फॉरेंसिक विज्ञान से साक्ष्य की सच्चाई तक पहुंचने का संदेश, फोरेंसाइट-2026 का शुभारंभ

फॉरेंसिक विज्ञान से साक्ष्य की सच्चाई तक पहुंचने का संदेश, फोरेंसाइट-2026 का शुभारंभ

प्रेषित समय :21:13:21 PM / Wed, Sep 23rd, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

निरंजन द्विवेदी ने कहा भ्रामक विज्ञापनों से सतर्क रहें और तथ्यों के आधार पर लें निर्णय

अहमदाबाद. नर नारायण शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एनएसआईटी), इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस एंड साइबर सिक्योरिटी, जेतलपुर में सोमवार को पांच दिवसीय फोरेंसाइट-2026 फॉरेंसिक साइंस वीक का शुभारंभ हुआ. 21 से 25 सितंबर तक आयोजित होने वाले इस आयोजन की थीम “बियॉन्ड द क्राइम एक्सप्लोरिंग द साइंस ऑफ एविडेंस” रखी गई है. आयोजन के पहले दिन फॉरेंसिक विज्ञान को अपराध अनुसंधान के साथ-साथ वैज्ञानिक सोच, साक्ष्य आधारित निर्णय और उपभोक्ता जागरूकता से जोड़ते हुए विद्यार्थियों के लिए विभिन्न व्यावहारिक गतिविधियां आयोजित की गईं.

उद्घाटन कार्यक्रम में कंज्यूमर कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव निरंजन द्विवेदी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे. कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थान के कैंपस डायरेक्टर संजय शर्मा ने की. विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गुप्ता सहित संस्थान के शिक्षक, विशेषज्ञ और बड़ी संख्या में विद्यार्थी कार्यक्रम में शामिल हुए.

भ्रामक विज्ञापनों को लेकर उपभोक्ताओं को किया जागरूक
कार्यक्रम में निरंजन द्विवेदी ने फॉरेंसिक विज्ञान और उपभोक्ता जागरूकता के बीच संबंध पर प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में उपभोक्ता विभिन्न प्रकार के विज्ञापनों और उत्पादों से जुड़े दावों से प्रभावित होता है. ऐसे में किसी वस्तु या सेवा का चयन केवल आकर्षक विज्ञापन देखकर नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंने विद्यार्थियों और उपभोक्ताओं से उत्पाद की गुणवत्ता, प्रमाणिकता, उपयोगिता और वास्तविक तथ्यों की जांच के बाद निर्णय लेने की बात कही. उन्होंने विशेष रूप से भ्रामक विज्ञापनों के प्रति सतर्क रहने का संदेश दिया.

द्विवेदी ने कहा कि वैज्ञानिक जांच और साक्ष्य आधारित दृष्टिकोण किसी उत्पाद या सेवा के संबंध में किए जा रहे दावों की वास्तविकता समझने में मदद कर सकता है. उनके अनुसार फॉरेंसिक विज्ञान का दायरा केवल अपराध की जांच तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक प्रमाणों के माध्यम से तथ्य और सच्चाई तक पहुंचने की प्रक्रिया से भी इसका सीधा संबंध है.

विद्यार्थियों को विज्ञान को समाज से जोड़ने का संदेश
निरंजन द्विवेदी ने विद्यार्थियों से फॉरेंसिक विज्ञान को केवल अकादमिक विषय के रूप में देखने के बजाय इसे समाज, कानून, उपभोक्ता अधिकार और वैज्ञानिक जागरूकता से जोड़कर समझने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि किसी भी दावे को बिना जांचे स्वीकार करने के बजाय उसके पीछे मौजूद तथ्यों और प्रमाणों को समझना आवश्यक है.

कार्यक्रम में फॉरेंसिक विज्ञान की विभिन्न संभावनाओं और इस क्षेत्र में विद्यार्थियों की भूमिका पर भी चर्चा हुई. आयोजन का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, साक्ष्य आधारित सोच और सामाजिक जागरूकता विकसित करना बताया गया.

संस्थान की गतिविधियों और आयोजन की रूपरेखा रखी
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कैंपस डायरेक्टर संजय शर्मा ने संस्थान की विभिन्न गतिविधियों और विद्यार्थियों के हित में संचालित कार्यक्रमों की जानकारी दी. विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गुप्ता ने फोरेंसाइट-2026 की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए 21 से 25 सितंबर तक होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में बताया.

कार्यक्रम के आरंभ में ज्ञान, विवेक और वैज्ञानिक सोच के प्रतीक के रूप में दीप प्रज्ज्वलित किया गया. बीएससी सेमेस्टर सातवीं की छात्रा अदर्शिनी सुरेश ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की. विशिष्ट अतिथि निरंजन द्विवेदी का स्वागत कर उन्हें स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया.

प्रयोगशालाओं में विद्यार्थियों को मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण
फोरेंसाइट-2026 के पहले दिन विद्यार्थियों के लिए सत्रों के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी आयोजित किया गया. विभिन्न फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में विषय विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक जांच की प्रक्रियाओं को समझा.

फिजिक्स लैब-03 में सुश्री पाटी के मार्गदर्शन में क्राइम सीन मैनेजमेंट और ट्रेस एविडेंस पर प्रशिक्षण दिया गया. फिंगरप्रिंट लैब-02 में आरोमल वेणुगोपाल ने फिंगरप्रिंट और क्वेश्चन्ड डॉक्यूमेंट्स से संबंधित जानकारी दी.

इसी क्रम में बायोलॉजी लैब-01 में डॉ. हरजीत सिंह ने फॉरेंसिक बायोलॉजी और डीएनए फिंगरप्रिंटिंग पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया. केमिस्ट्री लैब-04 में डॉ. नीलमणि श्रीवास्तव ने फॉरेंसिक केमिस्ट्री और टॉक्सिकोलॉजी से संबंधित प्रशिक्षण दिया.

इन प्रशिक्षण सत्रों का उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी देने के बजाय साक्ष्य की पहचान, वैज्ञानिक अवलोकन और विश्लेषण की व्यावहारिक प्रक्रिया से परिचित कराना रहा.

अपराध स्थल के वैज्ञानिक विश्लेषण का प्रदर्शन
इसके बाद क्राइम सीन लैब-104 में क्राइम सीन डेमोंस्ट्रेशन आयोजित किया गया. इसमें विद्यार्थियों को अपराध स्थल को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखने, वहां मौजूद सुरागों की पहचान करने और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने की प्रक्रिया समझाई गई.

कार्यक्रम में बताया गया कि फॉरेंसिक विज्ञान में अपराध स्थल को एक ‘साइलेंट विटनेस’ के रूप में देखा जाता है. अपराध स्थल पर वस्तुओं की स्थिति, पैटर्न, ट्रेस और अन्य सूक्ष्म संकेत जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण हो सकते हैं.

व्यावहारिक गतिविधि के माध्यम से विद्यार्थियों की निरीक्षण क्षमता, साक्ष्य पहचानने की क्षमता और जांच संबंधी तार्किक सोच को विकसित करने पर जोर दिया गया.

क्विज में परखी वैज्ञानिक और तार्किक क्षमता
फोरेंसिक साइंस से संबंधित ज्ञान को गतिविधि के माध्यम से परखने के लिए सेमिनार हॉल में क्विज प्रतियोगिता भी आयोजित की गई. इसमें फॉरेंसिक विज्ञान की अवधारणाओं, साक्ष्यों की व्याख्या, जांच प्रक्रिया और वैज्ञानिक सोच से जुड़े प्रश्न शामिल किए गए.

इसके अलावा विद्यार्थियों के लिए फॉरेंसिक ओपन माइक का आयोजन हुआ. इसमें विद्यार्थियों ने फॉरेंसिक विज्ञान से जुड़े अपने विचार, प्रश्न और अनुभव साझा किए. इससे विद्यार्थियों को विषय से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखने का अवसर मिला.

पुरस्कार के साथ पहले दिन का समापन
पहले दिन की गतिविधियों के समापन पर आयोजन में सक्रिय भागीदारी करने वाले विद्यार्थियों की सराहना की गई. क्विज प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार दिए गए. आयोजन में सहयोग करने वाले फैकल्टी सदस्यों और छात्र समन्वयकों के योगदान को भी सराहा गया.

प्रथम दिवस के फैकल्टी समन्वयक डॉ. कल्पेश सोलंकी और स्नेह पुरोहित रहे. विभिन्न सत्रों के संचालन में सुश्री पाटी, आरोमल वेणुगोपाल, डॉ. हरजीत सिंह और डॉ. नीलमणि श्रीवास्तव सहित अन्य फैकल्टी सदस्यों की भूमिका रही. छात्र समन्वयकों ने भी आयोजन की व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में सहयोग किया.

फॉरेंसाइट-2026 ने दिया साक्ष्य आधारित सोच का संदेश
फोरेंसाइट-2026 का पहला दिन विद्यार्थियों के लिए फॉरेंसिक विज्ञान को देखने, समझने और व्यावहारिक रूप से सीखने का अवसर लेकर आया. आयोजन में अपराध अनुसंधान से आगे बढ़कर फॉरेंसिक विज्ञान को वैज्ञानिक प्रमाण, सत्य तक पहुंचने की प्रक्रिया और जिम्मेदार निर्णय लेने से जोड़कर प्रस्तुत किया गया.

पांच दिवसीय आयोजन के पहले दिन का कार्यक्रम सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक चला. प्रशिक्षण, क्राइम सीन डेमोंस्ट्रेशन, क्विज और ओपन माइक जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया. कार्यक्रम का संचालन और आभार प्रदर्शन सुश्री इशिका झा ने किया.

फोरेंसाइट-2026 का पहला दिन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि फॉरेंसिक विज्ञान केवल प्रयोगशाला या अपराध जांच तक सीमित विषय नहीं है. वैज्ञानिक प्रमाणों की पहचान, उनका निष्पक्ष परीक्षण और तथ्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना इसकी मूल प्रक्रिया है. ಇದೇ दृष्टिकोण विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच और साक्ष्य आधारित विश्लेषण की दिशा में आगे बढ़ाने का आधार बना.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-