सेना की जमीन का अड़ंगा हटते ही जबलपुर में दो बड़ी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

सेना की जमीन का अड़ंगा हटते ही जबलपुर में दो बड़ी परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार

प्रेषित समय :19:26:28 PM / Fri, Sep 25th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. शहर की यातायात व्यवस्था और एयरपोर्ट तक पहुंच को बेहतर बनाने वाली दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को अब रक्षा मंत्रालय की अनुमति का इंतजार है. डुमना एयरपोर्ट रोड के निर्माण एवं उन्नयन तथा एम्पायर टॉकीज चौक से बिलहरी तक प्रस्तावित फ्लाईओवर के रास्ते में सेना की भूमि आने के कारण इन परियोजनाओं के लिए रक्षा मंत्रालय की मंजूरी जरूरी है. अब सेना की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी सामने आने के बाद दोनों कार्यों को आगे बढ़ने की उम्मीद बनी है.

सेना की जमीन बनी परियोजनाओं की अहम कड़ी
जबलपुर में तेजी से बढ़ते यातायात के बीच डुमना एयरपोर्ट रोड और एम्पायर-बिलहरी फ्लाईओवर को महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना परियोजनाओं के रूप में देखा जा रहा है. दोनों योजनाओं के मार्ग का कुछ हिस्सा सेना की जमीन से संबंधित है. यही वजह है कि सामान्य निर्माण प्रक्रिया के साथ रक्षा मंत्रालय की अनुमति भी आवश्यक हो गई है.

मध्य भारत एरिया के जनरल ऑफिसर कमांडिंग लेफ्टिनेंट जनरल एचएस वन्द्रा और लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह के बीच हुई मुलाकात में इन दोनों परियोजनाओं पर विस्तार से चर्चा हुई. सेना की ओर से बताया गया कि आवश्यक प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय को भेजा जा चुका है.

अनुमति मिली तो आगे बढ़ेगी निर्माण प्रक्रिया
रक्षा मंत्रालय से अनुमति मिलने के बाद संबंधित विभाग परियोजनाओं से जुड़ी अगली औपचारिकताएं तेजी से पूरी कर सकेंगे. डुमना एयरपोर्ट रोड के उन्नयन का सीधा संबंध शहर से एयरपोर्ट तक बेहतर संपर्क से है, जबकि एम्पायर टॉकीज चौक से बिलहरी तक प्रस्तावित फ्लाईओवर का उद्देश्य प्रमुख मार्ग पर यातायात के दबाव को कम करना है.

ऐसे में दोनों परियोजनाओं के लिए भूमि संबंधी अनुमति को महत्वपूर्ण प्रशासनिक चरण माना जा रहा है. सेना की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद अब निगाह रक्षा मंत्रालय के निर्णय पर है.

एयरपोर्ट रोड से बढ़ेगी कनेक्टिविटी
डुमना एयरपोर्ट जबलपुर की हवाई कनेक्टिविटी का प्रमुख केंद्र है. एयरपोर्ट रोड के निर्माण और उन्नयन से शहर के विभिन्न हिस्सों से यहां पहुंचने वाले यात्रियों को बेहतर मार्ग उपलब्ध कराने की योजना है. सड़क के विकास से यातायात को व्यवस्थित करने के साथ भविष्य में बढ़ने वाले आवागमन को देखते हुए भी आधारभूत सुविधा मजबूत हो सकती है.

परियोजना में सेना की जमीन से जुड़े हिस्से के कारण अनुमति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो गई है. मंजूरी मिलने के बाद सड़क निर्माण से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ होने की उम्मीद है.

एम्पायर-बिलहरी फ्लाईओवर से यातायात का दबाव घटाने की योजना
दूसरी ओर एम्पायर टॉकीज चौक से बिलहरी तक प्रस्तावित फ्लाईओवर को शहर के व्यस्त मार्गों पर यातायात व्यवस्था सुधारने की योजना के रूप में देखा जा रहा है. शहर के इस हिस्से में बढ़ते वाहनों के दबाव के बीच फ्लाईओवर बनने से प्रमुख मार्ग पर यातायात के संचालन में बदलाव की संभावना है.

हालांकि परियोजना के वास्तविक प्रभाव का आकलन निर्माण पूरा होने और यातायात व्यवस्था लागू होने के बाद ही किया जा सकेगा. फिलहाल इसका पहला महत्वपूर्ण चरण भूमि संबंधी अनुमति हासिल करना है.

सेना की जमीन पर बसे लोगों का मुद्दा भी उठा
मुलाकात में सेना की जमीन से जुड़े उन मामलों पर भी चर्चा हुई, जहां लोग लंबे समय से मकान बनाकर रह रहे हैं. लोक निर्माण मंत्री ने ऐसे मामलों में मानवीय दृष्टिकोण से राहत की संभावनाओं पर विचार करने का आग्रह किया.

सेना की ओर से ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ विचार किए जाने की बात कही गई. इससे स्पष्ट है कि बैठक का दायरा केवल सड़क और फ्लाईओवर परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सेना की भूमि से जुड़े नागरिक मामलों पर भी चर्चा हुई.

अब रक्षा मंत्रालय के फैसले पर नजर
डुमना एयरपोर्ट रोड और एम्पायर-बिलहरी फ्लाईओवर दोनों ही परियोजनाओं के लिए सेना की भूमि से संबंधित अनुमति एक महत्वपूर्ण कड़ी है. प्रस्ताव रक्षा मंत्रालय तक पहुंचने के बाद अब निर्णय की प्रतीक्षा है.

यदि अनुमति शीघ्र मिलती है तो परियोजनाओं से जुड़ी निर्माण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है. फिलहाल जबलपुर के नागरिकों और संबंधित विभागों की नजर रक्षा मंत्रालय से मिलने वाली स्वीकृति पर टिकी है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-