एमपी हाई कोर्ट की वेबसाइट पर गंभीर सवाल, न्यायिक समय बर्बाद होने पर सख्त नाराजगी, स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट के आदेश

एमपी हाई कोर्ट की वेबसाइट पर गंभीर सवाल, न्यायिक समय बर्बाद होने पर सख्त नाराजगी, स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट के आदेश

प्रेषित समय :19:04:59 PM / Wed, Sep 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर स्थित प्रधान पीठ की वेबसाइट में लगातार सामने आ रही तकनीकी खामियों पर न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अविनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कड़ी नाराजगी जताई है. आपराधिक अपील क्रमांक 7908/2023 आदित्य सोनी विरुद्ध मध्य प्रदेश शासन की सुनवाई के दौरान वेबसाइट के ई-हियरिंग सिस्टम के काम नहीं करने और तकनीकी दिक्कतों के कारण न्यायालय का समय प्रभावित होने का मामला सामने आया.

खंडपीठ ने सूचना प्रौद्योगिकी स्टाफ की कार्यप्रणाली पर गंभीर टिप्पणी करते हुए संबंधित आईटी कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश से कदम उठाने को कहा है. साथ ही हाई कोर्ट की पूरी आईटी प्रणाली का स्वतंत्र तीसरे पक्ष से तकनीकी ऑडिट कराने का निर्देश दिया है.यह मामला सीआरए क्रमांक 7908/2023 से संबंधित है. आदेश के अनुसार 8 सितंबर 2026 को मामले की सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता आदित्य सोनी की ओर से अधिवक्ता आलोक बागरेचा के साथ अधिवक्ता अभिषेक सोनी उपस्थित हुए. राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता वीर विक्रांत सिंह तथा आपत्तिकर्ता की ओर से अधिवक्ता अशोक कुमार चौरसिया न्यायालय में मौजूद थे.

सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से दायर आईए क्रमांक 11051/2026 का भी उल्लेख हुआ. यह दंडादेश के निलंबन और जमानत के लिए दायर दूसरी अर्जी थी. अपीलकर्ता के अधिवक्ता ने अर्जी वापस लेने की अनुमति मांगी और इस मामले को अंतिम सुनवाई के समय रखने की स्वतंत्रता चाही. अदालत ने अनुमति प्रदान करते हुए अर्जी को वापस लिए जाने के आधार पर निरस्त कर दिया. मुख्य अपील को उसकी बारी और वरिष्ठता के अनुसार अंतिम सुनवाई के लिए पार्ट-बी की सूची में रखने का निर्देश दिया गया.

ई-हियरिंग सिस्टम काम नहीं करने पर अदालत नाराज

मामले की कार्यवाही के दौरान हाई कोर्ट की वेबसाइट ई-हियरिंग को सपोर्ट नहीं कर रही थी. आदेश में अदालत ने वेबसाइट में कई तकनीकी गड़बड़ियों का उल्लेख किया है. समस्या के समाधान के लिए रजिस्ट्रार आईटी-सीएसए के.एस. कुशवाहा से सहायता मांगी गई और उनके न्यायालय पहुंचने की सूचना दी गई.हालांकि, तकनीकी समस्या के कारण न्यायिक कार्य प्रभावित होने पर खंडपीठ ने इसे गंभीरता से लिया. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि आईटी स्टाफ की अक्षमता के कारण न्यायिक समय बर्बाद हुआ है. इसी के साथ मुख्य न्यायाधीश से संबंधित आईटी स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा गया.

25-26 अगस्त के संदेश के बाद भी नहीं सुधरी वेबसाइट

खंडपीठ ने वेबसाइट की स्थिति को लेकर पूर्व में दिए गए सुधार संबंधी आश्वासन का भी उल्लेख किया. आदेश में कहा गया है कि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश ने सभी न्यायाधीशों के समूह में व्हाट्सऐप संदेश साझा किया था कि वेबसाइट को अपडेट करने में आठ दिन लगेंगे. यह संदेश 25 या 26 अगस्त 2026 का बताया गया है.अदालत ने कहा कि उस संदेश के बाद 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन वेबसाइट की स्थिति अभी भी संतोषजनक नहीं है. इस टिप्पणी से स्पष्ट है कि अदालत ने वेबसाइट की समस्या को अस्थायी तकनीकी बाधा मानने के बजाय उसके लगातार बने रहने पर गंभीर चिंता व्यक्त की.

अधिवक्ताओं ने भी नई वेबसाइट पर जताई चिंता

सुनवाई के दौरान न्यायालय में मौजूद अधिवक्ताओं ने भी नई वेबसाइट की कार्यप्रणाली को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की. आदेश में दर्ज है कि वकीलों ने खुले न्यायालय में कहा कि नई वेबसाइट ठीक से काम नहीं कर रही है और पुरानी वेबसाइट बेहतर थी.इसके बाद खंडपीठ ने वेबसाइट और हाई कोर्ट के आईटी सिस्टम के कामकाज की विस्तृत जांच की जरूरत महसूस की. अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि वेबसाइट के कारण न्यायालय के काम में बाधा क्यों आ रही है, इसकी स्पष्ट जानकारी सामने लाई जाए.

रजिस्ट्रार आईटी-सीएसए से सात दिन में रिपोर्ट

खंडपीठ ने रजिस्ट्रार आईटी-सीएसए के.एस. कुशवाहा से विस्तृत जांच कर यह बताने को कहा है कि हाई कोर्ट के कामकाज में बाधा क्यों उत्पन्न हो रही है. अदालत ने दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं.इसके साथ ही इस संबंध में की गई कार्रवाई की रिपोर्ट सात दिन के भीतर खंडपीठ के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है.वेबसाइट की समस्या की स्वतंत्र तकनीकी जांच के लिए अदालत ने प्रतिष्ठित कंपनियों के विशेषज्ञों की टीम गठित करने का निर्देश दिया है. आदेश में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इंफोसिस और एलएंडटी टेक्नोलॉजी सर्विसेज जैसी कंपनियों के विशेषज्ञों से हाई कोर्ट की आईटी प्रणाली का स्वतंत्र ऑडिट कराने की बात कही गई है.

खंडपीठ ने निर्देश दिया है कि तीसरे पक्ष से कराया जाने वाला यह तकनीकी ऑडिट 30 दिन के भीतर पूरा किया जाए और उसकी रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत की जाए.अदालत ने विशेषज्ञ टीम के दायरे को केवल निजी कंपनियों तक सीमित नहीं रखा है. आदेश में कहा गया है कि ऑडिट करने वाली टीम में भारत सरकार के सी-डॉट के अधिकारियों और मैसकॉम को भी शामिल किया जा सकता है.इसका उद्देश्य हाई कोर्ट की आईटी प्रणाली के कामकाज का स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सक्षम मूल्यांकन कराना है.

अधिकारी के सामने सिस्टम जांचा तो फिर दिखी तकनीकी खामी

अदालत के आदेश में दर्ज है कि बाद में सिस्टम की जांच रजिस्ट्रार आईटी-सीएसए के.एस. कुशवाहा के सामने की गई. इस दौरान भी वेबसाइट में बफरिंग और हैंग होने जैसी कई समस्याएं सामने आईं.इस प्रत्यक्ष परीक्षण ने अदालत की उस चिंता को और गंभीर बना दिया कि वेबसाइट की समस्या केवल किसी एक उपयोगकर्ता या किसी एक समय की तकनीकी परेशानी नहीं है. सिस्टम की जांच के दौरान भी तकनीकी बाधाएं सामने आने पर स्वतंत्र ऑडिट की आवश्यकता और महत्वपूर्ण हो गई.हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद वेबसाइट की तकनीकी व्यवस्था को लेकर दो समय सीमाएं महत्वपूर्ण हो गई हैं. संबंधित आईटी व्यवस्था के संबंध में कार्रवाई और कारणों की रिपोर्ट सात दिन में खंडपीठ के सामने रखी जानी है, जबकि स्वतंत्र तीसरे पक्ष का तकनीकी ऑडिट 30 दिन में पूरा कर रिपोर्ट प्रस्तुत करनी है.आदेश पर हस्ताक्षर 8 सितंबर 2026 को दर्ज हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-