खरगोन. 33 किसानों के नाम पर पॉलिहाउस निर्माण के लिए बैंक से स्वीकृत ऋण में अनियमितताओं के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने चार निजी फर्मों, उनके भागीदारों और बैंक अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है. जांच में प्रथम दृष्टया सामने आया है कि कई मामलों में पॉलिहाउस का निर्माण किए बिना ही पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए गए और उनके आधार पर बैंक से ऋण राशि का भुगतान कराया गया. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार 33 अलग-अलग किसानों के नाम पर राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत पॉलिहाउस निर्माण के लिए बैंक ऑफ बड़ौदा, खरगोन में कुल 7 करोड़ 80 लाख 85 हजार रुपये के 33 ऋण प्रकरण प्रस्तुत किए गए थे.
किसानों को लाभ का प्रलोभन देकर उनके नाम पर लिए गए ऋण
जांच के अनुसार अलग-अलग किसानों को लाभ का प्रलोभन देकर उनके नाम से पॉलिहाउस निर्माण के लिए ऋण प्रकरण तैयार किए गए. बैंक की ओर से निजी फर्मों और उनके भागीदारों को पॉलिहाउस निर्माण किए बिना ही स्वीकृत ऋण का भुगतान किए जाने का आरोप है.
मामले में जांच एजेंसी ने पाया कि पॉलिहाउस निर्माण से संबंधित पूर्णता प्रमाण पत्रों में भी गंभीर अनियमितताएं थीं. जांच में सभी पूर्णता प्रमाण पत्र प्रथम दृष्टया फर्जी पाए जाने की बात प्रेस विज्ञप्ति में कही गई है.
पांच पॉलिहाउस का काम मिला था दो का निर्माण नहीं हुआ
जांच में एवीआई एग्रीकल्चर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड से पांच पॉलिहाउस का निर्माण कराया जाना था. आरोप है कि संबंधित फर्म ने दो पॉलिहाउस का निर्माण नहीं किया, इसके बावजूद उनके फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किए गए और कुल पांच ऋण प्रकरणों में बैंक से भुगतान प्राप्त किया गया.
इसी तरह मेसर्स किसान एग्रो को 20 पॉलिहाउस बनाने की जिम्मेदारी दी गई थी. जांच के मुताबिक बिना किसी निर्माण के सभी 20 पॉलिहाउस के पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार कर दिए गए और डीओ बैंकिंग चैनल के माध्यम से भुगतान प्राप्त कर लिया गया.
आठ पॉलिहाउस के लिए भी निर्माण के बिना भुगतान
जांच के दायरे में आई एक अन्य फर्म मेसर्स सिकां टेक्नो प्राइवेट लिमिटेड, दांदौरा को आठ पॉलिहाउस निर्माण के लिए एजेंसी के रूप में लिया गया था. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार इस फर्म ने भी पॉलिहाउस का निर्माण किए बिना पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार किया और उसके आधार पर बैंक से भुगतान प्राप्त किया.
जांच में ऋण भुगतान और पूर्णता प्रमाण पत्र की तारीखों को लेकर भी कई सवाल सामने आए हैं. कुल 33 ऋण प्रकरणों में तीन मामलों में जिस तारीख को ऋण की राशि का भुगतान किया गया, उसी तारीख का पूर्णता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया. 12 ऋण प्रकरणों में ऋण भुगतान की तारीख से पहले का पूर्णता प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया, जबकि 16 मामलों में ऋण स्वीकृति की तारीख से भी पहले पूर्णता प्रमाण पत्र तैयार पाया गया.
जमीन के दस्तावेज लेकर किसानों के नाम पर ऋण
जांच में यह भी सामने आने की बात कही गई है कि 33 किसानों को विश्वास में लेकर उनसे जमीन के दस्तावेज प्राप्त किए गए. इसके बाद किसानों के नाम पर ऋण स्वीकृत कराया गया और राशि निजी फर्मों को भुगतान की गई. जांच एजेंसी ने प्रथम दृष्टया इसे किसानों के साथ धोखाधड़ी बताया है.
इस पूरे मामले में बैंक की भूमिका भी जांच के केंद्र में है. प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार निजी फर्मों, उनके भागीदारों और संबंधित बैंक अधिकारियों के बीच मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका उपयोग बैंक से भुगतान प्राप्त करने के लिए किए जाने की बात प्रथम दृष्टया सामने आई है.
बैंक को 7.80 करोड़ रुपये की आर्थिक क्षति का आरोप
जांच के अनुसार फर्जी पूर्णता प्रमाण पत्रों और पॉलिहाउस निर्माण से संबंधित दस्तावेजों के आधार पर बैंक से कुल 7 करोड़ 80 लाख 85 हजार रुपये की राशि का भुगतान कराया गया. जांच एजेंसी के मुताबिक इससे बैंक को इतनी राशि की आर्थिक क्षति पहुंचने की बात प्रथम दृष्टया प्रमाणित हुई है.
मामले में एक अन्य ऋण प्रकरण में भी बैंक को नुकसान पहुंचाने का आरोप सामने आया है. जांच के अनुसार नारायण सिंह की भूमि बैंक ऑफ बड़ौदा की खरगोन शाखा में पहले से बंधक थी. इसके बावजूद बैंक की सहमति और अनापत्ति प्रमाण पत्र लिए बिना उसी संपत्ति को पुनः बंधक रखकर क्रेडिट ऋण स्वीकृत किए जाने की बात जांच में सामने आई है.
पहले से बंधक जमीन पर फिर ऋण लेने का आरोप
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार नारायण सिंह की भूमि ग्राम भीलगांव, तहसील कसरावद, खरगोन से संबंधित थी और खसरा नंबर 494/2/3 की एक हेक्टेयर भूमि बैंक में बंधक थी. इसके बावजूद तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक के स्तर से 7 दिसंबर 2015 को 1 करोड़ 90 लाख रुपये का क्रेडिट ऋण स्वीकृत किया गया. जांच में इस प्रक्रिया को भी बैंक को आर्थिक नुकसान पहुंचाने वाली कार्रवाई बताया गया है.
जांच के मुताबिक बंधक संपत्ति को बिना बैंक की सहमति के दूसरी तरह से प्रस्तुत कर पुनः उसी बैंक में बंधक रखने की प्रक्रिया के माध्यम से बैंक को 1 करोड़ 90 लाख रुपये की अतिरिक्त आर्थिक क्षति पहुंचाई गई. इस राशि को भी मामले में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं में शामिल किया गया है.
चार निजी फर्मों के संचालक और बैंक अधिकारी आरोपी
प्रेस विज्ञप्ति में मामले में मेसर्स कार्दो फार्म्स एवं उसके भागीदार, सिकां टेक्नो दंडिया प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक, मेसर्स किसान एग्रो के भागीदार तथा एवीआई एग्रीकल्चर सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के निदेशकों के नाम आरोपी के रूप में दिए गए हैं.
इसके अलावा बैंक ऑफ बड़ौदा की खरगोन शाखा से जुड़े तत्कालीन मुख्य शाखा प्रबंधक, ऋण प्रबंधक और बैंक अधिकारियों के नाम भी आरोपी सूची में शामिल हैं. प्रेस विज्ञप्ति में बैंक अधिकारियों तथा पॉलिहाउस निर्माण से जुड़ी फर्मों के बीच मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने और उनका इस्तेमाल कर बैंक से राशि प्राप्त करने का आरोप लगाया गया है.
कुल नुकसान 9.70 करोड़ रुपये से अधिक
जांच के अनुसार 7 करोड़ 80 लाख 85 हजार रुपये के पॉलिहाउस ऋण प्रकरणों के अलावा 1 करोड़ 90 लाख रुपये की राशि वाले पुनः बंधक ऋण प्रकरण को भी शामिल किया गया है. प्रेस विज्ञप्ति में दोनों को मिलाकर बैंक ऑफ बड़ौदा को कुल 9 करोड़ 70 लाख 85 हजार रुपये की आर्थिक हानि पहुंचाए जाने की बात कही गई है.
मामले की जांच में फिलहाल दस्तावेजों, ऋण स्वीकृति, भुगतान, पॉलिहाउस निर्माण और पूर्णता प्रमाण पत्रों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण आधार बनी हुई है. ईओडब्ल्यू की प्राथमिकी के बाद अब आरोपों से जुड़े दस्तावेज और संबंधित पक्षों की भूमिका जांच का विषय होगी. प्रेस विज्ञप्ति में जिन आरोपों का उल्लेख किया गया है, वे जांच में प्रथम दृष्टया सामने आए तथ्यों के आधार पर हैं; अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया में होगा.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

