जबलपुर. जिले में इलाज के लिए अस्पताल तलाश रहे मरीजों और उनके स्वजन के लिए अब खाली बेड की जानकारी हासिल करना आसान होगा. स्वास्थ्य विभाग ने जिले के शासकीय और निजी अस्पतालों में उपलब्ध बेड की स्थिति को सार्वजनिक करने की व्यवस्था शुरू करने का निर्णय लिया है. अस्पतालों से प्रतिदिन मिलने वाली जानकारी को फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे इंटरनेट आधारित मंचों पर साझा किया जाएगा. इससे मरीज के स्वजनों को अस्पताल-दर-अस्पताल भटकने के बजाय पहले ही यह पता चल सकेगा कि किस अस्पताल में उपचार के लिए बेड उपलब्ध है.
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी ने 30 अगस्त को जबलपुर जिले के सभी शासकीय और निजी अस्पतालों को निर्देश जारी किए हैं. अस्पतालों को अपने यहां उपलब्ध सामान्य बेड के साथ आईसीयू, आईसीसीयू और वेंटीलेटर बेड की स्थिति का दैनिक विवरण मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय को ईमेल के माध्यम से उपलब्ध कराना होगा. विभाग इसी जानकारी को संकलित कर आम लोगों तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है.
बारिश के मौसम में वायरल बुखार, मौसमी संक्रमण और मच्छर जनित बीमारियों के साथ सड़क हादसों के कारण अस्पतालों पर मरीजों का दबाव बढ़ जाता है. गंभीर मरीजों के मामले में समय सबसे महत्वपूर्ण होता है. कई बार स्वजन मरीज को लेकर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकते रहते हैं और इसी दौरान उपचार में देरी हो जाती है. बेड की उपलब्धता की जानकारी पहले से मिलने पर ऐसी स्थिति से बचने में मदद मिल सकती है.
स्वास्थ्य विभाग की प्रस्तावित व्यवस्था में सोशल मीडिया को सूचना के माध्यम के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है. मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय को अस्पतालों से रोज मिलने वाले आंकड़ों को आईईसी ब्यूरो सीएमएचओ जबलपुर और विक्टोरिया अस्पताल के फेसबुक पेज तथा इंस्टाग्राम हैंडल पर सार्वजनिक किया जाएगा. समाचार माध्यमों के जरिए भी इस जानकारी को लोगों तक पहुंचाने की व्यवस्था रहेगी.
इसका सीधा लाभ उन लोगों को मिलने की उम्मीद है, जिन्हें अचानक अस्पताल में भर्ती की आवश्यकता पड़ती है. खासतौर पर आईसीयू, आईसीसीयू या वेंटीलेटर की जरूरत वाले मरीजों के लिए उपलब्धता की जानकारी पहले से होना महत्वपूर्ण है. यदि किसी अस्पताल में आवश्यक सुविधा उपलब्ध नहीं है तो स्वजन समय गंवाए बिना दूसरे अस्पताल का रुख कर सकेंगे.
व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि अस्पतालों को अपनी बेड स्थिति की जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध करानी होगी. इससे स्वास्थ्य विभाग के पास जिले के अस्पतालों में उपलब्ध उपचार क्षमता की वास्तविक स्थिति का आंकड़ा भी मौजूद रहेगा. किसी समय कितने सामान्य बेड, कितने आईसीयू बेड या कितने वेंटीलेटर उपलब्ध हैं, इसकी जानकारी प्रशासनिक स्तर पर भी उपयोगी हो सकती है.
बेड की जानकारी सार्वजनिक करने के साथ स्वास्थ्य विभाग ने मरीजों के उपचार और बिलिंग से जुड़ी शिकायतों पर भी निगरानी रखने के संकेत दिए हैं. आयुष्मान भारत योजना के कार्डधारकों को इलाज में परेशानी होने, अस्पताल द्वारा निर्धारित से अधिक राशि वसूलने अथवा उपचार में किसी प्रकार की मनमानी किए जाने की शिकायत मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में की जा सकेगी. शिकायत मिलने पर विभाग मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेगा.
स्वास्थ्य विभाग का यह कदम ऐसे समय में आया है, जब बारिश के कारण अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ने की संभावना बनी रहती है. डिजिटल माध्यम से अस्पतालों की बेड स्थिति सार्वजनिक होने पर लोगों को एक ही स्थान से विभिन्न अस्पतालों की उपलब्धता की जानकारी मिल सकेगी. हालांकि इस व्यवस्था की उपयोगिता इस बात पर निर्भर करेगी कि अस्पतालों की ओर से उपलब्ध बेड का दैनिक विवरण कितनी नियमितता और सटीकता से भेजा जाता है.
फेसबुक और इंस्टाग्राम के माध्यम से अस्पतालों में उपलब्ध बेड की जानकारी सार्वजनिक करने की पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं में सूचना की पारदर्शिता बढ़ाना है. मरीज और उनके स्वजन यदि घर से निकलने से पहले यह जान सकें कि आवश्यक सुविधा कहां उपलब्ध है, तो न केवल उनका समय बचेगा बल्कि गंभीर मामलों में उपचार तक पहुंचने की प्रक्रिया भी तेज हो सकती है. स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को दैनिक जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश देकर इस व्यवस्था को प्रभावी बनाने की जिम्मेदारी संबंधित संस्थानों पर तय की है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

