रादुविवि के बड़े बाबू की संपत्ति ने चौंकाया, आय से कहीं अधिक खर्च, लोकायुक्त ने दर्ज किया मामला

रादुविवि के बड़े बाबू की संपत्ति ने चौंकाया, आय से कहीं अधिक खर्च, लोकायुक्त ने दर्ज किया मामला

प्रेषित समय :20:55:49 PM / Fri, Sep 18th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के उच्च वर्ग लिपिक बंश बहोर पटेल की संपत्ति और खर्च से जुड़े मामले में लोकायुक्त जांच के बाद अनुपातहीन संपत्ति का प्रकरण सामने आया है. लोकायुक्त के अनुसार जांच में पटेल की कुल आय 91 लाख 88 हजार 611 रुपये पाई गई, जबकि इसी अवधि में उनका कुल व्यय 1 करोड़ 68 लाख 51 हजार 337 रुपये दर्ज किया गया. आय की तुलना में व्यय अधिक पाए जाने के बाद लोकायुक्त ने उनके विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना शुरू कर दी है.

आय और व्यय के अंतर से सामने आया मामला
लोकायुक्त पुलिस के अनुसार रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में उच्च वर्ग लिपिक के पद पर पदस्थ बंश बहोर पटेल की आय और संपत्ति से संबंधित शिकायत की जांच की गई थी. जांच के दौरान उनके सेवाकाल की आय, संपत्ति तथा विभिन्न मदों में किए गए खर्च का परीक्षण किया गया.

जांच में लोकायुक्त को आय की तुलना में काफी अधिक व्यय मिला. उपलब्ध जांच आंकड़ों के अनुसार पटेल की कुल आय करीब 91.88 लाख रुपये आंकी गई, जबकि कुल व्यय करीब 1.68 करोड़ रुपये पाया गया. इस अंतर को लोकायुक्त ने अनुपातहीन संपत्ति के रूप में दर्ज करते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू की है.

लोकायुक्त एसपी ने दी कार्रवाई की जानकारी
लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक अंजुलता पटले के अनुसार यह कार्रवाई पुलिस महानिदेशक लोकायुक्त मध्य प्रदेश भोपाल योगेश देशमुख के निर्देशन और पुलिस उप महानिरीक्षक लोकायुक्त मनोज सिंह के नेतृत्व में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत की गई.

उन्होंने बताया कि जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध आय और व्यय के दस्तावेजों का परीक्षण किया गया. जांच में सामने आए आंकड़ों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध प्रकरण पंजीबद्ध किया गया है. अब मामले की विवेचना की जा रही है.

सेवाकाल की आय और खर्च का हुआ परीक्षण
लोकायुक्त जांच में किसी कर्मचारी की आय का आकलन केवल वेतन के आधार पर नहीं किया जाता, बल्कि उपलब्ध वैध आय के विभिन्न स्रोतों, संपत्ति, निवेश और संबंधित अवधि में किए गए खर्च का परीक्षण किया जाता है. इसी प्रक्रिया के तहत बंश बहोर पटेल की आय और व्यय से जुड़े दस्तावेजों की जांच की गई.

लोकायुक्त के मुताबिक जांच में सामने आया कि संबंधित अवधि में पटेल की कुल आय की तुलना में उनका व्यय काफी अधिक रहा. इसी आधार पर अनुपातहीन संपत्ति का मामला दर्ज किया गया है. अब विवेचना के दौरान आय के स्रोत, संपत्ति अर्जित करने के तरीके और खर्च से जुड़े दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाएगी.

अब संपत्ति और आय के स्रोतों की होगी पड़ताल
अपराध पंजीबद्ध होने के बाद लोकायुक्त पुलिस की जांच का अगला चरण आय और संपत्ति के स्रोतों को सत्यापित करना होगा. जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित अवधि में पटेल और उनके परिवार के नाम पर कौन-कौन सी चल-अचल संपत्तियां थीं तथा उनके लिए भुगतान किस स्रोत से किया गया.

इसके अलावा बैंक खातों, निवेश, जमीन-मकान, वाहन और अन्य वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है. जांच एजेंसी यह भी देखेगी कि सामने आई संपत्तियों और खर्चों के लिए कोई वैध आय स्रोत उपलब्ध था या नहीं.

विश्वविद्यालय में पदस्थापना से जुड़े दस्तावेज भी जांच के दायरे में
बंश बहोर पटेल रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में उच्च वर्ग लिपिक के पद पर कार्यरत रहे हैं. उनकी सेवा से संबंधित वेतन और अन्य वैध आय के दस्तावेज भी जांच का हिस्सा बनाए जा सकते हैं. लोकायुक्त यह मिलान करेगा कि सेवाकाल में प्राप्त वेतन तथा अन्य घोषित आय के अनुपात में संपत्ति और व्यय कितना था.

जांच में यदि किसी संपत्ति या निवेश का ऐसा स्रोत सामने आता है जिसे वैध आय से जोड़ना संभव नहीं है, तो उसके संबंध में दस्तावेज और स्पष्टीकरण जुटाया जाएगा. हालांकि, इस स्तर पर लोकायुक्त द्वारा दर्ज मामला जांचाधीन है और अंतिम निष्कर्ष विवेचना पूरी होने के बाद ही सामने आएगा.

अनुपातहीन संपत्ति के मामलों में दस्तावेजी जांच महत्वपूर्ण
भ्रष्टाचार से जुड़े अनुपातहीन संपत्ति के मामलों में आय, संपत्ति और व्यय का तुलनात्मक परीक्षण महत्वपूर्ण होता है. जांच एजेंसी को यह स्थापित करना होता है कि संबंधित अवधि में व्यक्ति की वैध आय कितनी थी और उसके मुकाबले संपत्ति अथवा खर्च कितना रहा.

रादुविवि के लिपिक के मामले में भी लोकायुक्त ने आय और व्यय के बीच पाए गए अंतर को आधार बनाकर प्रकरण दर्ज किया है. अब जांच के दौरान दस्तावेजों के सत्यापन और विभिन्न वित्तीय स्रोतों की पड़ताल से मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी.

विवेचना के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
लोकायुक्त द्वारा प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद अब जांच आगे बढ़ेगी. इसमें संबंधित दस्तावेजों, बैंक लेन-देन, संपत्ति और आय के स्रोतों का परीक्षण किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर संबंधित विभागों और वित्तीय संस्थाओं से भी जानकारी ली जा सकती है.

फिलहाल लोकायुक्त ने उपलब्ध जांच निष्कर्षों के आधार पर बंश बहोर पटेल के विरुद्ध अनुपातहीन संपत्ति का अपराध पंजीबद्ध किया है. मामले में अंतिम स्थिति विस्तृत विवेचना और सामने आने वाले साक्ष्यों के आधार पर ही स्पष्ट होगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-