लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में भड़की हिंसा, पुलिस की गाड़ियां जलाईं धमाकों से दहला कैंपस

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में भड़की हिंसा, पुलिस की गाड़ियां जलाईं धमाकों से दहला कैंपस

प्रेषित समय :22:51:46 PM / Sun, Sep 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

फगवाड़ा. पंजाब की लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में छात्र विरोध प्रदर्शन ने रविवार को बेहद तनावपूर्ण रूप ले लिया. कथित दुष्कर्म और छात्र की आत्महत्या से जुड़ी सोशल मीडिया पर प्रसारित सूचनाओं के बाद शुरू हुआ विरोध अब हिंसक झड़प में बदल गया. कैंपस के भीतर धमाके जैसी आवाजें सुनाई देने, पुलिसकर्मियों के घायल होने और तीन पुलिस एसयूवी को आग के हवाले किए जाने की खबरों ने स्थिति को गंभीर बना दिया.

मामले की शुरुआत में पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाओं की पुष्टि नहीं की थी. बाद में जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने कहा कि विश्वविद्यालय के जी-3 छात्रावास में रहने वाली एक छात्रा के साथ कथित दुष्कर्म की घटना की प्रारंभिक जांच में पुष्टि हुई है और प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है. पुलिस ने यह भी कहा कि करीब दो सप्ताह पहले परिसर में एक तेलंगाना निवासी छात्र की आत्महत्या के मामले की जांच भी छात्रों की मांग पर आगे बढ़ाई जाएगी.

सोशल मीडिया की खबर से शुरू हुआ छात्र विरोध
शनिवार देर रात विश्वविद्यालय परिसर में कथित दुष्कर्म और आत्महत्या की खबरें सोशल मीडिया के जरिए तेजी से फैलने लगीं. छात्रावास से शुरू हुआ विरोध धीरे-धीरे दूसरे हिस्सों तक पहुंच गया. छात्रों की मांग थी कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि अपराध हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए.

शुरुआती घंटों में पुलिस ने कहा था कि ऐसी घटना को लेकर उसे कोई औपचारिक शिकायत नहीं मिली है. इसी बीच छात्रों के बीच अलग-अलग दावे प्रसारित होते रहे. भारतीय एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने परिसर में तोड़फोड़ की, कुछ स्थानों पर आग लगाई और जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग को भी बाधित किया.

स्थिति तब और बिगड़ी जब बड़ी संख्या में छात्र विश्वविद्यालय के मुख्य प्रवेश क्षेत्र की ओर बढ़े.

विश्वविद्यालय ने शुरुआती दावों को बताया था अफवाह
विरोध के शुरुआती दौर में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सोशल मीडिया पर प्रसारित दुष्कर्म और आत्महत्या से संबंधित दावों को खारिज किया था. विश्वविद्यालय की ओर से कहा गया कि कुछ तत्व कथित रूप से गलत और भ्रामक सूचनाएं फैला रहे हैं, जिससे छात्रों में भ्रम पैदा हो रहा है.

विश्वविद्यालय ने छात्रों, अभिभावकों और आम लोगों से अपील की थी कि वे अपुष्ट सूचनाओं को आगे न बढ़ाएं और आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें.

हालांकि बाद की पुलिस कार्रवाई और डीआईजी के बयान ने मामले को नया मोड़ दिया. पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में जी-3 छात्रावास में रहने वाली छात्रा से संबंधित कथित दुष्कर्म की घटना के बारे में जानकारी सामने आई.

डीआईजी ने कहा तीन दिन पहले हुई कथित घटना
जालंधर रेंज के डीआईजी नवीन सिंगला ने रविवार को बताया कि प्रारंभिक जांच के अनुसार कथित घटना लगभग तीन दिन पहले हुई थी. संबंधित छात्रा अब अपने घर जा चुकी है.

पुलिस ने उसके बयान दर्ज किए हैं और मामले में आवश्यक धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू की गई. डीआईजी ने कहा कि जांच वैज्ञानिक तरीके से की जाएगी और मामले में उपलब्ध डिजिटल तथा तकनीकी साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया जाएगा.

इसका मतलब है कि जांच केवल मौखिक बयानों तक सीमित नहीं रहेगी. पुलिस डिजिटल रिकॉर्ड, तकनीकी जानकारी और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों की भी पड़ताल करेगी. हालांकि कथित अपराध की अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी.

आत्महत्या के दूसरे मामले ने भी बढ़ाई बेचैनी
छात्रों के विरोध का दूसरा प्रमुख मुद्दा परिसर में करीब दो सप्ताह पहले हुई एक छात्र की मौत से जुड़ा है. डीआईजी के मुताबिक, तेलंगाना से संबंधित एक छात्र की कथित आत्महत्या के मामले में पहले ही भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 174 के तहत मर्ग जांच की प्रक्रिया शुरू की गई थी.

छात्रों ने इस मामले की भी विस्तृत जांच की मांग की. पुलिस ने कहा कि छात्रों की मांग को देखते हुए इस मामले की जांच भी आगे बढ़ाई जा रही है.

इस तरह रविवार तक विरोध के केंद्र में केवल कथित दुष्कर्म का मामला नहीं रहा, बल्कि छात्र सुरक्षा, छात्रावास प्रबंधन और परिसर की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल भी सामने आ गए.

पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच बढ़ा तनाव
रविवार को स्थिति उस समय और गंभीर हो गई जब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बनी. पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की ओर से कांच की बोतलें फेंके जाने के बाद पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा. कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी सूचना सामने आई.

हिंसा के दौरान तीन पुलिस एसयूवी में आग लगाए जाने की जानकारी सामने आई है. इसके अलावा परिसर के कुछ हिस्सों में आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं भी रिपोर्ट हुईं.

कैंपस के अंदर धमाके जैसी आवाजें सुनाई देने की खबर ने तनाव और बढ़ा दिया. हालांकि उपलब्ध शुरुआती रिपोर्टों में इन आवाजों के स्रोत और प्रकृति को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई थी.

तीन जिलों से पुलिस बल बुलाया गया
स्थिति बिगड़ने के बाद कपूरथला पुलिस ने अतिरिक्त बल तैनात किया. कपूरथला के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक गौरव तूरा के अनुसार, कानून-व्यवस्था की स्थिति की सूचना मिलने के बाद जालंधर ग्रामीण, होशियारपुर और कपूरथला से पुलिस बल को मौके पर बुलाया गया.

पुलिस और प्रशासन ने राजमार्ग पर यातायात बहाल कराने के साथ-साथ विश्वविद्यालय परिसर में स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की. पुलिस ने कहा कि संपत्ति के नुकसान का आकलन करने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी.

हाईवे बंद होने से यातायात प्रभावित
छात्रों के विरोध का असर विश्वविद्यालय परिसर से बाहर भी दिखाई दिया. प्रदर्शनकारियों ने जालंधर-फगवाड़ा राष्ट्रीय राजमार्ग को बाधित कर दिया, जिससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ.

घंटों तक चले विरोध के कारण बड़ी संख्या में वाहनों को वैकल्पिक मार्गों की ओर भेजना पड़ा. बाद में पुलिस की कार्रवाई के बाद यातायात बहाल किया गया.

छात्रावास की सुरक्षा पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने लड़कों और लड़कियों के छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल भी उठाए. डीआईजी ने कहा कि छात्रों की ओर से हॉस्टल सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर अन्य शिकायतें भी सामने आई हैं.

पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन के बीच छात्रों के साथ बैठक आयोजित करने की बात भी कही गई थी. इसका उद्देश्य छात्रों की शिकायतों को सुनना और प्रशासनिक स्तर पर समाधान की दिशा तय करना था.

जांच में डिजिटल साक्ष्य की होगी अहम भूमिका
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए डिजिटल साक्ष्य जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकते हैं. सोशल मीडिया पर प्रसारित संदेशों, वीडियो और अन्य डिजिटल सामग्री ने ही विरोध को तेज करने में भूमिका निभाई. ऐसे में पुलिस के लिए यह पता लगाना भी जरूरी होगा कि कौन-सी जानकारी वास्तविक घटना पर आधारित थी और कौन-सी अपुष्ट सूचना के रूप में फैली.

डीआईजी ने भी कहा है कि पुलिस डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों को जांच में शामिल करेगी. इससे कथित घटना की समय-रेखा, संबंधित व्यक्तियों और घटनाक्रम की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है.

चिटकारा विश्वविद्यालय के बाद दूसरा बड़ा विरोध
एलपीयू में हिंसा से एक दिन पहले पंजाब के पटियाला क्षेत्र स्थित चिटकारा विश्वविद्यालय में भी सोशल मीडिया पर प्रसारित आत्महत्या के अपुष्ट दावों को लेकर छात्रों का विरोध हुआ था. वहां भी पुलिस वाहन को नुकसान पहुंचाने की घटना सामने आई थी. विश्वविद्यालय प्रशासन ने कथित आत्महत्या की खबरों को खारिज किया था.

लगातार दो निजी विश्वविद्यालयों में सोशल मीडिया से जुड़ी अपुष्ट सूचनाओं के बाद छात्रों का सड़कों पर उतरना प्रशासन और शैक्षणिक संस्थानों के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है.

अब जांच से खुलेगा पूरे घटनाक्रम का सच
एलपीयू में स्थिति को नियंत्रित करने के साथ अब सबसे बड़ी चुनौती कथित दुष्कर्म की घटना, छात्र की आत्महत्या और उससे जुड़े सभी दावों की अलग-अलग जांच करना है. एक तरफ पुलिस ने कथित दुष्कर्म की प्रारंभिक जांच के आधार पर प्राथमिकी की प्रक्रिया शुरू की है, वहीं विश्वविद्यालय ने शुरुआती दौर में सोशल मीडिया पर चल रही सूचनाओं को अफवाह बताया था.

अब पुलिस जांच यह स्पष्ट करेगी कि घटनाक्रम वास्तव में क्या था, कौन-कौन से आरोप प्रमाणित होते हैं और सोशल मीडिया पर प्रसारित किन दावों में तथ्य था.

इस बीच कैंपस में हुई आगजनी, पुलिस वाहनों को नुकसान और हिंसक प्रदर्शन की अलग जांच भी महत्वपूर्ण होगी. छात्रों की सुरक्षा, संस्थान की जवाबदेही और कानून-व्यवस्था—इन तीनों मोर्चों पर आगे की कार्रवाई अब जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-