ग्वालियर. ग्वालियर के गिरवाई क्षेत्र में सोमवार को कुशवाह समाज के छात्रावास-सह-सामुदायिक भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संबोधन के दौरान विरोध और हंगामे की स्थिति बन गई. कुछ युवाओं ने नारेबाजी करते हुए काले झंडे दिखाए. आयोजकों और विरोध कर रहे लोगों के बीच विवाद बढ़ने के बाद हाथापाई हुई और कुर्सियां भी फेंकी गईं. पुलिस ने मौके पर पहुंचकर विरोध कर रहे लोगों को कार्यक्रम स्थल से बाहर निकाला और कुछ युवाओं को पूछताछ के लिए थाने ले गई. घटना का वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ है.
संबोधन शुरू होते ही नारेबाजी से बढ़ा विवाद
कार्यक्रम में सिंधिया मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद थे. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जैसे ही उनका संबोधन शुरू हुआ, अग्रिम पंक्ति में बैठे कुछ युवाओं ने नारेबाजी शुरू कर दी. उनके हाथों में काले झंडे होने की बात भी सामने आई है. प्रदर्शनकारियों की ओर से ‘राजनीति नहीं चलेगी’ और ‘समाज को बांटना बंद करो’ जैसे नारे लगाए जाने की जानकारी सामने आई है.
कुछ रिपोर्टों के अनुसार विरोध करने वाले लोगों की आपत्ति कार्यक्रम में सिंधिया को मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर थी. प्रदर्शन में शामिल बताए गए हरिओम कुशवाह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि छात्रावास के लिए आवंटित जमीन कुशवाह समाज से संबंधित है, इसलिए कार्यक्रम में समाज से जुड़े नेताओं और जनप्रतिनिधियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी. यह उनका आरोप और पक्ष है.
पुलिस ने लोगों को बाहर निकाला तो भिड़े दोनों पक्ष
नारेबाजी और काले झंडे दिखाए जाने के बाद कार्यक्रम में मौजूद अन्य लोगों ने इसका विरोध किया. स्थिति बिगड़ने पर आयोजकों और पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे युवाओं को पंडाल से बाहर निकालने का प्रयास किया. इसी दौरान दोनों पक्षों में धक्का-मुक्की और मारपीट शुरू हो गई.
प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध वीडियो के आधार पर विवाद के दौरान लात-घूंसे चलने तथा कुर्सियां फेंके जाने की बात सामने आई है. पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया और कुछ युवाओं को गिरवाई थाने ले जाया गया.
हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में पुलिस की ओर से पूरे घटनाक्रम और इसमें शामिल सभी लोगों की भूमिका को लेकर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. इसलिए किस पक्ष की ओर से पहले हिंसा हुई, इसे लेकर अलग-अलग दावे हैं.
सिंधिया ने मंच से जारी रखा संबोधन
हंगामे के बीच सिंधिया ने मंच से कार्यक्रम जारी रखा. रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने विरोध कर रहे लोगों को अपना विरोध करने देने और कार्यक्रम को आगे बढ़ाने की बात कही. उन्होंने यह भी कहा कि हंगामा करने वालों के नाम और उन्हें भेजने वाले व्यक्ति का नाम नोट कर लिया गया है.
इस दौरान मंच के सामने कुछ देर तक अफरा-तफरी की स्थिति बनी रही. पुलिस और आयोजकों की सक्रियता के बाद प्रदर्शनकारियों को कार्यक्रम स्थल से हटाया गया.
कार्यक्रम में किसे बुलाया गया इसे लेकर भी सवाल
विवाद का एक दूसरा पहलू कार्यक्रम में आमंत्रित जनप्रतिनिधियों को लेकर सामने आया है. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मध्यप्रदेश सरकार के मंत्री नारायण सिंह कुशवाह कार्यक्रम में मौजूद थे, जबकि ग्वालियर के सांसद भारत सिंह कुशवाह को आमंत्रित किए जाने को लेकर सवाल उठे.
विरोध करने वाले पक्ष से जुड़े लोगों ने मीडिया से बातचीत में कहा कि समाज के कार्यक्रम में कुशवाह समाज से जुड़े अन्य जनप्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाना चाहिए था. उनका कहना था कि उनका विरोध सिंधिया के व्यक्तिगत रूप से नहीं, बल्कि उन्हें मुख्य अतिथि बनाए जाने को लेकर था. यह दावा प्रदर्शनकारियों की ओर से किया गया है.
कुछ मीडिया रिपोर्टों में इस घटनाक्रम को स्थानीय स्तर पर नेताओं के समर्थकों के बीच मतभेद से भी जोड़कर देखा गया है. हालांकि, इसे घटना का निश्चित कारण मानने से पहले संबंधित पक्षों और पुलिस के आधिकारिक विवरण का इंतजार जरूरी है.
मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने वीडियो जारी कर जताया खेद
घटना के बाद मंत्री नारायण सिंह कुशवाह ने इंटरनेट मीडिया पर एक वीडियो जारी किया और कार्यक्रम में हुए घटनाक्रम पर खेद जताया. उन्होंने कहा कि प्रभावशाली नेताओं के बहकावे में आकर युवाओं द्वारा ऐसा किया गया. उन्होंने बिना किसी नेता का नाम लिए कहा कि कुशवाह समाज किसी की जागीर नहीं है और ऊंचे पद पर बैठे लोगों द्वारा शक्ति के गलत इस्तेमाल को उचित नहीं माना जा सकता.
मंत्री ने घटना की निंदा करते हुए यह भी कहा कि समाज को इस तरह के विवादों से दूर रहना चाहिए. उनके बयान के बाद कार्यक्रम में हुए हंगामे को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है.
काले झंडे दिखाने वालों का अलग पक्ष
विरोध करने वालों की ओर से कहा गया कि उनका उद्देश्य कार्यक्रम को बाधित करना नहीं था, बल्कि मुख्य अतिथि के चयन को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराना था. हरिओम कुशवाह के अनुसार छात्रावास के लिए जमीन समाज को आवंटित की गई थी और इसलिए समाज के प्रतिनिधियों को कार्यक्रम में प्रमुख भूमिका मिलनी चाहिए थी. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि काले झंडे दिखाने के बाद उनके साथ आए लोगों के साथ मारपीट की गई.
दूसरी ओर, कार्यक्रम में मौजूद लोगों की ओर से प्रदर्शनकारियों द्वारा नारेबाजी और व्यवधान पैदा किए जाने पर आपत्ति जताई गई. इसी विरोध के दौरान स्थिति हिंसक होने की बात सामने आई है.
इंटरनेट मीडिया पर वीडियो से बढ़ी चर्चा
घटना के बाद कार्यक्रम से जुड़े वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुए. इनमें पुलिसकर्मियों द्वारा कुछ लोगों को हटाने की कोशिश और कार्यक्रम स्थल पर लोगों के बीच धक्का-मुक्की दिखाई देने की बात विभिन्न रिपोर्टों में कही गई है. वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें दिखाई दे रहे प्रत्येक व्यक्ति की पहचान के संबंध में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
घटना के बाद स्थानीय राजनीतिक गतिविधियों में भी इस विवाद की चर्चा शुरू हो गई है. हालांकि, कार्यक्रम के मूल उद्देश्य—कुशवाह समाज के छात्रावास-सह-सामुदायिक भवन का भूमिपूजन—के बजाय पूरा घटनाक्रम विरोध और उसके बाद हुए विवाद के कारण चर्चा में आ गया.
पुलिस की भूमिका पर भी निगाह
घटना के दौरान पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति संभाली और कुछ युवाओं को थाने ले जाकर पूछताछ की. उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार बाद में कुछ लोगों को छोड़ दिया गया.
फिलहाल महत्वपूर्ण यह है कि घटना में शामिल लोगों की भूमिका और विवाद की शुरुआत को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं. पुलिस की ओर से यदि आगे कोई प्राथमिकी, जांच या अन्य कार्रवाई की जानकारी जारी की जाती है तो उससे घटनाक्रम की कानूनी स्थिति अधिक स्पष्ट होगी.
सामाजिक कार्यक्रम में राजनीतिक विरोध ने बदला माहौल
कुशवाह समाज के छात्रावास के भूमिपूजन के लिए आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी के बीच हुआ यह विवाद स्थानीय राजनीति और सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े सवालों को भी सामने लाया है. एक पक्ष कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के चयन पर आपत्ति जता रहा था, जबकि दूसरे पक्ष ने कार्यक्रम के दौरान विरोध के तरीके पर सवाल उठाए.
फिलहाल घटना का तथ्यात्मक आधार इतना है कि सिंधिया के संबोधन के दौरान नारेबाजी और काले झंडे दिखाए गए, इसके बाद कार्यक्रम स्थल पर विवाद और मारपीट हुई तथा पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया. विवाद के राजनीतिक कारणों को लेकर सामने आ रहे दावों की पुष्टि संबंधित पक्षों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही हो सकेगी.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

