रायपुर. इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) में अध्ययनरत विद्यार्थियों को आवासीय सुविधाओं की भारी कमी और असुरक्षित भवनों की समस्या से जूझना पड़ रहा है. विश्वविद्यालय परिसर स्थित दशक पुराने छात्रावासों की स्थिति अत्यंत जर्जर हो चुकी है. हाल ही में भवनों के छज्जे और प्लास्टर गिरने से एक छात्र के चोटिल होने का मामला भी सामने आ चुका है, जिससे परिसरों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं.
मरम्मत कार्यों में देरी और प्रशासनिक सुस्ती
सत्यम, शिवम और मंदाकिनी जैसे हॉस्टलों की इमारतें 30 से 60 वर्ष पुरानी हो चुकी हैं. विभागीय अमले और वित्तीय आवंटन के प्रावधान के बावजूद मरम्मत का कार्य समय पर पूरा नहीं किया जा सका है. परीक्षाओं के उपरांत ग्रीष्मकालीन अवकाश के दौरान भी सुधारीकरण की प्रक्रिया शुरू न होने के कारण वर्तमान में छात्र जोखिम भरे माहौल में रहने को मजबूर हैं.
आवासीय क्षमता और प्रवेश सीटों में भारी असमानता
विश्वविद्यालय में स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG) और शोध (PhD) पाठ्यक्रमों को मिलाकर कुल 2,000 विद्यार्थियों के शैक्षणिक प्रवेश की क्षमता है. इसके विपरीत, परिसर में निर्मित कुल 14 छात्रावासों (8 बालक एवं 6 बालिका हॉस्टल) में केवल 1,400 छात्रों के ठहरने की व्यवस्था है.
इस असंतुलन के कारण लगभग 30 प्रतिशत विद्यार्थियों को परिसर से बाहर महंगे निजी आवास या पीजी (PG) का सहारा लेना पड़ रहा है. विद्यार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से जर्जर इमारतों की तत्काल मरम्मत कराने तथा नए छात्रावासों के निर्माण द्वारा आवासीय क्षमता का विस्तार करने का आग्रह किया है.
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