सुप्रीम कोर्ट में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर, एसआईआर में गड़बड़ी पर एसआईटी जांच की मांग

सुप्रीम कोर्ट में सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ याचिका दायर, एसआईआर में गड़बड़ी पर एसआईटी जांच की मांग

प्रेषित समय :16:10:44 PM / Fri, Sep 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

नई दिल्ली. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है. स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) में गड़बड़ी को लेकर उठे मुद्दों को लेकर ये याचिका दायर की गई है.

सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ यह याचिका अंग्रेजी अखबार द इंडियन एक्सप्रेस की उस रिपोर्ट के कुछ दिनों बाद दायर की गई है जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने एसआईआर से जुड़े फैसलों और आदेशों पर कम से कम 14 मौकों पर आपत्ति जताई थी. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट को आधार बताते हुए बाकी दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की गई है.

एसआईटी जांच की मांग

संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर की है. याचिकाकर्ता की मांग है कि इस बात की एसआईटी से जांच कराई जाए कि वोटर लिस्ट से 13 करोड़ वोटरों के नाम कैसे हटाए गए.

रिपोर्ट में चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए फैसलों पर सवाल खड़े किए गए. इन फैसलों में से फॉर्म 6 में बदलाव और चुनावी रोल डेटा का प्रबंधन शामिल था. रिपोर्ट में कहा गया है कि ये आपत्तियां उन फैसलों से जुड़ी थीं जो उनकी जानकारी के बिना या उनकी सिफारिशों के खिलाफ लिए गए थे.

याचिका में इस रिपोर्ट के आधार पर आरपी एक्ट के तहत ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा चलाने की मांग की गई है. याचिकाकर्ता ने विशेष रूप से सक्षम अधिकारी को निर्देश देने की मांग की है कि वे रिप्रेजेंटेशन ऑफ द पीपल एक्ट, 1950 की धारा 32 के तहत शिकायतें दर्ज करें और मुकदमा शुरू करें.

याचिका में ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (डीजी) सीमा खन्ना और आधिकारिक कर्तव्यों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार पाए गए अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की गई है. याचिका के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मई 2026 में फॉर्म 6 में बदलाव पर आपत्ति जताई थी. जोशी ने कहा था कि 'मतदाता पंजीकरण नियम, 1960' में संबंधित संशोधन किए बिना कानूनी फॉर्म में बदलाव नहीं किया जा सकता. बाद में संधू ने भी इस बात का समर्थन किया.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-