जबलपुर. रानीताल स्थित बीएसएनएल टेलीग्राफ फैक्ट्री परिसर में दो मजदूरों की मौत ने बंद पड़े सरकारी परिसर में चल रहे काम की निगरानी और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. बारिश के बीच जर्जर ढांचे के नीचे काम कर रहे मजदूरों पर दीवार गिरने से पश्चिम बंगाल निवासी अब्दुल वशीर और स्थानीय मजदूर मोहम्मद अकबर की जान चली गई. हादसे के बाद प्रशासन ने परिसर सील कर जांच शुरू कर दी है.
घटना ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि जब परिसर का ढांचा पहले से जर्जर था तो वहां मजदूरों को काम करने की अनुमति किस स्तर पर मिली और उनकी सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम किए गए थे. बताया गया कि हादसे के समय करीब एक दर्जन मजदूर परिसर में काम कर रहे थे. अचानक दीवार भरभराकर गिरने से मजदूरों को संभलने तक का मौका नहीं मिला.
मामले की जांच में ठेका व्यवस्था भी जांच के दायरे में आ गई है. फैक्ट्री परिसर में शेड हटाने का ठेका जयपुर की एएस कंपनी को दिया गया था. आरोप है कि निर्धारित कार्य से आगे बढ़कर मजदूरों से पुरानी दीवारें और अन्य ढांचे हटाने का काम कराया जा रहा था. यदि जांच में यह तथ्य पुष्ट होता है तो ठेका शर्तों और कार्य की निगरानी में गंभीर लापरवाही सामने आ सकती है.
हादसे के बाद श्रमिकों के पंजीयन और भविष्य निधि से जुड़े पहलू भी सामने आए हैं. इससे मृतकों के परिवारों की आर्थिक सुरक्षा पर सवाल उठे हैं. एक मजदूर अपने परिवार का मुख्य सहारा था, ऐसे में उसकी मौत ने परिजनों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा कर दिया है.
अब जांच का केंद्र केवल हादसे का कारण नहीं, बल्कि यह भी है कि जर्जर परिसर में श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी और नियमों की अनदेखी हुई तो उसके लिए जवाबदेह कौन होगा.
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