इसरो ने रचा इतिहास, देश का पहला जियो-इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च, 36 हजार किमी ऊपर से रखेगा नजर

इसरो ने रचा इतिहास, देश का पहला जियो-इमेजिंग सैटेलाइट लॉन्च, 36 हजार किमी ऊपर से रखेगा नजर

प्रेषित समय :11:41:44 AM / Fri, Sep 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

श्रीहरिकोटा. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने आधी रात को अंतरिक्ष की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है. आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से देश का पहला जियो-इमेजिंग सैटेलाइट ईओएस-05 सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया गया. स्पेसपोर्ट से उड़ान भरने के ठीक 18 मिनट बाद इस एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन स्पेसक्राफ्ट को तय सब-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित कर दिया गया. यह कामयाबी भारत को रणनीतिक और निगरानी के क्षेत्र में एक नई महाशक्ति के रूप में स्थापित करती है.

इसरो चीफ का बड़ा ऐलान: देश को मिलेगा महत्वपूर्ण रणनीतिक डेटा

मिशन की ऐतिहासिक सफलता पर इसरो प्रमुख वी. नारायणन ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि जीएसएलवी-एफ17 रॉकेट ने 'एडवांस्ड अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट 05Ó को पूरी सटीकता के साथ उसकी निर्धारित कक्षा में पहुंचा दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि कक्षा में सक्रिय होते ही यह जियो-ऑर्बिट से काम करने वाला भारत का पहला समर्पित इमेजिंग सैटेलाइट बन जाएगा. यह अंतरिक्ष से देश की सीमाओं की सुरक्षा, कृषि आकलन और किसी भी प्राकृतिक आपदा के वक्त रियल-टाइम तस्वीरें और बेहद संवेदनशील डेटा उपलब्ध कराने में मील का पत्थर साबित होगा.

36,000 किलोमीटर की ऊंचाई से पृथ्वी की गति से मिलाएगा तालमेल

आम तौर पर पृथ्वी की निगरानी करने वाले ज्यादातर अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट लो अर्थ ऑर्बिट (एलईओ) में तैनात होते हैं, लेकिन ईओएस-05 को पृथ्वी से करीब 36,000 किलोमीटर ऊपर जियोसिंक्रोनस ऑर्बिट में तैनात किया गया है. इतनी ऊंचाई पर यह उपग्रह पृथ्वी के घूमने की गति के साथ पूरी तरह तालमेल बिठाएगा, जिससे यह भारत के ऊपर एक जगह स्थिर रहकर लगातार निगरानी करने में सक्षम होगा. 51.7 मीटर ऊंचे और 420.5 टन वजनी 3-स्टेज वाले इस रॉकेट की यह 19वीं सफल उड़ान थी, जिसका तीसरा स्टेज क्रायोजेनिक इंजन से लैस है.

बारिश के बीच आधी रात गूंजा स्पेसपोर्ट, 27 घंटे बाद भरी उड़ान

बुधवार रात 11:30 बजे शुरू हुए 27 घंटे के निर्बाध काउंटडाउन के बाद 2,367 किलोग्राम पेलोड वाले रॉकेट ने दूसरे लॉन्च पैड से ठीक सुबह 2:55 बजे बादलों को चीरते हुए आसमान की ओर रुख किया. बेमौसम बारिश और आधी रात के समय के बावजूद लॉन्च व्यू गैलरी में भारी संख्या में पहुंचे लोगों का उत्साह चरम पर था. इस मिशन की कामयाबी के लिए इसरो चीफ ने हाल ही में तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचकर विशेष पूजा-अर्चना भी की थी.

पुरानी असफलताओं को पीछे छोड़ हासिल की ऐतिहासिक जीत

यह सफलता इसरो के लिए बेहद भावुक और राहत भरी है, क्योंकि यह मिशन वर्ष 2021 के असफल GSLV-F10/EOS-03 की जगह ले रहा है, जो क्रायोजेनिक अपर स्टेज में तकनीकी खराबी के चलते बीच रास्ते में ही रुक गया था. इसके अलावा पिछले 8 महीनों से ISRO किसी बड़े लॉन्च की तलाश में था, क्योंकि इस साल जनवरी में PSLV-C62 मिशन में आई विसंगति के कारण उपग्रह अपनी कक्षा तक नहीं पहुंच सके थे. आज की इस अचूक और ऐतिहासिक लॉन्चिंग ने अंतरिक्ष में भारत के तकनीकी दबदबे को एक बार फिर निर्विवाद रूप से साबित कर दिया है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-