टीचर्स डे पर पीएम मोदी ने पूछा- पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को कैसे अच्छा बनाएं, शिक्षक ने बताया तरीका

टीचर्स डे पर पीएम मोदी ने पूछा- पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को कैसे अच्छा बनाएं, शिक्षक ने बताया तरीका

प्रेषित समय :15:39:03 PM / Sat, Sep 5th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली.शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार (5 सितंबर) को कुछ खास टीचर्स से मुलाकात की. इस दौरान, पीएम मोदी ने उनसे कई मसलों पर बात की और सुझाव भी मांगे. दरअसल, शुक्रवार को प्रधानमंत्री आवास पर एक खास कार्यक्रम आयोजित किया गया था, जिसमें नेशनल अवॉर्ड हासिल करने वाले शिक्षकों को आमंत्रित किया गया था. शिक्षकों से मुलाकात और बातचीत का वीडियो पीएम मोदी ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर भी शेयर किया.

नेशनल अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों में से एक टीचर से बातचीत करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, मैं काशी का सांसद हूं और मैंने वहां ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता अभियान शुरू किया था. मुझे यह देखकर खुशी होती है कि अब महिलाएं सामने से आकर जांच करवा रही हैं. पहले ऐसी स्थिति नहीं थी. एक और अच्छा अनुभव एक ही दिन में सबसे ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना रहा.

पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स पर पीएम ने क्या की बात

पीएम मोदी ने शिक्षकों को अपनी पब्लिक स्पीकिंग स्किल्स को अच्छा बनाने के सुझाव मांगे. उन्होंने पूछा कि अगर मैं आपके यहां विद्यार्थी होता और एक बेहतर पब्लिक स्पीकर बनाना चाहता है तो आप मुझे क्या सुझाव देतीं? मुझे क्या करना चाहिए. इस पर टीचर ने कहा कि सबसे पहले आपमें आत्मविश्वास होना चाहिए. आत्मविश्वास बहुत ज्यादा एक्सपीरियंस से ही आता है. आपका व्यक्तित्व देखकर मैं खुद भी थोड़ी घबरा गई थी.

स्क्रीन टाइम पर पीएम मोदी ने जताई चिंता

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि स्क्रीन टाइम अब एक प्रकार की लत बन गया है. मेरे मन में एक विचार आता है कि या तो वो बच्चा खेलों में गहरी रूचि लेने लगे मेरा मतलब वीडियो गेम से नहीं, बल्कि मैदान पर असल खेलों से हैं. इससे हो सकता है कि वह धीरे-धीरे इस लत से बाहर निकल आए. स्क्रीन टाइम कम करने के लिए हमें बच्चों को ज्यादा से ज्यादा रचनात्मक कामों में लगवाना, हमें ऐसे प्रोग्राम बनाने की आदत डालनी चाहिए, जो स्क्रीन टाइम को कम करने का बढ़ावा दें.

मोदी ने कहा कि मैं आप सब से बात कर रहा हूं, लेकिन मैं पूरे शिक्षा जगत से ये कहना चाहता हूं कि हमें पहले से ज्यादा किताबों और सिलेबस से बाहर निकलकर बच्चों की जिंदगी में घुसना होगा. बचपन मरने नहीं देना चाहिए. बचपन बनाए रखने का सबसे बड़ा काम शिक्षक कर सकता है. शिक्षक का काम है कि उसके अंदर बचपन बना रहे.'
 

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