बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश सुप्रीम कोर्ट में बोले- मंत्री पद पर मेरी नियुक्ति संवैधानिक है

बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश सुप्रीम कोर्ट में बोले- मंत्री पद पर मेरी नियुक्ति संवैधानिक है

प्रेषित समय :14:33:56 PM / Wed, Sep 16th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली/पटना. बिहार सरकार के पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. दीपक प्रकाश ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी नियुक्ति को संवैधानिक बताया है. जवाब में दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि उनकी नियुक्ति संविधान के अनुच्छेद 164 के प्रावधानों के अनुरूप है और याचिका कानूनी रूप से सुनवाई योग्य नहीं है.

दीपक ने हलफनामे में कहा है कि उनकी मंत्री पद पर पहली नियुक्ति नवंबर 2025 में हुई थी. तब उन्हें 22 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद में मंत्री नियुक्त किया गया था, लेकिन छह महीने पूरे होने से पहले ही उनका कार्यकाल खत्म हो गया. मुख्यमंत्री के इस्तीफे के बाद 15 अप्रैल 2026 को मंत्रिपरिषद् समाप्त हो गई और मंत्री पद पर पहला कार्यकाल छह महीने पूरे होने से पहले ही खत्म हो गया.

सीएम की सलाह पर दोबारा मंत्री नियुक्त

हलफनामे में दीपक ने साफ किया है कि वह 22 दिन तक मंत्री पद पर नहीं रहे. पहली सरकार के समाप्त होने के बाद करीब 22 दिनों तक उनके पास कोई मंत्री पद नहीं था. इसके बाद नई सरकार बनी और 7 मई 2026 को उन्हें नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सलाह पर दोबारा मंत्री नियुक्त किया गया.

इस बड़े फैसले का हवाला

हलफनामे में एसआर चौधरी फैसले की मिसाल को इस मामले से अलग बताते हुए जवाब में एसआर चौधरी वर्सेज स्टेट आफ पंजाब फैसले का हवाला दिया है और कहा गया है कि वह मामला उसी मुख्यमंत्री और उसी मंत्रिपरिषद में छह महीने की सीमा से बचने के लिए दोबारा नियुक्ति से जुड़ा था, जबकि यहां पुरानी मंत्रिपरिषद पूरी तरह समाप्त हो चुकी थी और इसके बाद नई सरकार बनी.

अनुच्छेद 164(4) की छह महीने की सीमा स्वीकार करते हुए जवाबी हलफनामे में कहा गया है कि संविधान गैर-विधायक को मंत्री बनने की अनुमति देता है, लेकिन छह लगातार महीनों तक विधायक या विधान परिषद सदस्य ना बनने पर मंत्री पद छोडऩा पड़ता है. विवाद इस बात पर है कि इस सीमा की गणना मौजूदा परिस्थितियों में कैसे की जाए.

संवैधानिक स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता

हलफनामे में दीपक ने कहा है कि वह अब विधान परिषद के सदस्य हैं. हलफनामे के मुताबिक, 5 अगस्त 2026 को राज्यपाल ने उन्हें बिहार विधान परिषद का सदस्य नामित किया. यह नामांकन एक रिक्त सीट भरने के लिए किया गया था और उन्होंने 6 अगस्त को शपथ ली.वर्तमान स्थिति को भी देखने पर ज़ोर देते हुए हलफनामे में कहा गया है कि अब वह बिहार विधानमंडल के सदस्य हैं, इसलिए उनके खिलाफ मंत्री पद से हटाने की मांग पर फैसला करते समय उनकी वर्तमान संवैधानिक स्थिति को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता.

बड़ी पीठ को मामला भेजने का विकल्प

हलफनामे में कहा गया है कि यदि सुप्रीम कोर्ट को लगता है कि एसआर चौधरी का फैसला इस मामले की अलग परिस्थितियों पर भी लागू होता है, तो अनुच्छेद 164(4) की व्याख्या से जुड़े संवैधानिक सवाल को बड़ी पीठ के पास भेजा जा सकता है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज करने की मांग की है. दीपक ने हलफनामे में यह भी कहा है कि उनकी नियुक्ति पर कोई फैसला होने पर भी पहले किए गए सरकारी कामों, नियुक्तियों और तीसरे पक्ष के अधिकारों पर स्वत: या व्यापक असर नहीं पडऩा चाहिए.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-