अहमदाबाद. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को अहमदाबाद के साबरमती रेलवे स्टेशन से देश की पहली एलएनजी से चलने वाली ट्रेन को हरी झंडी दिखाई. उन्होंने साबरमती में 1,542 करोड़ रुपये से ज़्यादा की लागत वाली कई रेलवे परियोजनाओं का उद्घाटन भी किया. इसके अलावा, अमित शाह ने कई अन्य परियोजनाओं का उद्घाटन किया, जिनमें ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम, लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड और साबरमती-सरखेज रेलवे लाइन को डबलिंग करने का काम शामिल है.
इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज भारतीय रेलवे के इतिहास में एक नया अध्याय लिखा गया है. 411 करोड़ रुपये की लागत से 404 किलोमीटर के रेल सेक्शन पर कवच सिस्टम लागू करके ट्रेन की सुरक्षा को मजबूत किया जाएगा.
2027-28 तक, साबरमती शेड में 12,000 हॉर्सपावर की क्षमता वाले 300 लोकोमोटिव चालू हो जाएंगे, डबलूएजी-12 लोकोमोटिव, जिसका मेंटेनेंस साबरमती शेड (जो 700 करोड़ रुपये की लागत से बना है) में किया जाएगा, 12,000 एचपी क्षमता वाला एक बहुत शक्तिशाली इलेक्ट्रिक इंजन है. यह तेज गति से भारी और बहुत लंबी मालगाडिय़ों को खींचने में सक्षम है. 2027-28 तक ऐसे कुल 300 इंजन चालू हो जाएंगे, जिससे माल ढोने की क्षमता बढ़ेगी और रेलवे ट्रांसपोर्टेशन को नई ताकत मिलेगी.
इस मौके पर मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल समेत कई प्रमुख हस्तियां मौजूद थीं. नई परियोजनाओं के तहत, डबलूएजी-12 साबरमती लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड और साबरमती-कलोल-मोटीगाऊ और साबरमती-साणंद-जाखवाड़ा सेक्शन पर ऑटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम का उद्घाटन किया गया. साथ ही, साबरमती-सरखेज रेल लाइन को डबल करने और अहमदाबाद-पालनपुर और अहमदाबाद-समखियाली सेक्शन पर 'कवच' सिस्टम लागू करने की आधारशिला भी रखी गई. 1,542 करोड़ रुपये से अधिक की रेल परियोजनाओं की सौगात: इस कार्यक्रम के दौरान, गृह मंत्री ने गुजरात को 1,542 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न रेल विकास परियोजनाओं की सौगात दी.
डबलूएजी-12 मेंटेनेंस शेड: साबरमती में 700 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक डबलूएजी-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड को राष्ट्र को समर्पित किया गया. साथ ही लाइन डबलिंग प्रोजेक्ट: साबरमती-सरखेज रेलवे लाइन के डबलिंग प्रोजेक्ट का भी उद्घाटन किया गया.
एलएनजी ट्रेन क्या है?
एलएनजी का मतलब है लिक्विफाइड नेचुरल गैस. नेचुरल गैस को बहुत कम तापमान पर तरल अवस्था में स्टोर किया जाता है और एक खास क्रायोजेनिक सिस्टम के जरिए इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, यह डेमू सिर्फ एलएनजी पर नहीं चलेगी; बल्कि यह डीजल और एलएनजी दोनों के कॉम्बिनेशन से चलेगी. इसी वजह से इसे डुअल-फ्यूल डीईएमयू कहा जाता है.
ट्रेन में एलएनजी कहां स्टोर की जाएगी?
इस टेक्नोलॉजी की सबसे दिलचस्प बात एलएनजी स्टोरेज सिस्टम है. डीआरएम वेद प्रकाश से मिली जानकारी के अनुसार, हर डीपीसी (डीज़ल पावर कार) में लगभग 2,200 लीटर क्षमता वाला एलएनजी टैंक लगाया गया है. इसमें लगभग 950 से 1,000 किलोग्राम इस्तेमाल करने लायक एलएनजी स्टोर की जा सकती है. उन्होंने बताया कि एलएनजी का एक पूरा टैंक लगभग 222 किलोमीटर की दूरी तक रोजाना के ऑपरेशन के लिए काफी है. इस तरह, मकसद एलएनजी रिफिलिंग की जरूरत को कम करना रहा है. एलएनजी को टैंक में आम डीजल की तरह स्टोर नहीं किया जाता है; इसे लिक्विड स्टेट में बनाए रखने के लिए खास क्रायोजेनिक एलएनजी टैंक और उससे जुड़े सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है.
डीजल की जगह 40 फीसदी तक एलएनजी
इस ट्रेन की एक खास बात यह है कि डीजल का इस्तेमाल पूरी तरह से खत्म नहीं किया गया है. डीआरएम वेद प्रकाश के अनुसार, डुअल-फ्यूल सिस्टम की वजह से एलएनजी से 40 प्रतिशत तक डीज़ल को बदला जा सकता है. नतीजतन, ट्रेन के इंजन के लिए जरूरी पावर बनाने में डीजल और एलएनजी दोनों का इस्तेमाल होता है. उपलब्धता होने पर एलएनजी का इस्तेमाल बढ़ाया जा सकता है, जबकि जरूरत के हिसाब से डीजल की खपत जारी रह सकती है. इससे यह पक्का होता है कि रेलवे पूरी तरह से किसी एक फ्यूल सोर्स पर निर्भर न रहे.

