जबलपुर में जिला पंचायत की शिक्षा समिति बैठक में जमकर हुआ हंगामा, स्कूलों का ब्यौरा देख भड़के जनप्रतिनिधि

जबलपुर में जिला पंचायत की शिक्षा समिति बैठक में जमकर हुआ हंगामा, स्कूलों का ब्यौरा देख भड़के जनप्रतिनिधि

प्रेषित समय :16:41:50 PM / Wed, Sep 9th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. एमपी के जबलपुर में आज जिला पंचायत की शिक्षा समिति की बैठक में सरकारी दावों की पोल खुलते ही जमकर हंगामा हुआ है। 6 महीने के लंबे अंतराल पर आयोजित इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे सहित विभागीय अमले की मौजूदगी में स्कूलों की बदहाली पर तीखी तकरार हुई।  

शिक्षा विभाग ने जब जिले के लगभग 100 प्रतिशत प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में नल से शुद्ध पेयजल की निर्बाध आपूर्ति होने का आधिकारिक ब्योरा पटल पर रखा, तो जनप्रतिनिधि भड़क उठे। समिति के वरिष्ठ सदस्य विवेक पटेल ने इन मनगढ़ंत सांख्यिकीय आंकड़ों को सिरे से खारिज करते हुए सीधे जमीनी हकीकत से मुंह मोडऩे का गंभीर आरोप जड़ा। अंतत: व्यवस्थागत अनदेखी से व्यथित होकर उन्होंने तत्काल प्रभाव से समिति की सदस्यता छोड़ दी।

समीक्षा के दौरान जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण अंचल के विद्यालयों की वास्तविक और दयनीय स्थिति का विस्तृत कच्चा-चि_ा खोला। उनका स्पष्ट मत था कि मैदानी स्तर पर नन्हें विद्यार्थियों को नियमित रूप से अपने घरों से भारी-भरकम पानी की बोतलें ढोकर स्कूल जाना पड़ रहा है। परिसर में लगे अधिकांश हैंडपंप या तो महीनों से सूखे पड़े हैं अथवा उनसे दूषित जल निकल रहा है। इसके साथ ही कई संस्थाओं की छतें अत्यंत जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंच चुकी हैं, जिससे कभी भी कोई गंभीर अनहोनी घटित होने का भय निरंतर बना रहता है। पर्याप्त शौचालयों का अभाव और शिक्षकों के रिक्त पद भी नौनिहालों के पठन-पाठन को सीधे तौर पर प्रभावित कर रहे हैं।

बैठक से बाहर निकले सदस्य-

इस बैठक का मूल उद्देश्य ग्रामीण शिक्षा प्रणाली को सुदृढ़ बनाना था, किंतु अधिकारियों के टालमटोल भरे रवैये ने हालात बिगाड़ दिए। आक्रोशित विवेक पटेल ने दो-टूक कहा कि निरंतर पत्राचार और व्यक्तिगत आग्रह के उपरांत भी समीक्षा सत्र को 6 माह तक लटकाया गया। जब चर्चा का अवसर मिला, तब वास्तविक सुधार की योजनाएं बनाने के स्थान पर केवल कागजों की बाजीगरी दिखाकर शासन को गुमराह किया जा रहा है। विरोध दर्ज कराते हुए उन्होंने विभागीय उदासीनता के बीच पद पर बने रहने को निरर्थक बताया और अपना त्यागपत्र सौंपकर सदन का पूरी तरह बहिष्कार कर दिया।
 

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-