जबलपुर. ग्राम रोजगार सहायकों के तबादलों को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने अब सीधे शासन की जवाबदेही तय करने की दिशा में कदम बढ़ाया है. न्यायालय ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से विस्तृत शपथ-पत्र दाखिल करने के निर्देश दिए हैं. शासन को स्पष्ट करना होगा कि ग्राम रोजगार सहायकों के तबादले किस नीति, किस प्रक्रिया और किस वैधानिक अधिकार के तहत किए जा रहे हैं. यानी अब मामला केवल तबादला आदेश सही है या गलत, इस सवाल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकार को अपनी पूरी स्थानांतरण व्यवस्था का आधार न्यायालय के सामने रखना होगा.
पन्ना निवासी अश्विनी कुमार गुप्ता की याचिका पर सुनवाई के दौरान यह विवाद सामने आया. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता आर्यन उरमलिया ने पक्ष रखते हुए ग्राम रोजगार सहायक के पद को गैर-स्थानांतरणीय बताया. दूसरी ओर शासन की नीति में इस पद को स्थानांतरणीय बताया गया है. दोनों पक्षों के इन अलग-अलग दावों के बीच अब न्यायालय ने शासन से यह स्पष्ट करने को कहा है कि आखिर वह किस नियम और व्यवस्था के आधार पर ग्राम रोजगार सहायकों के तबादले कर रहा है.
हाई कोर्ट के निर्देश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू प्रमुख सचिव से विस्तृत शपथ-पत्र मांगा जाना है. सामान्य जवाब के बजाय विभाग के शीर्ष स्तर के अधिकारी को न्यायालय के समक्ष अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी. शपथ-पत्र में तबादलों की नीति, प्रक्रिया, अधिकार और उसके क्रियान्वयन का विवरण देना होगा. इससे यह भी स्पष्ट होगा कि स्थानांतरण के फैसले किसी निर्धारित व्यवस्था के तहत लिए जा रहे हैं या उनके पीछे अलग-अलग स्तर पर अलग मानदंड अपनाए जा रहे हैं.
मामले में पहले पारित न्यायिक आदेशों का भी संदर्भ सामने आया. याचिकाकर्ता की ओर से 13 जुलाई 2026 को पारित एक आदेश का उल्लेख किया गया, जिसमें समान परिस्थितियों में तबादला आदेश के प्रभाव पर रोक लगाई गई थी. इसके बावजूद ग्राम रोजगार सहायकों के तबादलों को लेकर विवाद बना हुआ है. अब हाई कोर्ट शासन से यह जानना चाहता है कि वर्तमान में लागू नीति और पूर्व न्यायिक आदेशों के बीच स्थिति क्या है तथा तबादला आदेश जारी करते समय इन पहलुओं का किस तरह पालन किया गया.
न्यायालय ने विवादित तबादला आदेशों के प्रभाव और क्रियान्वयन पर रोक जारी रखी है. इसका मतलब है कि अगली सुनवाई तक संबंधित आदेशों को लागू नहीं किया जा सकेगा. अब शासन की ओर से दाखिल किया जाने वाला शपथ-पत्र इस बात का आधार बनेगा कि न्यायालय इस विवाद को आगे किस दिशा में ले जाता है.
दरअसल, स्थानांतरण किसी कर्मचारी की सेवा से जुड़ा प्रशासनिक निर्णय जरूर है, लेकिन जब किसी पद की स्थानांतरणीय प्रकृति ही विवाद का विषय बन जाए तो शासन की नीति की स्पष्टता भी महत्वपूर्ण हो जाती है. यदि ग्राम रोजगार सहायक का पद स्थानांतरणीय है तो शासन को यह बताना होगा कि इसकी स्पष्ट व्यवस्था कहां है और किस अधिकारी को स्थानांतरण का अधिकार दिया गया है. यदि पद गैर-स्थानांतरणीय है तो फिर किए गए तबादलों का आधार भी सवालों के घेरे में आएगा.
याचिका का यह पहलू भी महत्वपूर्ण है कि ग्राम रोजगार सहायक ग्रामीण स्तर पर पंचायत एवं रोजगार योजनाओं से जुड़े कार्यों में भूमिका निभाते हैं. इसलिए उनके तबादलों की नीति का असर केवल संबंधित कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहता. बार-बार या नियमों से अलग स्थानांतरण की स्थिति में ग्रामीण स्तर पर योजनाओं के संचालन और प्रशासनिक निरंतरता पर भी प्रभाव पड़ सकता है. इसी कारण स्थानांतरण व्यवस्था में स्पष्ट नियम और समान प्रक्रिया का होना महत्वपूर्ण है.
हाई कोर्ट ने शासन से जिस तरह विस्तृत जवाब मांगा है, उससे यह संकेत मिलता है कि न्यायालय केवल एक आदेश की वैधता देखने के बजाय पूरी प्रक्रिया को समझना चाहता है. प्रमुख सचिव को यह स्पष्ट करना होगा कि तबादलों के लिए शासन ने कौन-से मापदंड तय किए हैं, आदेश किस स्तर पर जारी होते हैं और संबंधित अधिकारियों के पास इसके लिए क्या अधिकार हैं. यदि कोई निर्धारित प्रक्रिया है तो उसका पालन किस तरह किया गया, इसका विवरण भी न्यायालय के सामने रखना होगा.
इससे शासन की प्रशासनिक जवाबदेही का प्रश्न सीधे न्यायिक परीक्षण के दायरे में आ गया है. किसी कर्मचारी के तबादले का आदेश जारी करना प्रशासन का अधिकार हो सकता है, लेकिन उस अधिकार का इस्तेमाल किस नियम और प्रक्रिया के तहत किया गया, यह न्यायालय के समक्ष स्पष्ट किया जाना आवश्यक है. खासकर तब, जब उसी पद की प्रकृति को लेकर याचिकाकर्ता और शासन के दावे एक-दूसरे से अलग हों.
अब अगली सुनवाई 23 अक्टूबर 2026 को होगी. तब प्रमुख सचिव का शपथ-पत्र मामले की दिशा तय करने में अहम होगा. न्यायालय के सामने यह स्पष्ट हो सकेगा कि ग्राम रोजगार सहायकों के तबादलों के पीछे शासन की नीति क्या है और उसे लागू करने की प्रक्रिया कितनी स्पष्ट और एकरूप है.
फिलहाल हाई कोर्ट ने विवादित तबादला आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक जारी रखते हुए शासन को अपनी पूरी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है. ऐसे में अगली सुनवाई का केंद्र कर्मचारियों के तबादले से अधिक यह रहेगा कि सरकार अपने स्थानांतरण संबंधी निर्णयों का नियम, अधिकार और प्रक्रिया के आधार पर कितना स्पष्ट जवाब देती है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

