बेंगलुरु. शहर के कोरमंगला इलाके में वर्षों से टूटे पड़े फुटपाथ की शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने के बाद एक सीईओ ने खुद ही इसे ठीक कराने का फैसला किया. आईआईटी से पढ़े और बेंगलुरु स्थित कंपनी के संस्थापक सिद्धार्थ डायलानी ने अपनी सोसायटी के पास टूटे फुटपाथ की मरम्मत अपने खर्च पर कराई और वहां रैंप भी बनवाया. उन्होंने बताया कि इस पूरे काम में श्रम और सीमेंट सहित कुल 2700 रुपये खर्च हुए.
सिद्धार्थ डायलानी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर इस संबंध में जानकारी साझा की. उन्होंने दावा किया कि फुटपाथ कई वर्षों से खराब था. समस्या के समाधान के लिए उन्होंने बृहत बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) में शिकायत की, ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) को ईमेल भेजा, शिकायत टिकट उठाया और व्हाट्सऐप हेल्पलाइन के माध्यम से भी संपर्क किया, लेकिन उन्हें कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली.
सालों से खराब था सोसायटी के पास का फुटपाथ
डायलानी के मुताबिक उनकी सोसायटी के पास फुटपाथ लंबे समय से टूटा हुआ था. उन्होंने समस्या को संबंधित सरकारी माध्यमों के जरिए उठाने की कोशिश की, लेकिन जब कई स्तरों पर शिकायत के बाद भी समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने खुद इसे ठीक कराने का निर्णय लिया.
उन्होंने एक्स पर लिखा कि अंततः उन्होंने फुटपाथ को स्वयं ठीक कराने का फैसला किया. इसके बाद उन्होंने मरम्मत का काम कराया और पैदल चलने वालों के लिए रैंप भी तैयार कराया.
डायलानी के अनुसार इस काम पर कुल 2700 रुपये खर्च हुए. इसमें श्रमिकों की मजदूरी और रैंप बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ सीमेंट भी शामिल था.
रैंप से बुजुर्ग और बच्चों वाले परिवारों को सुविधा
सीईओ ने मरम्मत के बाद फुटपाथ और रैंप की पहले तथा बाद की तस्वीरें भी साझा कीं. उन्होंने बताया कि अब बच्चों की गाड़ी लेकर चलने वाले माता-पिता और व्हीलचेयर का इस्तेमाल करने वाले वरिष्ठ नागरिक इसका सुविधाजनक तरीके से उपयोग कर सकेंगे.
इस पहल का एक प्रमुख पहलू फुटपाथ को केवल चलने लायक बनाना नहीं, बल्कि उसे अधिक सुगम बनाना भी रहा. रैंप के निर्माण से उन लोगों के लिए रास्ता आसान हुआ है, जिन्हें सीढ़ीनुमा या ऊंचे फुटपाथ से गुजरने में परेशानी हो सकती है.
बोले सीईओ शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
डायलानी ने बताया कि उन्होंने समस्या को लेकर बीबीएमपी से संपर्क किया था. इसके अलावा जीबीए को ईमेल भेजने, शिकायत टिकट दर्ज कराने और व्हाट्सऐप हेल्पलाइन पर बातचीत करने की कोशिश भी की गई. उनके मुताबिक इन सभी आधिकारिक माध्यमों से संपर्क करने के बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ.
इसके बाद उन्होंने अपनी ओर से फुटपाथ की मरम्मत कराने का फैसला किया. उनका कहना था कि जब आधिकारिक माध्यमों से शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो उन्हें खुद आगे आना पड़ा.
बेंगलुरु के दूसरे इलाकों तक पहल बढ़ाने की अपील
सिद्धार्थ डायलानी ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में इस पहल को दूसरे क्षेत्रों तक ले जाने का सुझाव भी दिया. उन्होंने किरण मजूमदार-शॉ, मोहनदास पई और निखिल कामथ को टैग करते हुए कहा कि उन्हें मिलकर बेंगलुरु के और इलाकों में इस तरह की पहल को आगे बढ़ाना चाहिए.
उनकी इस अपील का उद्देश्य शहर के अन्य हिस्सों में भी ऐसी छोटी लेकिन जरूरी नागरिक सुविधाओं से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने का था.
सोशल मीडिया पर लोगों ने दी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
डायलानी की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दीं. एक व्यक्ति ने उनकी पहल की सराहना करते हुए उन्हें शुभकामनाएं दीं. दूसरे व्यक्ति ने सुझाव दिया कि इस तरह के खर्च को पूरी तरह कर कटौती के योग्य बनाया जाना चाहिए.
एक अन्य व्यक्ति ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नागरिक पहले कर चुकाते हैं और फिर बुनियादी नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए अपनी जेब से भी पैसा खर्च करते हैं.
इस प्रतिक्रिया के जवाब में डायलानी ने कहा कि जब आधिकारिक सभी माध्यमों से शिकायत करने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई तो वह वास्तव में हैरान थे.
एक अन्य व्यक्ति ने उन्हें खुद मरम्मत कराने के खिलाफ सलाह दी. उसकी प्रतिक्रिया में कहा गया कि अच्छे इरादे से नागरिक सुविधाओं को ठीक करने वालों के लिए भी कानून कभी-कभी मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं और ऐसी परिस्थितियों में लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए.
2700 रुपये के खर्च ने खींचा ध्यान
इस पूरे मामले में सबसे अधिक चर्चा 2700 रुपये की उस राशि को लेकर हुई, जिसमें डायलानी के अनुसार श्रम और सीमेंट की लागत शामिल थी. एक ओर जहां फुटपाथ कई वर्षों से खराब होने का दावा किया गया, वहीं दूसरी ओर अपेक्षाकृत कम खर्च में उसके एक हिस्से की मरम्मत और रैंप तैयार किए जाने की जानकारी ने सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींचा.
डायलानी द्वारा साझा की गई तस्वीरों में फुटपाथ की पहले और बाद की स्थिति दिखाई गई. उन्होंने बताया कि अब इसका इस्तेमाल बच्चों की गाड़ी के साथ चलने वाले माता-पिता और व्हीलचेयर पर चलने वाले वरिष्ठ नागरिक भी आसानी से कर सकते हैं.
इस घटना ने बेंगलुरु में बुनियादी नागरिक सुविधाओं को लेकर नागरिकों की शिकायतों और उनके समाधान की प्रक्रिया पर सोशल मीडिया में चर्चा छेड़ दी. डायलानी की पहल को जहां कुछ लोगों ने सराहा, वहीं कुछ ने नागरिकों द्वारा खुद ऐसे काम कराने से जुड़े संभावित नियम-कानूनों को लेकर सावधानी बरतने की बात कही.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

