खतरों के खेल से बाहर होकर अविका गौर ने बताई असली सीख, बाहर बैठकर हर कोई खुद को हीरो समझता है

खतरों के खेल से बाहर होकर अविका गौर ने बताई असली सीख, बाहर बैठकर हर कोई खुद को हीरो समझता है

प्रेषित समय :21:31:15 PM / Sun, Aug 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई. टेलीविजन अभिनेत्री अविका गौर के लिए खतरों के खिलाड़ी 15 का सफर भले ही उम्मीद से पहले खत्म हो गया हो, लेकिन शो से बाहर आने के बाद उन्होंने अपने अनुभव को सिर्फ हार या जीत के नजरिये से देखने के बजाय जिंदगी की एक बड़ी सीख के रूप में समझने की कोशिश की है. एलिमिनेशन के बाद शो के नए एपिसोड घर बैठे देख रही अविका ने महसूस किया कि टीवी स्क्रीन के सामने बैठकर किसी स्टंट को आसान समझना और उसी चुनौती के बीच खड़े होकर उसे पूरा करना दो बिल्कुल अलग अनुभव हैं. उन्होंने अपने अनुभव को साझा करते हुए कहा कि किसी परिस्थिति से बाहर खड़े होकर उसके बारे में फैसला करना आसान होता है, क्योंकि वहां डर, दबाव, समय की पाबंदी और उस पल का जोखिम मौजूद नहीं होता.

अविका ने सामाजिक माध्यम पर लिखे अपने लंबे संदेश में स्वीकार किया कि शो से बाहर होने के बाद जब वह एपिसोड देखती हैं तो उनके मन में कई बार यह विचार आता है कि अगर वह उस समय वहां होतीं तो शायद ज्यादा बेहतर प्रदर्शन करतीं. उन्हें लगता है कि वह हार नहीं मानतीं, और ज्यादा जोर लगातीं तो परिणाम अलग हो सकता था. लेकिन अगले ही क्षण उन्हें यह भी एहसास होता है कि वह अब अपने घर के आराम में बैठकर उस चुनौती को देख रही हैं. उन्हें पता है कि आगे क्या होने वाला है और परिणाम क्या रहा. उस समय स्टंट के सामने खड़े प्रतिभागी के पास यह सुविधा नहीं होती.

यही अनुभव अविका के लिए इस बार के शो की सबसे बड़ी सीख बन गया. उनके अनुसार, बाहर बैठकर किसी स्थिति का विशेषज्ञ बन जाना बहुत आसान है. वास्तविक परिस्थिति में वही व्यक्ति जब डर, दबाव और अनिश्चितता से घिरा होता है तो निर्णय लेना उतना सरल नहीं रहता. अविका ने इसी अंतर को अपने अनुभव से समझा है. उनका कहना है कि हम अक्सर किसी घटना के बाद उसके अलग-अलग संभावित परिणामों की कल्पना करने लगते हैं और सोचते हैं कि अगर उस समय हमने दूसरा फैसला लिया होता तो कहानी बदल सकती थी. लेकिन बीती हुई परिस्थिति को बार-बार अपने मन में दोहराने से वह बदली नहीं जा सकती.

उनके लिए एलिमिनेशन का सबसे कठिन हिस्सा शायद यही है कि उन्हें अब भी लगता है कि उनके भीतर बहुत कुछ करने की क्षमता बाकी थी. शो से जल्दी बाहर होने के बाद उनके मन में यह सवाल बना रहा कि क्या वह कुछ और बेहतर कर सकती थीं. लेकिन अब वह इसी भावना को अपने ऊपर बोझ बनाने के बजाय स्वीकार करने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने माना कि उनके भीतर यह विश्वास होना स्वाभाविक है कि उनके पास देने के लिए अभी बहुत कुछ था, लेकिन इस सोच को उस काम की अहमियत कम नहीं करने देना चाहिए जो उन्होंने वास्तव में किया.

अविका का इस शो से रिश्ता नया नहीं है. वह इससे पहले भी खतरों के खिलाड़ी के नौवें सीजन में हिस्सा ले चुकी हैं. उस समय वह 21 वर्ष की थीं. उनके अनुसार, उस दौर में शो का अनुभव उनके व्यक्तित्व को समझने और यह तय करने में मददगार रहा था कि वह खुद को किस रूप में देखना चाहती हैं. तब वह डर का सामना करने और स्टंट करने के उद्देश्य से कार्यक्रम में गई थीं, लेकिन वहां से लौटने के बाद उन्हें अपने बारे में एक अलग समझ मिली थी.

कई वर्षों बाद दोबारा इस मंच पर लौटना उनके लिए भावनात्मक रूप से भी महत्वपूर्ण था. इस वापसी में कहीं न कहीं वह अपने पुराने दौर से दोबारा जुड़ना चाहती थीं. उस समय की युवा अविका और आज की अनुभवी अभिनेत्री के बीच जो दूरी बनी, उसे वह इस अनुभव के जरिए समझना चाहती थीं. शायद इसी वजह से इस बार शो से जल्दी बाहर होना उनके लिए सामान्य एलिमिनेशन से कहीं अधिक मायने रखता है.

पहली बार शो ने उन्हें यह समझने में मदद की थी कि वह कौन हैं और आगे क्या बनना चाहती हैं. दूसरी बार अनुभव बिल्कुल अलग रहा. इस बार उन्हें यह सीख मिली कि हर परिस्थिति का परिणाम उनके नियंत्रण में नहीं होता. मेहनत, तैयारी और इच्छाशक्ति के बावजूद जीवन में कुछ ऐसे क्षण आते हैं जहां परिणाम व्यक्ति की इच्छा के अनुसार नहीं होता. ऐसे समय में लगातार यह सोचते रहना कि अंत को बदला जा सकता था, व्यक्ति को उसी जगह रोक सकता है.

अविका ने इसी बात को स्वीकार करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि उन्हें उस परिणाम को बार-बार अपने मन में दोहराकर बदलने की जरूरत नहीं है. वह यह मान सकती हैं कि उनके पास शायद और बेहतर करने की गुंजाइश थी और इसके साथ यह भी स्वीकार कर सकती हैं कि उन्होंने जो किया, वह भी उनके उस समय के प्रयास का हिस्सा था. इस स्वीकार्यता को उन्होंने आगे बढ़ने का जरिया माना है.

उनकी बात का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि किसी प्रतियोगिता में हार के बाद केवल परिणाम को देखना व्यक्ति के पूरे अनुभव को छोटा कर देता है. खतरों के खिलाड़ी जैसे कार्यक्रम में प्रतिभागी को शारीरिक चुनौती के साथ मानसिक दबाव का भी सामना करना पड़ता है. स्टंट शुरू होने के पहले का डर, उसे पूरा करने के दौरान समय का दबाव और गलती की स्थिति में तुरंत निर्णय लेना—ये सभी चीजें उस अनुभव का हिस्सा होती हैं. दर्शक को स्क्रीन पर केवल कुछ मिनट का प्रदर्शन दिखाई देता है, जबकि प्रतिभागी उस पूरे दबाव को वास्तविक रूप में महसूस करता है.

अविका के एलिमिनेशन राउंड में भी चुनौती का मुकाबला सीधे समय और प्रदर्शन से था. उन्हें ओरी के खिलाफ स्टंट करना पड़ा. ओरी ने यह चुनौती करीब 10 मिनट में पूरी की, जबकि अविका को इसे पूरा करने में 13 मिनट से अधिक समय लगा. इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका शो का सफर समाप्त हो गया. प्रतियोगिता में रूबीना दिलैक, रित्विक धनजानी, फरहान भट्ट, करण वाही सहित कई चर्चित चेहरे भी हिस्सा ले रहे हैं और कार्यक्रम की मेजबानी फिल्मकार रोहित शेट्टी कर रहे हैं.

लेकिन अविका की प्रतिक्रिया को केवल एक प्रतियोगी की हार के बाद की प्रतिक्रिया के रूप में नहीं देखा जा सकता. उनके संदेश में प्रतियोगिता से आगे बढ़कर अपने फैसलों और असफलताओं को देखने का नजरिया दिखाई देता है. उन्होंने यह स्वीकार किया कि मन अक्सर ऐसी दूसरी कहानी बना लेता है जिसमें हम वही काम बेहतर तरीके से करते हैं जो वास्तविकता में नहीं कर पाए. यह कल्पना कुछ समय के लिए राहत दे सकती है, लेकिन अगर व्यक्ति उसी काल्पनिक परिणाम में अटका रहे तो आगे बढ़ना मुश्किल हो जाता है.

अविका अब इसी मानसिक स्थिति से बाहर निकलने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने अपने अनुभव के लिए उन लोगों, अवसरों और रिश्तों के प्रति आभार जताया है जिन्होंने उन्हें यहां तक पहुंचाया. उनके संदेश में निराशा के साथ आगे बढ़ने की इच्छा भी दिखाई देती है. उनका मानना है कि इस अनुभव से पैदा हुआ खालीपन हमेशा वैसा नहीं रहेगा. समय के साथ वह इसे एक ऐसी याद में बदल सकती हैं, जिसे दर्द के बजाय कृतज्ञता के साथ देखा जा सके.

उनके लिए खतरों के खिलाड़ी 15 का सफर इसलिए भी अलग रहेगा क्योंकि यह दूसरी बार था जब उन्होंने खुद को इस तरह की चुनौती के सामने रखा. पहली बार उन्होंने अपने भीतर की पहचान तलाशने की कोशिश की थी, जबकि इस बार उन्हें यह सीख मिली कि हर कहानी का अंत अपनी इच्छा के मुताबिक लिखना संभव नहीं होता. कुछ परिणामों को स्वीकार करना पड़ता है और फिर उसी अनुभव को साथ लेकर आगे बढ़ना पड़ता है.

एलिमिनेशन के बाद अविका के सामने अब कोई नया स्टंट नहीं है, लेकिन असली चुनौती शायद यही है कि वह उस अनुभव को किस तरह अपने जीवन का हिस्सा बनाती हैं. बाहर बैठकर खुद को बेहतर साबित करने की कल्पना करना आसान है, लेकिन वास्तविक जीवन में अपने फैसलों को स्वीकार कर आगे बढ़ना कहीं बड़ी परीक्षा है. अविका ने फिलहाल इसी परीक्षा को चुन लिया है. उनका खतरों के खिलाड़ी का सफर समाप्त हो गया, लेकिन उससे मिली सीख शायद कैमरे और स्टंट से कहीं आगे तक उनके साथ रहने वाली है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-