस दबाव वाले चरण में अतिरिक्त ऊर्जा दे सकती थी. लेकिन अब भारतीय टीम को मौजूदा नेतृत्व और खिलाड़ियों के साथ ही आगे बढ़ना है.

कोलंबो का ड्रॉ भारत के लिए सीरीज जीत के बावजूद एक छूटा हुआ अवसर बन गया है. श्रीलंका ने जहां दबाव में मुकाबला बचाकर अपनी जुझारू क्षमता दिखाई, वहीं भारत को यह सोचने का मौका मिला है कि मजबूत स्थिति को निर्णायक जीत में बदलने के लिए आखिरी दिन किस तरह का दबाव और आक्रामकता जरूरी है. कैफ के बयान ने इसी सवाल को फिर सामने ला दिया है कि अगर मैदान पर कोहली जैसी आक्रामक आवाज मौजूद होती तो क्या भारत उस आखिरी बाधा को पार कर पाता.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-