जबलपुर में 1.27 करोड़ के गबन में कटोरी की सरपंच को हटाया, पति के नाम से बनाए बिलों से 2.26 करोड़ निकाले, सचिव भी सस्पेंड

जबलपुर में 1.27 करोड़ के गबन में कटोरी की सरपंच को हटाया, पति के नाम से बनाए बिलों से 2.26 करोड़ निकाले, सचिव भी सस्पेंड

प्रेषित समय :18:38:00 PM / Thu, Sep 24th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. जबलपुर की शाहपुरा जनपद की ग्राम पंचायत कटोरी में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी राशि के गबन का सनसनीखेज मामला सामने आया है. मामले की जांच में पंचायत द्वारा काम कराए बिना लाखों रुपए निकालने और फर्जी बिलों के जरिए राशि आहरित करने की पुष्टि हुई.

कार्रवाई करते हुए जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत ने सरपंच आरती लोधी को पद से हटा दिया है. इस मामले में सचिव को भी तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया गया है. यह कार्रवाई मप्र पंचायत राज अधिनियम 1993 की धारा 40 के तहत की गई है. जांच रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2025-26 के बीच ग्राम पंचायत ने करीब 2.26 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि निकाली. अधिकारियों ने मौके पर जाकर निर्माण कार्यों की जांच की तो सिर्फ 98.94 लाख रुपए का काम ही मिला.

कई कार्य अधूरे पाए गए, जबकि उनकी राशि पहले ही निकाली जा चुकी थी. ग्राम जमुनिया में पीएम सड़क से अमृत सरोवर की ओर बनने वाली सीसी सड़क के लिए 14.99 लाख रुपए की पूरी राशि निकाल ली गई थी. जांच में मौके पर इस सड़क का कोई काम नहीं मिला. अधिकारियों ने पूरी राशि को गबन मानते हुए इसकी वसूली की कार्रवाई करने की बात कही है. मामले में सरपंच ने अपने जवाब में दावा किया कि पंचायत के सभी काम पूरे हो चुके हैं. इसके बाद जिला स्तर पर दूसरी टीम बनाकर दोबारा जांच कराई गई. इस जांच में भी कई निर्माण कार्य अधूरे मिले और यह सामने आया कि उनकी राशि पहले ही निकाल ली गई थी.

सरपंच ने अपने और पति के नाम से लगाए बिल-

जांच रिपोर्ट में सामान खरीदी के नाम पर भी अनियमितता सामने आई है. रिपोर्ट के अनुसार पंजीकृत दुकानदारों और वेंडरों को भुगतान करने के बजाय सरपंच ने अपने नाम, पति के नाम और बिना त्रस्ञ्ज नंबर वाले ट्रेडर्स के बिल लगाकर पंचायत के खाते से राशि निकाली. जांच में इसे भंडार क्रय नियमों का उल्लंघन मानते हुए सरकारी धन के उपयोग में गंभीर अनियमितता माना गया है.

सरपंच अपने बचाव में ठोस सबूत नहीं पेश कर पाई-

सुनवाई के दौरान सरपंच को अपना पक्ष रखने और सफाई देने का मौका दिया गया. अधिकारियों के अनुसार वे अपने बचाव में ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सकीं. इसके बाद जिला पंचायत ने पद के दुरुपयोग और बिना काम कराए राशि निकालने के मामले में धारा 40 के तहत पद से पृथक करने की कार्रवाई की.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-