जीएसटी पंजीकरण में आधार सत्यापन अनिवार्य फर्जी कारोबारियों पर रोक के लिए देशभर में बायोमेट्रिक जांच का निर्देश

जीएसटी पंजीकरण में आधार सत्यापन अनिवार्य फर्जी कारोबारियों पर रोक के लिए देशभर में बायोमेट्रिक जांच का निर्देश

प्रेषित समय :19:27:21 PM / Thu, Sep 10th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

 नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट ने वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी पंजीकरण की प्रक्रिया में आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन को लेकर महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया है. अदालत ने देशभर के जीएसटी अधिकारियों से कहा है कि किसी नए जीएसटी पंजीकरण को तब तक मंजूरी नहीं दी जाए, जब तक आवेदक का बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण पूरा न हो जाए. अदालत का यह निर्देश ऐसे समय आया है, जब दूसरे लोगों के पैन और आधार विवरण का दुरुपयोग कर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराने और उसके माध्यम से बड़े पैमाने पर कर चोरी के मामले सामने आ रहे हैं.

न्यायमूर्ति अनिल झेत्रपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान जीएसटी पंजीकरण व्यवस्था में पहचान सत्यापन की जरूरत पर जोर दिया. अदालत ने केंद्र सरकार की ओर से उपलब्ध कराए गए आंकड़ों का भी उल्लेख किया, जिनसे पता चलता है कि फर्जी जीएसटी पंजीकरण के जरिए सरकारी राजस्व को भारी नुकसान पहुंचाया गया है.

फर्जी पंजीकरण में हजारों करोड़ की कर चोरी
अदालत के समक्ष रखे गए आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2023-24 में चोरी किए गए अथवा फ्रीज किए गए पैन और आधार विवरण का इस्तेमाल कर 2,800 ऐसे जीएसटी पंजीकरण सामने आए, जिन्हें धोखाधड़ी से हासिल किया गया था. इन मामलों में करीब 15,085 करोड़ रुपये की कर चोरी का पता चला.

वर्ष 2024-25 में भी ऐसी गतिविधियां जारी रहीं. इस अवधि में अधिकारियों ने 1,654 फर्जी जीएसटी पंजीकरण का पता लगाया. इन मामलों में करीब 13,109 करोड़ रुपये की कर चोरी सामने आई. आंकड़ों से साफ है कि पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग केवल छोटे स्तर की धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर सरकारी राजस्व पर पड़ रहा है.

सरकार के दावे और जमीनी स्थिति पर अदालत की नजर
सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि जीएसटी पंजीकरण के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को अनिवार्य किया गया है. हालांकि, अदालत ने पाया कि इस व्यवस्था को लागू किए जाने की बात सामने आने के बावजूद इसका पूर्ण क्रियान्वयन अभी तक सुनिश्चित नहीं हो पाया है.

अदालत ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बाद भी संसद में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री द्वारा दिए गए बयान को पूरी तरह लागू नहीं किया गया प्रतीत होता है. अदालत की चिंता मूल रूप से इस बात को लेकर थी कि यदि पहचान सत्यापन की व्यवस्था उपलब्ध है और उसे अनिवार्य बताया जा चुका है, तो उसके प्रभावी क्रियान्वयन में देरी क्यों हो रही है.

देशभर में लागू होगा बायोमेट्रिक सत्यापन
अदालत ने अब स्पष्ट निर्देश दिया है कि देश में नए जीएसटी पंजीकरण के लिए बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को सुनिश्चित किया जाए. इसके बिना किसी नए पंजीकरण को अनुमति नहीं दी जानी चाहिए.

इस निर्देश का सीधा असर जीएसटी पंजीकरण प्रक्रिया पर पड़ेगा. आवेदक की पहचान केवल दस्तावेजों और ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी के आधार पर जांचने के बजाय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण के माध्यम से भी सत्यापित करनी होगी. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी वास्तविक व्यक्ति की पहचान संबंधी जानकारी का इस्तेमाल कोई दूसरा व्यक्ति फर्जी कारोबारी इकाई खड़ी करने के लिए न कर सके.

व्यावहारिक दिक्कत सामने नहीं रख पाए अधिकारी
सुनवाई के दौरान जीएसटी अधिकारियों की ओर से पेश अधिवक्ता अदालत के सामने ऐसी कोई ठोस व्यावहारिक कठिनाई नहीं बता सके, जिसके कारण देशभर में बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को लागू करना संभव न हो.

इसके बाद अदालत ने व्यवस्था को केवल कागजों तक सीमित रखने के बजाय उसके वास्तविक क्रियान्वयन पर जोर दिया. हालांकि, खंडपीठ ने अधिकारियों को यह छूट दी है कि यदि इस व्यवस्था को लागू करने में कोई वास्तविक व्यावहारिक समस्या सामने आती है तो उसे अदालत के संज्ञान में लाया जा सकता है.

पैन और आधार के दुरुपयोग पर भी निगरानी
अदालत ने केवल बायोमेट्रिक सत्यापन तक निर्देश सीमित नहीं रखा. उसने फर्जी जीएसटी पंजीकरण के लिए पैन और आधार विवरण के दुरुपयोग को रोकने के संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ता तरुण गुलाटी द्वारा सुझाए गए उपायों पर भी विचार करने के लिए अधिकारियों को कहा है.

इसका महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि फर्जी जीएसटी पंजीकरण के मामलों में पहचान संबंधी दस्तावेजों का इस्तेमाल सबसे महत्वपूर्ण चरणों में से एक होता है. यदि किसी व्यक्ति के पैन या आधार विवरण का गलत इस्तेमाल कर उसके नाम पर कारोबारी इकाई पंजीकृत कर दी जाती है, तो उसके बाद फर्जी चालान, इनपुट टैक्स क्रेडिट और कर चोरी जैसी गतिविधियों का रास्ता खुल सकता है.

राजस्व सुरक्षा के साथ वास्तविक कारोबारियों की पहचान भी जरूरी
अदालत के निर्देश का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जीएसटी व्यवस्था में वास्तविक कारोबारी और फर्जी इकाई के बीच अंतर को शुरुआती स्तर पर ही स्पष्ट किया जा सके. जीएसटी पंजीकरण किसी भी कारोबारी के लिए कर व्यवस्था में प्रवेश का महत्वपूर्ण चरण है. यदि इस स्तर पर पहचान की जांच कमजोर रहती है, तो बाद में होने वाली कर चोरी का पता लगाना और उसकी भरपाई करना मुश्किल हो सकता है.

बायोमेट्रिक सत्यापन से पंजीकरण प्रक्रिया में एक अतिरिक्त पहचान सुरक्षा परत जुड़ती है. इससे उन मामलों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है, जिनमें किसी अन्य व्यक्ति के दस्तावेज का इस्तेमाल कर बिना उसकी जानकारी के जीएसटी पंजीकरण हासिल किया जाता है.

हालांकि, नई व्यवस्था लागू होने के साथ यह भी जरूरी होगा कि वास्तविक कारोबारियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया अनावश्यक रूप से जटिल न बने. अदालत ने इसी कारण अधिकारियों को संभावित व्यावहारिक कठिनाइयों को सामने रखने की अनुमति दी है.

22 सितंबर को फिर होगी सुनवाई
दिल्ली हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 सितंबर 2026 की तारीख तय की है. उस समय अदालत यह देख सकती है कि उसके निर्देशों के अनुपालन की स्थिति क्या है और बायोमेट्रिक आधार प्रमाणीकरण को देशभर में किस तरह लागू किया जा रहा है.

फिलहाल अदालत का निर्देश जीएसटी पंजीकरण व्यवस्था में पहचान सत्यापन को लेकर स्पष्ट संदेश देता है. पैन और आधार जैसे महत्वपूर्ण पहचान दस्तावेजों के दुरुपयोग से होने वाली कर चोरी को रोकने के लिए अब पंजीकरण प्रक्रिया में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को प्रभावी रूप से लागू करना अधिकारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-