अनिल मिश्र
पटना. विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूएसबी) के ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्व विभाग की ओर से बोधगया स्थित विश्व प्रसिद्ध महाबोधि मंदिर परिसर में विरासत जागरूकता एवं स्वच्छता अभियान चलाया गया. कुलपति प्रो. कामेश्वर नाथ सिंह के संरक्षण में आयोजित यह कार्यक्रम राष्ट्रव्यापी ‘स्वच्छता ही सेवा-2026’ अभियान के तहत आयोजित किया गया. अभियान के दौरान विद्यार्थियों ने ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के साथ नागरिक जिम्मेदारी का संदेश दिया.
कार्यक्रम में सीयूएसबी के करीब 50 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया. विद्यार्थियों ने महाबोधि मंदिर परिसर में स्वच्छता बनाए रखने के साथ लोगों को विश्व धरोहर स्थलों की महत्ता और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक किया. विश्वविद्यालय की इस पहल में युवाओं की भागीदारी के माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित और स्वच्छ रखना केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का दायित्व भी है.
विश्व धरोहर स्थल की स्वच्छता का दिया संदेश
सीयूएसबी के जनसंपर्क पदाधिकारी मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि अभियान में लगभग 50 विद्यार्थियों ने सक्रिय भागीदारी की. विद्यार्थियों ने महाबोधि मंदिर परिसर में स्वच्छता अभियान में श्रमदान किया और विरासत संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया.
उन्होंने कहा कि महाबोधि मंदिर यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल महत्वपूर्ण स्थल है और यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक एवं श्रद्धालु पहुंचते हैं. ऐसे में परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखना महत्वपूर्ण है. अभियान के माध्यम से विद्यार्थियों ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों को भी विरासत स्थलों की स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी का संदेश दिया.
डॉ. अनिल कुमार ने बताया महाबोधि मंदिर का इतिहास
कार्यक्रम के समन्वयक और ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्व विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अनिल कुमार ने अभियान की शैक्षणिक और विषयगत रूपरेखा का नेतृत्व किया. उन्होंने विद्यार्थियों को विश्व पर्यटन दिवस की मूल भावना और उसके महत्व के बारे में जानकारी दी.
डॉ. कुमार ने महाबोधि मंदिर के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि बोधगया बौद्ध परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रखता है और महाबोधि मंदिर की विरासत प्राचीन बौद्ध परंपराओं से जुड़ी हुई है.
उन्होंने मंदिर की स्थापत्य कला की विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला. विद्यार्थियों को मंदिर की संरचना, इसके विकास और लंबे समय से चली आ रही ऐतिहासिक विरासत के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया. इस दौरान विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि किसी ऐतिहासिक स्थल का संरक्षण केवल उसकी भौतिक संरचना को सुरक्षित रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे जुड़ी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्मृतियों को भी संरक्षित रखना जरूरी है.
विद्यार्थियों ने किया श्रमदान
अभियान के दौरान विद्यार्थियों ने मंदिर परिसर में स्वच्छता गतिविधियों में हिस्सा लिया. विद्यार्थियों ने परिसर को साफ रखने और कचरा निर्धारित स्थान पर डालने के प्रति जागरूकता का संदेश दिया.
विश्व पर्यटन दिवस पर आयोजित इस पहल में विद्यार्थियों की भागीदारी को अनुभवात्मक शिक्षा से भी जोड़ा गया. कक्षा में इतिहास और पुरातत्व का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को ऐतिहासिक स्थल पर जाकर विरासत संरक्षण के व्यावहारिक पहलुओं को समझने का अवसर मिला.
विश्वविद्यालय की ओर से इस अभियान का उद्देश्य विद्यार्थियों में ऐतिहासिक धरोहरों के प्रति सम्मान के साथ सामाजिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना भी बताया गया.
स्वच्छता ही सेवा के मूल्यों पर दिया जोर
कार्यक्रम में छात्र कल्याण अधिष्ठाता (डीएसडब्ल्यू) प्रो. पवन कुमार मिश्रा और विधि विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. देव नारायण सिंह ने भी विद्यार्थियों के साथ सहभागिता की. उन्होंने अभियान में शामिल विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के उद्देश्यों और मूल्यों पर प्रकाश डाला.
उन्होंने कहा कि विश्व धरोहर स्थलों की स्वच्छता बनाए रखना पर्यटन के विकास के लिए महत्वपूर्ण है. जब पर्यटक किसी ऐतिहासिक या धार्मिक स्थल पर पहुंचते हैं तो वहां की स्वच्छता और व्यवस्थाएं उनके अनुभव को प्रभावित करती हैं. ऐसे स्थलों की साफ-सफाई बनाए रखने से न केवल पर्यटन आकर्षण बढ़ता है, बल्कि स्थानीय समुदाय में अपनी विरासत को लेकर गौरव की भावना भी मजबूत होती है.
उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं स्वच्छता के प्रति सजग रहें और अपने आसपास के लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करें.
युवाओं की भूमिका को किया रेखांकित
कार्यक्रम के दौरान ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में युवाओं की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया. विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने कहा कि देश की ऐतिहासिक धरोहरें आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं. इसलिए युवाओं को इनके संरक्षण की प्रक्रिया से जोड़ना जरूरी है.
विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि युवा केवल दर्शक के रूप में ऐतिहासिक स्थलों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके संरक्षण और स्वच्छता अभियान में सक्रिय भूमिका निभा सकते हैं. महाबोधि मंदिर जैसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थल पर आयोजित अभियान में विद्यार्थियों के शामिल होने से उन्हें विरासत संरक्षण के प्रति व्यावहारिक समझ विकसित करने का अवसर भी मिला.
विभागाध्यक्ष ने दी विद्यार्थियों को बधाई
कार्यक्रम के सफल आयोजन पर ऐतिहासिक अध्ययन एवं पुरातत्व विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सुधांशु कुमार झा ने विद्यार्थियों और संकाय समन्वयकों को बधाई दी. उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक शिक्षा को जनसेवा और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ना विभाग की महत्वपूर्ण पहल है.
उन्होंने इस अभियान को अनुभवात्मक अधिगम का प्रभावी उदाहरण बताया. उनके अनुसार, ऐतिहासिक स्थलों का अध्ययन केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए. विद्यार्थियों को वास्तविक स्थलों पर जाकर उनकी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक भूमिका को समझने का अवसर मिलना चाहिए.
विरासत और नागरिक जिम्मेदारी का संदेश
महाबोधि मंदिर परिसर में आयोजित इस अभियान ने विश्व पर्यटन दिवस को केवल पर्यटन तक सीमित न रखते हुए विरासत संरक्षण और नागरिक जिम्मेदारी से जोड़ने का प्रयास किया. विद्यार्थियों ने स्वच्छता अभियान में हिस्सा लेने के साथ ऐतिहासिक स्थल की महत्ता को समझा और लोगों को भी इसके संरक्षण के प्रति जागरूक किया.
सीयूएसबी की इस पहल में शिक्षा, स्वच्छता, पर्यटन और विरासत संरक्षण के विभिन्न पहलुओं का समन्वय दिखाई दिया. कार्यक्रम के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि देश की ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित, स्वच्छ और पर्यटकों के लिए बेहतर बनाए रखना सामूहिक जिम्मेदारी है. महाबोधि मंदिर में आयोजित अभियान में विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी ने इस जिम्मेदारी को नई पीढ़ी से जोड़ने का काम किया.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

