छह शहरों में जैव विविधता का बनेगा वैज्ञानिक मानचित्र, विशेषज्ञों ने निगरानी और जल निकाय संरक्षण पर दिया जोर

छह शहरों में जैव विविधता का बनेगा वैज्ञानिक मानचित्र, विशेषज्ञों ने निगरानी और जल निकाय संरक्षण पर दिया जोर

प्रेषित समय :21:20:35 PM / Fri, Sep 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अनिल मिश्र/ पटना 

बिहार के तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में जैव विविधता की स्थिति को वैज्ञानिक तरीके से समझने और उसके संरक्षण की दिशा तय करने के लिए छह प्रमुख शहरी क्षेत्रों में चल रहे अध्ययन की समीक्षा की गई. दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय और बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यशाला-सह-समीक्षा बैठक में विभिन्न संस्थानों की शोध टीमों ने अपने अध्ययन की प्रगति और प्रारंभिक निष्कर्ष साझा किए. विशेषज्ञों ने कहा कि शहरों के विकास के साथ प्राकृतिक आवासों और जैव विविधता के संरक्षण को भी योजनाओं का हिस्सा बनाना जरूरी है.

छह शहरी क्षेत्रों पर चल रहा अध्ययन
शहरी जैव विविधता एवं सिटी बायोडायवर्सिटी इंडेक्स के अध्ययन के लिए बिहार के छह शहरी क्षेत्रों को शामिल किया गया है. इनमें बिहारशरीफ-राजगीर-नालंदा-पावापुरी, पटना, गया, भागलपुर, आरा-बक्सर और मुजफ्फरपुर शामिल हैं.

अध्ययन में क्षेत्रीय सर्वेक्षण के साथ पारिस्थितिकी तंत्र से मिलने वाली सेवाओं, शहरी शासन व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के उपयोग जैसे पहलुओं को भी शामिल किया गया है. विभिन्न संस्थानों की शोध टीमें अपने-अपने क्षेत्रों में अध्ययन कर रही हैं और अंतरिम आंकड़ों के आधार पर आगे की रणनीति तैयार की जा रही है.

कई संस्थानों ने साझा किए शोध निष्कर्ष
सीयूएसबी के कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में और बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष भरत ज्योति, आईएफएस (सेवानिवृत्त), की अध्यक्षता में हुई बैठक में देश के विभिन्न संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हुए. सीयूएसबी के प्रधान अन्वेषक प्रो. राम प्रताप सिंह ने बैठक का संचालन और समन्वय किया.

आईआईटी आईएसएम धनबाद, सीएसआईआर-नीरी, आईआईएचएस-बेंगलुरु, बीआईटी-मेसरा, बीआईटी-पटना, एनआईटी-पटना, कॉलेज ऑफ कॉमर्स, आर्ट्स एंड साइंस पटना, पटना विश्वविद्यालय, एएन कॉलेज और सीआईएमपी की शोध टीमों ने अपने अध्ययनों की प्रगति प्रस्तुत की.

पक्षियों के घोंसलों से मिलेगी महत्वपूर्ण जानकारी
प्रो. राम प्रताप सिंह ने गया-बोधगया, मुजफ्फरपुर और आरा-बक्सर से संबंधित अध्ययन के निष्कर्ष साझा किए. उन्होंने बताया कि शहरी क्षेत्रों में पक्षियों के घोंसले बनाने के अध्ययन से यह समझने में मदद मिल सकती है कि कोई शहर पक्षियों के जीवन-चक्र को किस हद तक सहारा दे रहा है.

विशेष रूप से प्रजनन के लिए उपयुक्त परिस्थितियों की उपलब्धता का अध्ययन शहरी जैव विविधता के अधिक विश्वसनीय आकलन में उपयोगी हो सकता है. इससे केवल पक्षियों की मौजूदगी ही नहीं, बल्कि उनके लिए शहर के प्राकृतिक वातावरण की उपयोगिता को भी समझने में मदद मिलेगी.

भागलपुर में चमगादड़ों पर विशेष अध्ययन
आईआईएचएस के अधिष्ठाता प्रो. जगदीश के ने भागलपुर से संबंधित अध्ययन प्रस्तुत किया. उन्होंने शहरी जैव विविधता को समझने में चमगादड़ों के अध्ययन को महत्वपूर्ण बताया. चमगादड़ों की मौजूदगी और उनके आवास से संबंधित जानकारी शहर के पारिस्थितिक तंत्र की स्थिति को समझने में उपयोगी हो सकती है.

नियमित निगरानी और जल निकायों के संरक्षण पर जोर
बैठक के समापन पर विशेषज्ञों ने विभिन्न ऋतुओं में नियमित निगरानी की आवश्यकता पर जोर दिया. उनका कहना था कि एक ही मौसम के सर्वेक्षण से शहरी जैव विविधता की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ सकती. इसलिए अलग-अलग मौसमों में लगातार आंकड़े जुटाना जरूरी है.

विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण घोंसला बनाने वाले वृक्षों के संरक्षण, आवासीय क्षेत्रों के बीच पारिस्थितिक संपर्क बहाल करने और शहरी जल निकायों को सुरक्षित रखने की जरूरत भी रेखांकित की.

विश्वविद्यालयों में भी बढ़ेगा जैव विविधता संरक्षण
कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह ने कहा कि इस तरह के बहु-संस्थागत प्रयास विश्वविद्यालयों और अन्य संस्थानों के परिसरों में भी शहरी जैव विविधता को बढ़ावा देने में उपयोगी हो सकते हैं. बिहार राज्य जैव विविधता बोर्ड के अध्यक्ष भरत ज्योति ने इस पहल को बिहार में शहरी जैव विविधता और सिटी बायोडायवर्सिटी इंडेक्स के लिए बहु-संस्थागत सहयोग का महत्वपूर्ण प्रयास बताया.

कार्यशाला में सीयूएसबी के प्रो. विनोद कुमार, प्रो. दुर्ग विजय सिंह, प्रो. रिजवानुल हक, प्रो. गौतम कुमार सहित विभिन्न विभागों के प्राध्यापक मौजूद रहे. બેઠક में शोध टीमों के बीच आंकड़ों और ज्ञान-संसाधनों के आदान-प्रदान को आगे भी जारी रखने पर जोर दिया गया.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-