जबलपुर. विश्व प्रसिद्ध भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट में देश का पहला जियो पार्क, विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल म्यूजियम और पर्यटक सुविधाएं विकसित करने की 87 करोड़ रुपये की परियोजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है. परियोजना स्वदेश दर्शन 2.0 योजना के तहत मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के माध्यम से लगभग 12 हेक्टेयर क्षेत्र में विकसित की जाएगी.
यह स्वीकृति लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह की करीब ढाई वर्षों से जारी सतत पहल का परिणाम है. श्री सिंह ने परियोजना की परिकल्पना को ठोस स्वरूप देने, प्रस्ताव तैयार कराने, संबंधित विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने और केंद्र सरकार से स्वीकृति दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए. परियोजना की मंजूरी से जबलपुर के पर्यटन विकास को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार तथा व्यापार के अवसर बढ़ेंगे.
लोक निर्माण मंत्री श्री राकेश सिंह ने 18 जनवरी 2024 को मंत्रालय में जियो पार्क की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट और डिजाइन का प्रस्तुतीकरण देखा था. उन्होंने परियोजना के प्रत्येक निर्माण को प्राकृतिक परिवेश के अनुरूप रखने, संग्रहालय को आकर्षक और शिक्षाप्रद बनाने तथा लम्हेटा फॉर्मेशन, रानी दुर्गावती और जबलपुर की भू-संस्कृति को इसमें प्रमुखता से शामिल करने के निर्देश दिए थे. उन्होंने प्रकृति अनुभव आधारित पर्यटन, नेचर स्टे और स्थानीय समुदाय की भागीदारी को भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाने पर जोर दिया था. इसके बाद श्री सिंह परियोजना की प्रगति और स्वीकृति की प्रक्रिया का लगातार अनुसरण करते रहे. उनके प्रयासों से तैयार प्रस्ताव को केंद्र सरकार को भेजा गया और अब इसे स्वीकृति मिली है.
जबलपुर से चार बार सांसद रह चुके श्री सिंह ने इस परियोजना को शहर की प्राकृतिक विरासत, विज्ञान शिक्षा और पर्यटन अर्थव्यवस्था से जुड़ी दीर्घकालीन जरूरत के रूप में आगे बढ़ाया.
मंत्री राकेश सिंह ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र शेखावत जी एवं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव जी का जताया आभार.. उन्होंने कहा कि भेड़ाघाट जबलपुर के साथ पूरे मध्यप्रदेश की पहचान है. यहां की संगमरमर की चट्टानें, धुआंधार जलप्रपात और नर्मदा नदी देश-दुनिया के पर्यटकों को आकर्षित करती हैं. जियोलॉजिकल पार्क और म्यूजियम इस पहचान को नया विस्तार देगा.
श्री सिंह ने कहा, मेरा प्रयास रहा है कि जबलपुर की प्राकृतिक और ऐतिहासिक विरासत को आधुनिक पर्यटन सुविधाओं के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत किया जाए. इस परियोजना की स्वीकृति उसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं. जबलपुर के नागरिकों, भेड़ाघाट के निवासियों और पूरे क्षेत्रवासियों को इस उपलब्धि के लिए हार्दिक शुभकामनाएं.
परियोजना में लगभग 5,745 वर्गमीटर निर्मित क्षेत्र प्रस्तावित है, जबकि 90 प्रतिशत या उससे अधिक क्षेत्र को हरित रखने का लक्ष्य है. प्राकृतिक भू-दृश्य और मौजूदा वृक्षों को सुरक्षित रखते हुए संरचनाएं विकसित की जाएंगी. इससे यहां आने वाले पर्यटक प्रकृति के साथ जुड़ाव महसूस कर सकेंगे. स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प, खान-पान और पर्यटन सेवाओं में स्थानीय समुदाय की भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी विशेष ध्यान रहेगा.
परियोजना के अंतर्गत विश्वस्तरीय जियोलॉजिकल म्यूजियम एवं इंटरप्रिटेशन सेंटर, छह विषयगत गैलरियां, 130 से अधिक प्रदर्श, 3डी मॉडलिंग, इंटरैक्टिव टच टेबल, डिजिटल पैनल, इमर्सिव थिएटर, टाइटेनोसॉर स्क्वायर, डायनासोर पार्क, फॉसिल गार्डन, जियोलॉजिकल मेज, रॉक गार्डन, ट्री-टॉप वॉकवे, ग्लास फ्लोर, नेचर वॉक और व्यूइंग डेक विकसित किए जाएंगे.
परिसर में रेस्टोरेंट, फूड कोर्ट, म्यूजियम शॉप, स्थानीय उत्पादों के लिए रिटेल क्षेत्र, ग्लैम्पिंग टेंट आधारित इको-रिसॉर्ट, पार्किंग और टिकटिंग सहित आधुनिक पर्यटक सुविधाएं भी रहेंगी. संग्रहालय में बच्चों, विद्यार्थियों और भू-विज्ञान के शोधार्थियों के लिए अलग-अलग अनुभव आधारित सामग्री उपलब्ध होगी.
लमेटा फॉर्मेशन इस क्षेत्र की विशिष्ट भू-वैज्ञानिक पहचान है. इसी क्षेत्र में भारत का पहला डायनासोर जीवाश्म टाइटेनोसॉरस इंडिकस मिला था. संग्रहालय में पृथ्वी की उत्पत्ति से लेकर मध्यप्रदेश और नर्मदा घाटी के करोड़ों वर्ष पुराने भू-वैज्ञानिक इतिहास को सरल, रोचक और वैज्ञानिक तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा. मध्यप्रदेश के 13 भौगोलिक क्षेत्रों की भू-सांस्कृतिक विशेषताओं को भी आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा. भेड़ाघाट-लम्हेटाघाट के लिए प्राकृतिक श्रेणी में यूनेस्को विश्व धरोहर की संभावित सूची हेतु नामांकन डोजियर प्रस्तुत किए जाने और भविष्य में यूनेस्को ग्लोबल जियोपार्क की संभावनाओं का भी परियोजना प्रस्ताव में उल्लेख है. इस जियोलॉजिकल पार्क के बनने से जबलपुर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नेटवर्क से बेहतर रूप से जुड़ेगा.
भेड़ाघाट पहले से मार्बल रॉक्स, धुआंधार जलप्रपात, नर्मदा नदी और चौसठ योगिनी मंदिर के कारण देश के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है. जियो पार्क के निर्माण से प्राकृतिक पर्यटन के साथ ज्ञान, विज्ञान, शिक्षा और अनुभव आधारित पर्यटन भी जुड़ जाएगा. 87 करोड़ रुपये की इस परियोजना की क्रियान्वयन एजेंसी मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड होगी. परियोजना को 18 माह में, सितंबर 2026 से फरवरी 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. परियोजना के लिए पर्यटन विभाग के स्वामित्व में लगभग 12 हेक्टेयर भूमि उपलब्ध है.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

