अनुसूचित जाति आयोग की सिफारिश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने की रद्द, कहा- आयोग नहीं तय कर सकता किसी का अपराध

अनुसूचित जाति आयोग की सिफारिश छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने की रद्द, कहा- आयोग नहीं तय कर सकता किसी का अपराध

प्रेषित समय :15:42:33 PM / Fri, Sep 11th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

बिलासपुर. छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने राज्य अनुसूचित जाति आयोग के अधिकारों और कार्यक्षेत्र को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है. हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि आयोग को शिकायतों की जांच करने और सिफारिश भेजने का अधिकार तो है, लेकिन वह किसी व्यक्ति के खिलाफ अपराध सिद्ध होने का फैसला नहीं दे सकता. कोर्ट ने कहा कि किसी को आपराधिक रूप से दोषी ठहराने का अधिकार केवल आपराधिक न्यायालय (Criminal Court) के पास है.

सहायक प्रोफेसर की याचिका पर आया फैसला
जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कोरबा के शासकीय महाविद्यालय बरपाली में पदस्थ सहायक प्रोफेसर मृगेश कुमार यादव की याचिका पर यह निर्णय सुनाया. मामला परीक्षा के दौरान नकल पकड़ने से जुड़ा है. सहायक प्रोफेसर मृगेश कुमार और एक अन्य शिक्षिका ने परीक्षा के दौरान दीपमाला नाम की छात्रा को कथित तौर पर नकल करते पकड़ा था. इसके बाद छात्रा ने अनुसूचित जाति आयोग में शिकायत दर्ज कराई कि उसे परेशान किया जा रहा है.

आयोग ने खुद ही मान लिया था अपराध
आयोग ने मामले में सुनवाई करते हुए 16 मार्च 2021 को एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के तहत आरोप को प्रमाणित मानते हुए सहायक प्रोफेसर के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने की सिफारिश कर दी थी. याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि आयोग ने अपनी सीमा से बाहर जाकर न सिर्फ एफआईआर की सिफारिश की, बल्कि बिना अदालती प्रक्रिया के आरोपी को दोषी भी घोषित कर दिया.

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देकर खींची 'लक्ष्मण रेखा'
मामले की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न न्यायदृष्टांतों का उल्लेख किया. अदालत ने आयोग की 16 मार्च 2021 की विवादित सिफारिश को पूरी तरह से निरस्त करते हुए याचिका को स्वीकार कर लिया. कोर्ट ने साफ तौर पर 'लक्ष्मण रेखा' तय करते हुए कहा कि आयोग का काम तथ्यों की जांच कर शासन या संबंधित प्राधिकरण को रिपोर्ट देना है, न कि खुद जज बनकर किसी के अधिकारों का न्यायनिर्णयन (Adjudication) करना या आपराधिक दोषसिद्धि का निष्कर्ष निकालना.

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