फोरेंसाइट-2026 में विद्यार्थियों ने सुलझाए अपराध के रहस्य, वैज्ञानिक जांच से साक्ष्य तक दिखी फॉरेंसिक प्रतिभा

फोरेंसाइट-2026 में विद्यार्थियों ने सुलझाए अपराध के रहस्य, वैज्ञानिक जांच से साक्ष्य तक दिखी फॉरेंसिक प्रतिभा

प्रेषित समय :21:22:07 PM / Sun, Sep 27th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

अहमदाबाद. अपराध की गुत्थी सुलझाने में केवल घटनास्थल पर मिले सुराग ही पर्याप्त नहीं होते, बल्कि उन्हें वैज्ञानिक तरीके से पहचानना, सुरक्षित रखना और सही निष्कर्ष तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. इसी सोच को विद्यार्थियों के व्यावहारिक अनुभव से जोड़ते हुए अहमदाबाद के जेतलपुर स्थित नरनारायण शास्त्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंसेज एंड साइबर सिक्योरिटी में आयोजित पांच दिवसीय ‘फोरेंसाइट-2026’ ने फॉरेंसिक विज्ञान की पढ़ाई को प्रयोग और प्रतिस्पर्धा से जोड़ा.

21 से 25 सितंबर तक चले आयोजन में विद्यार्थियों ने कृत्रिम अपराध स्थल से साक्ष्य जुटाने, संदिग्ध दस्तावेजों की जांच, फिंगरप्रिंट पहचान, जैविक नमूनों के विश्लेषण और फॉरेंसिक फोटोग्राफी जैसी गतिविधियों में अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया. कार्यक्रम की थीम ‘बियॉन्ड द क्राइम एक्सप्लोरिंग द साइंस ऑफ एविडेंस’ रखी गई थी. आयोजन का केंद्र अपराध की कहानी से ज्यादा उस वैज्ञानिक प्रक्रिया पर रहा, जिसके जरिए किसी दावे या सुराग की विश्वसनीयता परखी जाती है.

प्रयोगशाला से अपराध स्थल तक पहुंची पढ़ाई
फोरेंसाइट-2026 की खासियत यह रही कि विद्यार्थियों को फॉरेंसिक विज्ञान केवल पुस्तकों और कक्षा तक सीमित नहीं रखा गया. उद्घाटन दिवस पर विभिन्न फॉरेंसिक प्रयोगशालाओं में व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया. अपराध स्थल प्रबंधन, ट्रेस साक्ष्य, फिंगरप्रिंट, संदिग्ध दस्तावेज, फॉरेंसिक जीव विज्ञान, डीएनए फिंगरप्रिंटिंग, फॉरेंसिक रसायन विज्ञान और विष विज्ञान जैसे विषयों पर विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक जानकारी दी गई.

इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को यह समझाना था कि किसी जांच में छोटी से छोटी वस्तु भी महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती है. साक्ष्य की पहचान के साथ उसका सही तरीके से संरक्षण और वैज्ञानिक परीक्षण भी जांच की दिशा तय करता है.

भ्रामक दावों की जांच को भी जोड़ा गया
कार्यक्रम में फॉरेंसिक विज्ञान का दायरा अपराध जांच से आगे बढ़ाकर रोजमर्रा के जीवन से भी जोड़ा गया. उद्घाटन समारोह में कंज्यूमर कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय प्रमुख सचिव निरंजन द्विवेदी ने विद्यार्थियों को भ्रामक विज्ञापनों और आकर्षक दावों के प्रति सावधान रहने की जानकारी दी.

उन्होंने गुणवत्ता, प्रमाणिकता और वास्तविक तथ्यों के आधार पर किसी वस्तु या सेवा का मूल्यांकन करने पर जोर दिया. इससे विद्यार्थियों के सामने फॉरेंसिक विज्ञान का एक व्यापक पक्ष सामने आया—यानी किसी भी दावे को बिना जांचे स्वीकार करने के बजाय उपलब्ध तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर उसकी विश्वसनीयता परखना.

कृत्रिम अपराध स्थल ने परखी जांच क्षमता
आयोजन के दूसरे दिन विद्यार्थियों के सामने कृत्रिम अपराध स्थल तैयार किया गया. यहां उन्हें घटनास्थल का निरीक्षण कर संभावित सुराग खोजने, साक्ष्यों की पहचान करने और उपलब्ध संकेतों को जोड़कर घटनाक्रम समझने की चुनौती दी गई.

इस प्रतियोगिता में एमएससी प्रथम सेमेस्टर की ‘पंचायत’ टीम विजेता रही. बीएससी पांचवें एवं सातवें सेमेस्टर की ‘वेरिटास’ टीम ने दूसरा स्थान हासिल किया. प्रतियोगिता में विद्यार्थियों के अवलोकन, तार्किक विश्लेषण और टीम के रूप में काम करने की क्षमता को परखा गया.

प्रतियोगिताओं में वैज्ञानिक सोच की परीक्षा
फोरेंसिक एरीना में विद्यार्थियों को जीव विज्ञान, संदिग्ध दस्तावेज, रसायन विज्ञान और विष विज्ञान से जुड़े सवालों तथा व्यावहारिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. इसके अलावा फॉरेंसिक क्विज ने विद्यार्थियों के सैद्धांतिक ज्ञान की परीक्षा ली.

अंतिम चरण में ‘स्पॉट द एविडेंस’ प्रतियोगिता में प्रतिभागियों को सूक्ष्म निशानों और संभावित साक्ष्यों को पहचानना था. ‘मिस्ट्री थिएटर’ में बयानों और सुरागों को जोड़कर रहस्य सुलझाने की चुनौती दी गई. वहीं ‘एस्केप रूम’ में सीमित समय के भीतर टीमवर्क और समस्या समाधान क्षमता को परखा गया.

स्पॉट द एविडेंस में तेजस्विनी कुड़ादा और मिस्ट्री थिएटर में निधि पाटिल विजेता रहीं. फॉरेंसिक फोटोग्राफी में निधि रानी ने पहला स्थान हासिल किया. एस्केप रूम में शौर्य सिंह, भानु प्रकाश, यशस्वी गुप्ता, खुशी जैन और निधि पाटिल की टीम विजेता रही.

फॉरेंसिक फोटोग्राफी और लेखन ने जोड़ा रचनात्मक पक्ष
कार्यक्रम में फॉरेंसिक विज्ञान को केवल प्रयोगशाला आधारित विषय के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया. फॉरेंसिक फोटोग्राफी, क्राइम फिक्शन राइटिंग, फॉरेंसिक फ्लैश और ट्रेजर हंट जैसी गतिविधियों ने विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता को भी मंच दिया.

फॉरेंसिक फोटोग्राफी के माध्यम से घटनास्थल और साक्ष्य के दृश्य दस्तावेजीकरण की उपयोगिता सामने आई, जबकि क्राइम फिक्शन राइटिंग में विद्यार्थियों को तथ्यों और तार्किक घटनाक्रम के आधार पर कहानी विकसित करने का अवसर मिला.

वैज्ञानिक दृष्टिकोण को मिला व्यावहारिक मंच
समापन समारोह में संस्थान के प्रिंसिपल प्रो. (डॉ.) सैलेश अय्यर और कैंपस डायरेक्टर संजय शर्मा की मौजूदगी में विजेता और उपविजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया. फॉरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. गीता गुप्ता ने आयोजन की गतिविधियों और विद्यार्थियों की भागीदारी को समेटते हुए कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की.

पांच दिनों के आयोजन ने विद्यार्थियों को यह अनुभव कराया कि फॉरेंसिक विज्ञान केवल अपराध के बाद साक्ष्य खोजने का विषय नहीं है. यह तथ्यों की वैज्ञानिक पड़ताल, सूक्ष्म निरीक्षण, प्रमाणों की विश्वसनीयता और तार्किक निष्कर्ष की पूरी प्रक्रिया है. ‘फोरेंसाइट-2026’ के माध्यम से विद्यार्थियों को इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण को प्रयोग, प्रतियोगिता और टीमवर्क के जरिए समझने का अवसर मिला.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-