लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास बचे अवैध कब्जों पर हाईकोर्ट सख्त, पांच हफ्ते में पूरी करनी होगी कार्रवाई

लखनऊ जिला कोर्ट के आसपास बचे अवैध कब्जों पर हाईकोर्ट सख्त, पांच हफ्ते में पूरी करनी होगी कार्रवाई

प्रेषित समय :19:13:44 PM / Sat, Sep 12th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

लखनऊ. लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर और उसके आसपास सार्वजनिक क्षेत्रों में किए गए कथित अवैध कब्जों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर सख्त रुख अपनाया है. हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने स्पष्ट किया है कि पहले दिए गए आदेशों के तहत चिन्हित किए गए सभी शेष अवैध कब्जे हटाए जाएं. अदालत ने अधिकारियों को यह कार्रवाई प्राथमिकता के आधार पर अधिकतम पांच सप्ताह में पूरी करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को होगी.

न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति राजीव भारती की पीठ ने लखनऊ जिला एवं सत्र न्यायालय परिसर तथा उसके आसपास सार्वजनिक स्थानों पर कथित अवैध कब्जों से संबंधित दो याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया. नगर निगम की ओर से अब तक की गई कार्रवाई और हटाए गए कब्जों की तस्वीरें अदालत के सामने रखी गईं, लेकिन पीठ ने साफ कर दिया कि अभी कार्रवाई पूरी नहीं हुई है.

पहले हटाए गए कब्जों के बाद भी कार्रवाई बाकी
सुनवाई के दौरान लखनऊ नगर निगम के जोन-1 के जोनल अधिकारी की ओर से 8 सितंबर 2026 के निर्देशों के अनुपालन में की गई कार्रवाई का विवरण अदालत के सामने प्रस्तुत किया गया. अधिकारियों ने हटाए गए कब्जों की तस्वीरें भी पेश कीं.

नगर निगम की कार्रवाई में अब तक कई अवैध निर्माण हटाए जा चुके हैं. अदालत को बताया गया कि उसके पहले के आदेशों के अनुपालन में 57 और कथित अवैध कब्जे हटाए जा चुके हैं, जबकि इससे पहले 14 अवैध निर्माण हटाए गए थे.

हालांकि हाईकोर्ट ने इन कार्रवाइयों को अंतिम नहीं माना. पीठ ने स्पष्ट किया कि 7 अप्रैल 2026 के आदेश के पैरा-9 में जिन अवैध कब्जों को हटाने का निर्देश दिया गया था, उनमें से कोई भी शेष कब्जा कार्रवाई से बाहर नहीं रहना चाहिए.

72 कब्जेदारों को दिया गया था अंतिम अवसर
मामले में कार्रवाई आगे बढ़ाने से पहले हाईकोर्ट ने कब्जेदारों को अपना पक्ष रखने का अवसर देने पर भी जोर दिया था. 4 अगस्त के आदेश में अदालत ने शेष 72 कथित कब्जेदारों को अंतिम अवसर देने का निर्देश दिया था.

इन कब्जेदारों को अपने चैंबर या दुकानों को खाली करने अथवा सक्षम प्राधिकारी के सामने यह साबित करने का मौका दिया गया था कि संबंधित स्थान पर उनका कब्जा किसी वैध अधिकार या अनुमति के आधार पर है.

अदालत ने साफ किया था कि यदि कोई कब्जेदार अपने दावे के समर्थन में वैध दस्तावेज या अधिकार साबित करने में विफल रहता है तो संबंधित अवैध निर्माण को हटाने की कार्रवाई की जा सकती है. इस प्रक्रिया का उद्देश्य कार्रवाई से पहले प्रभावित लोगों को उचित अवसर देना था.

नोटिस नहीं मिले तो अखबार में प्रकाशित करने का आदेश
हाईकोर्ट ने नोटिस की प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था की थी. यदि किसी कब्जेदार को व्यक्तिगत रूप से नोटिस नहीं मिल पाता है तो एक हिंदी और एक अंग्रेजी दैनिक समाचार पत्र में नोटिस प्रकाशित कराने का निर्देश दिया गया था.

प्रकाशन के बाद संबंधित लोगों को कम से कम 10 दिन का समय देने को कहा गया था, ताकि वे अपना पक्ष रख सकें या संबंधित निर्माण पर अपने वैध अधिकार का प्रमाण प्रस्तुत कर सकें.

इस प्रक्रिया के बाद भी यदि कोई व्यक्ति अपने कब्जे को वैध साबित नहीं करता है तो नगर निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को कानून के अनुसार कार्रवाई करने की छूट दी गई थी.

रविवार को कार्रवाई की अनुमति
अदालत ने इस पूरे मामले में न्यायिक कामकाज प्रभावित न हो, इसका भी ध्यान रखा है. हाईकोर्ट ने पहले अपने आदेश में कहा था कि आवश्यकता होने पर तोड़फोड़ या अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई रविवार को की जा सकती है.

इसका उद्देश्य जिला एवं सत्र न्यायालय में चलने वाले नियमित न्यायिक कामकाज में किसी तरह का व्यवधान रोकना था. साथ ही कार्रवाई की तारीख की जानकारी संबंधित कब्जेदारों को पहले से देने का निर्देश दिया गया था.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया था कि कार्रवाई के दौरान यदि कोई व्यक्ति या समूह कानून-व्यवस्था में बाधा डालता है अथवा अधिकारियों के काम में रुकावट पैदा करता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है.

कार्रवाई में तय सावधानियां बरतने के निर्देश
ताजा सुनवाई में हाईकोर्ट ने अधिकारियों को यह भी याद दिलाया कि कब्जे हटाने की कार्रवाई के दौरान 4 अगस्त के आदेश में निर्धारित सावधानियों का पूरी तरह पालन किया जाए.

इसका अर्थ यह है कि केवल जल्दबाजी में निर्माण हटाने के बजाय पहले से निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाए. संबंधित लोगों को नोटिस, उनके दावे की जांच और सक्षम स्तर पर निर्णय जैसी प्रक्रियाओं को ध्यान में रखकर कार्रवाई आगे बढ़ाने को कहा गया है.

अदालत के इस रुख से यह स्पष्ट है कि उसका जोर केवल अतिक्रमण हटाने पर नहीं, बल्कि कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप कार्रवाई पूरी करने पर भी है.

पुलिस और प्रशासन को मिलकर करना होगा काम
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी हाईकोर्ट ने प्रशासन को निर्देश दिए हैं. अदालत ने लखनऊ के पुलिस आयुक्त, जिलाधिकारी और नगर आयुक्त को आपसी समन्वय से काम करने को कहा है.

पीठ ने निर्देश दिया कि नगर निगम के अधिकारियों को आवश्यक प्रशासनिक और पुलिस सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि कार्रवाई के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो.

यह निर्देश इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पहले की कार्रवाई के दौरान अधिवक्ताओं की ओर से विरोध किए जाने की बात भी सामने आई थी. नगर निगम ने अदालत को यह भी बताया था कि आगे की कार्रवाई के लिए पर्याप्त पुलिस और प्रशासनिक बल की जरूरत पड़ सकती है.

जिला कोर्ट के आसपास सार्वजनिक रास्तों का मामला
यह पूरा विवाद केवल कुछ दुकानों या चैंबरों तक सीमित नहीं है. हाईकोर्ट के सामने सार्वजनिक स्थानों और रास्तों पर किए गए कथित अतिक्रमण का व्यापक मुद्दा भी है.

पहले की सुनवाई में अदालत के सामने यह तथ्य रखा गया था कि जिला एवं सत्र न्यायालय, पुराने हाईकोर्ट परिसर, कलेक्ट्रेट, राजस्व परिषद, पुराने सदर तहसील परिसर, उप निबंधक कार्यालय, कमिश्नरेट, रेजीडेंसी पावर सब स्टेशन, बलरामपुर अस्पताल और कैसरबाग बस स्टेशन के आसपास सार्वजनिक रास्तों पर कब्जों के कारण आम लोगों को परेशानी हो रही है.

अदालत ने सार्वजनिक उपयोग वाले क्षेत्रों को अतिक्रमण से मुक्त कराने की जरूरत पर जोर दिया था. इसके बाद नगर निगम की ओर से चरणबद्ध कार्रवाई शुरू की गई.

पहले 100 से अधिक चैंबर हटाने की जानकारी
इस मामले में नगर निगम ने पूर्व में अदालत को बताया था कि हाईकोर्ट के आदेशों के बाद 100 से अधिक अवैध रूप से बनाए गए चैंबर हटाए जा चुके हैं.

हालांकि 72 चिन्हित कब्जों को हटाने की कार्रवाई शुरुआती दौर में अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ सकी. नगर निगम के अनुसार पहले चरण में केवल 14 कब्जे हटाए जा सके थे.

अधिकारियों ने अदालत को बताया कि शेष कब्जेदारों को नोटिस दिए गए थे, लेकिन वे अपने चैंबर या दुकानों पर कब्जे का वैध आधार स्पष्ट नहीं कर सके. इसके बाद अदालत ने पूरी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए कब्जेदारों को अंतिम अवसर देने की व्यवस्था की.

अधिवक्ताओं के विरोध का भी रहा असर
अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान अधिवक्ताओं के विरोध की स्थिति भी सामने आई थी. नगर निगम ने अदालत को आशंका जताई थी कि कार्रवाई के दौरान विरोध या कानून-व्यवस्था से जुड़ी स्थिति पैदा हो सकती है.

इसी वजह से हाईकोर्ट ने पुलिस और प्रशासन के बीच समन्वय को महत्वपूर्ण माना. अदालत ने संबंधित अधिकारियों को पर्याप्त सुरक्षा और प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि नगर निगम की टीम निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई कर सके.

अदालत का ताजा निर्देश इसी पृष्ठभूमि में आया है. इससे संकेत मिलता है कि अब कार्रवाई को लंबित रखने के बजाय निर्धारित समयसीमा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.

पांच सप्ताह में पूरी करनी होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने अब अधिकारियों को शेष अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई तेजी से पूरी करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा है कि कार्रवाई अधिमानतः पांच सप्ताह के भीतर पूरी की जाए.

अदालत ने साथ ही पहले दिए गए आदेशों में निर्धारित सावधानियों और प्रक्रियाओं का पालन जारी रखने को कहा है. इसका मतलब है कि कब्जा हटाने की कार्रवाई के दौरान वैध अधिकार का दावा करने वालों की स्थिति की जांच और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया को नजरअंदाज नहीं किया जा सकेगा.

मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है. तब तक प्रशासन और नगर निगम को अपनी कार्रवाई की प्रगति अदालत के सामने रखने की संभावना है.

सार्वजनिक रास्तों को अतिक्रमण मुक्त कराने पर जोर
हाईकोर्ट के लगातार निर्देशों से यह स्पष्ट है कि मामला केवल अवैध निर्माण हटाने तक सीमित नहीं है. अदालत सार्वजनिक संस्थानों और न्यायिक परिसरों के आसपास आम नागरिकों के लिए उपलब्ध रास्तों और स्थानों को अतिक्रमण मुक्त कराने पर जोर दे रही है.

जिला अदालत जैसे महत्वपूर्ण न्यायिक परिसर के आसपास रास्तों पर अतिक्रमण से न्यायिक कार्य, वकीलों, पक्षकारों और आम नागरिकों की आवाजाही प्रभावित होने की स्थिति बन सकती है. ऐसे में अदालत ने प्रशासन को कार्रवाई में तेजी लाने के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और उचित प्रक्रिया दोनों का पालन सुनिश्चित करने को कहा है.

अब पांच सप्ताह की समयसीमा के भीतर शेष कब्जों पर कार्रवाई पूरी करना प्रशासन के सामने बड़ी जिम्मेदारी है. 26 अक्टूबर की सुनवाई में यह स्पष्ट होगा कि हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद लखनऊ में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई कितनी आगे बढ़ी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-