सहेली के भरोसे में गंवाए लाखों के जेवर और नकदी, धमकियों से डरी महिला ने लगाई पुलिस से न्याय की गुहार

सहेली के भरोसे में गंवाए लाखों के जेवर और नकदी, धमकियों से डरी महिला ने लगाई पुलिस से न्याय की गुहार

प्रेषित समय :18:16:04 PM / Fri, Sep 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. भरोसा कभी-कभी रिश्तों से भी ज्यादा मजबूत होता है, लेकिन यही भरोसा धोखे में बदल जाए तो उसका असर केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार के भीतर भी तनाव और अविश्वास की स्थिति पैदा हो जाती है. संजीवनी नगर क्षेत्र में रहने वाली 32 वर्षीय शक्ति जैन के साथ कथित तौर पर ऐसा ही मामला सामने आया है. महिला ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर एक परिचित महिला पर विश्वास में लेकर उसके सोने-चांदी के जेवरात और नकदी हासिल करने तथा बाद में सामान वापस मांगने पर धमकाने का आरोप लगाया है. शिकायतकर्ता ने पुलिस से पूरे मामले की जांच कराने के साथ अपनी और परिवार की सुरक्षा की मांग की है.

शक्ति जैन, पति विशाल जैन, ने अपने लिखित आवेदन में बताया कि वर्ष 2024 में उसका संपर्क अवनी विहार, शास्त्री नगर निवासी 40 वर्षीय दीपशिखा गुप्ता, पति जितेश गुप्ता, से दीक्षा श्रीवास्तव के माध्यम से हुआ था. समय के साथ दोनों के बीच मेलजोल बढ़ा और शिकायतकर्ता के अनुसार दीपशिखा गुप्ता ने उसके परिवार के साथ इस तरह का अपनापन बना लिया कि वह उसे पारिवारिक सदस्य की तरह मानने लगी. इसी विश्वास के चलते बाद में जब दीपशिखा ने कथित रूप से अपने परिवार पर गंभीर संकट आने की बात बताई तो शक्ति जैन ने उसकी बात पर भरोसा कर लिया.

शिकायत के मुताबिक दिसंबर 2025 के दौरान दीपशिखा ने शक्ति को बताया कि उसके पति के खिलाफ आईपीएल से संबंधित कोई कानूनी मामला दर्ज हो गया है और परिस्थितियां इतनी गंभीर हैं कि उसे जेल जाना पड़ सकता है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे तीन महीने में सामान वापस करने का भरोसा दिलाते हुए मदद के लिए अपने सोने-चांदी के आभूषण और पांच हजार रुपये नकद देने के लिए तैयार किया गया. संकट में फंसी परिचित की मदद करने के उद्देश्य से उसने अपने पास मौजूद आभूषण और नकदी सौंप दिए.

महिला ने पुलिस को दिए आवेदन में जिन वस्तुओं का उल्लेख किया है, उनमें दो रानी हार, एक छोटा हार, दो जोड़ी सोने के झुमके, दो सोने की अंगूठियां, एक जोधा नथ, दो सोने के सिक्के, तीन मंगलसूत्र पेंडल, दो सेट चांदी की पायल, एक टुकड़ी फाइन तथा उसके छोटे बच्चे के गले का सोने का हाय चंद्रमा शामिल बताया गया है. शिकायतकर्ता का कहना है कि इनमें से कई आभूषण उसके वैवाहिक उपहार और स्त्रीधन का हिस्सा थे.

आवेदन में आगे आरोप लगाया गया है कि दीपशिखा ने अपने परिवार के कई दिनों से भूखे-प्यासे होने की बात कहकर भी मदद मांगी. शक्ति के मुताबिक वह परिस्थितियों से भावुक हो गई और परिवार के अन्य सदस्यों को जानकारी दिए बिना अपने पास उपलब्ध आभूषण दे बैठी. शिकायतकर्ता का कहना है कि उस समय उसका उद्देश्य किसी परिचित परिवार की परेशानी में मदद करना था और उसे इस बात का अंदाजा नहीं था कि बाद में अपना सामान वापस पाने के लिए उसे पुलिस अधिकारियों तक पहुंचना पड़ेगा.

शिकायतकर्ता के अनुसार तय अवधि समाप्त होने के बाद जब उसने अपने जेवरात और पांच हजार रुपये वापस मांगे तो कथित तौर पर उसे लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा. कभी परिवार की परेशानी तो कभी बेटी की बीमारी का हवाला देकर समय मांगा जाता रहा. शक्ति का आरोप है कि कई महीनों तक इसी तरह उसे भरोसा दिलाया जाता रहा कि उसका सामान वापस कर दिया जाएगा, लेकिन कथित रूप से वास्तविक जेवरात उसे नहीं लौटाए गए.

मामले में नया मोड़ उस समय आया जब शिकायतकर्ता के बच्चे का जन्मदिन 27 जुलाई 2026 को था. महिला के अनुसार उस अवसर पर उसके शरीर पर सामान्य तौर पर पहने जाने वाले आभूषण नहीं दिखाई दिए, जिसके बाद परिवार में सवाल उठने लगे. शिकायत में बताया गया है कि बाद में अलमारी का ताला टूटने पर परिवार को जेवरात के संबंध में वास्तविक स्थिति की जानकारी हुई. इसके बाद शक्ति ने अपने स्तर पर दीपशिखा से सामान वापस करने के लिए संपर्क किया.

शिकायत में 25 जुलाई 2026 को हुई कथित फोन बातचीत का भी उल्लेख किया गया है. शक्ति का दावा है कि बातचीत के दौरान दीपशिखा ने उसके कुछ आभूषण अनुभा झारिया और स्वाति के पास गिरवी रखे होने की बात स्वीकार की थी. शिकायतकर्ता ने पुलिस को यह जानकारी भी उपलब्ध कराई है और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच किए जाने की मांग की है. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और संबंधित पक्षों का पुलिस जांच में बयान सामने आना बाकी है.

शक्ति जैन का आरोप है कि जब उसने अपने जेवरात वापस करने के लिए दबाव बनाया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं. शिकायत के मुताबिक उसे आत्महत्या करने, परिवार के सदस्यों को झूठे आपराधिक मामलों में फंसाने और परिवार को जान से मारने जैसी कथित धमकियां दी गईं. इन आरोपों ने मामले को केवल आर्थिक लेन-देन के विवाद से आगे बढ़ाकर सुरक्षा और आपराधिक कार्रवाई से जुड़े सवालों तक पहुंचा दिया है.

पीड़िता के मुताबिक उसने सबसे पहले 1 अगस्त 2026 को संबंधित थाने में शिकायत करने का प्रयास किया था. उसका आरोप है कि क्षेत्राधिकार का हवाला देकर उसे करीब 20 दिनों तक अलग-अलग स्तर पर भटकना पड़ा. इसके बाद 25 अगस्त को फिर शिकायत भेजे जाने का उल्लेख आवेदन में किया गया है. जब स्थानीय स्तर पर उसे अपेक्षित कार्रवाई नहीं मिली तो उसने 3 सितंबर 2026 को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के समक्ष पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी दी और अपनी तथा परिवार की सुरक्षा की मांग की.

अब पुलिस के सामने शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच करना अहम होगा. जांच में यह देखा जाना है कि वास्तव में शिकायतकर्ता ने कौन-कौन से आभूषण और कितनी नकदी किस परिस्थिति में सौंपी थी, दोनों पक्षों के बीच हुए संवाद में क्या बातचीत हुई, जेवरात किसी अन्य व्यक्ति के पास गिरवी रखे गए या नहीं और यदि ऐसा हुआ तो उसमें किन लोगों की भूमिका रही. कथित धमकियों के संबंध में भी पुलिस को उपलब्ध साक्ष्यों और बातचीत की जांच करनी होगी.

मामले का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू स्त्रीधन से जुड़ा है. शिकायतकर्ता ने जिन वस्तुओं को सौंपे जाने का दावा किया है, उनमें वैवाहिक उपहार और महिला के व्यक्तिगत आभूषण भी शामिल बताए गए हैं. ऐसे में जांच के दौरान उनके स्वामित्व और उपलब्ध दस्तावेजों या अन्य प्रमाणों की भी पड़ताल महत्वपूर्ण होगी.

फिलहाल महिला ने पुलिस से मामले को गंभीरता से लेते हुए शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच, कथित तौर पर दिए गए जेवरात और नकदी की बरामदगी तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है. दूसरी ओर, आरोपित पक्ष का पक्ष सामने आने और पुलिस जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है. मामला अब पुलिस जांच के दायरे में है और इसी जांच से यह तय होगा कि विश्वास के नाम पर हुए इस कथित लेन-देन के पीछे वास्तव में क्या कहानी थी और जिम्मेदारी किसकी बनती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-