अनिल मिश्र/गया जी. बिहार के गया जिले के टिकारी में साहित्यिक संवाद की अनूठी श्रृंखला ‘कहानी विथ कॉफी’ की 25वीं कड़ी में चर्चित कहानीकार भीष्म साहनी की प्रसिद्ध कहानी ‘चीफ की दावत’ पर गंभीर परिचर्चा आयोजित की गई. परिचर्चा में वक्ताओं ने कहानी के माध्यम से स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद बदलते सामाजिक परिवेश, बढ़ते बाजारवाद और उसके प्रभाव से कमजोर पड़ती मानवीय संवेदनाओं पर चर्चा की. वक्ताओं ने कहा कि आधुनिक जीवन में बाजारवाद के बढ़ते प्रभाव के कारण रिश्तों और संवेदनाओं का महत्व लगातार कम होता जा रहा है, जो भारतीय संस्कृति के सामने एक गंभीर चुनौती है.
कार्यक्रम की शुरुआत ‘कहानी विथ कॉफी’ श्रृंखला की 25वीं कड़ी के आयोजन पर सभी सदस्यों ने एक-दूसरे को बधाई देकर की. वक्ताओं ने कहा कि टिकारी जैसे कस्बाई शहर में साहित्य और कहानी को केंद्र में रखकर लगातार 25 महीने तक परिचर्चा का आयोजन होना अपने आप में उल्लेखनीय उपलब्धि है. उन्होंने इसे शहर के साहित्यिक और सांस्कृतिक जीवन के लिए महत्वपूर्ण पहल बताया.
मोबाइल के दौर में साहित्य के लिए समय निकालना चुनौती
परिचर्चा के दौरान वक्ताओं ने कहा कि आज का समाज मोबाइल और डिजिटल माध्यमों के मायाजाल में इस तरह उलझ गया है कि साहित्य पढ़ने और उस पर गंभीर चर्चा करने के लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे दौर में किसी कहानी को पढ़ना, सुनना और उसके सामाजिक सरोकारों पर सामूहिक रूप से विचार करना साहित्य के प्रति रुचि बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है.
वक्ताओं ने कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज में होने वाले बदलावों को समझने और मानवीय संवेदनाओं को जीवित रखने का माध्यम भी है. ऐसे आयोजन लोगों को पुस्तकों और साहित्यिक रचनाओं से जोड़ने के साथ नई पीढ़ी को भी अपनी सांस्कृतिक और सामाजिक जड़ों से परिचित कराने में भूमिका निभाते हैं.
नदीम हसन के कहानी पाठ ने बांधे रखा श्रोताओं को
कार्यक्रम के पहले चरण में भीष्म साहनी की कहानी ‘चीफ की दावत’ का पाठ शहर के लोकप्रिय युवा शायर नदीम हसन ने किया. उन्होंने कहानी का पाठ संवेदनात्मक अंदाज में किया. उनकी आवाज के उतार-चढ़ाव और प्रस्तुति ने श्रोताओं को कहानी से जोड़े रखा.
कहानी के पात्रों और परिस्थितियों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किए जाने के कारण कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहानी के भाव और उसके सामाजिक संदर्भ को करीब से महसूस किया. कहानी पाठ के बाद परिचर्चा के दूसरे चरण में वक्ताओं ने रचना के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की.
राम प्रसाद सिन्हा ने कहानी की विकास यात्रा पर रखे विचार
कार्यक्रम के दूसरे चरण में राम प्रसाद सिन्हा ने कहानी की विकास यात्रा पर विस्तार से चर्चा की. उन्होंने वैदिक काल से लेकर नानी-दादी की किस्सागोई और आधुनिक कहानी तक कहानी के विभिन्न पड़ावों को रेखांकित किया.
उन्होंने बताया कि कहानी कहने की परंपरा भारतीय समाज में बहुत पुरानी है. समय के साथ कहानी कहने और लिखने के तौर-तरीके बदले, लेकिन मनुष्य और उसके अनुभव कहानी के केंद्र में बने रहे. उन्होंने आधुनिक कहानी तक पहुंचने की इस लंबी यात्रा को विस्तार से सामने रखा.
उनके शोधात्मक संबोधन की उपस्थित लोगों ने सराहना की. वक्ताओं ने कहा कि सात-आठ दशक की उम्र में भी साहित्य और पठन-पाठन के प्रति उनकी सक्रियता तथा जिजीविषा प्रेरणादायी है.
भीष्म साहनी की कहानी के सामाजिक संदर्भ पर चर्चा
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में हिंदी के शोध छात्र महेश कुमार ने ‘चीफ की दावत’ की रचना के समय की सामाजिक और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर गंभीरता से चर्चा की. उन्होंने तत्कालीन सामाजिक वातावरण और स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद तेजी से बदल रही सामाजिक संरचना को कहानी के संदर्भ से जोड़ते हुए इसके विभिन्न पक्षों को सामने रखा.
उन्होंने कहा कि भीष्म साहनी ने अपनी कहानी के माध्यम से समाज में हो रहे उन बदलावों की ओर ध्यान आकर्षित किया, जिनमें व्यक्ति की महत्वाकांक्षा और सामाजिक प्रतिष्ठा के बीच मानवीय रिश्ते प्रभावित होने लगे थे. उनके अनुसार, स्वतंत्रता के बाद बदलती आर्थिक परिस्थितियों और बढ़ते बाजारवाद ने सामाजिक संबंधों को भी प्रभावित किया.
महेश कुमार ने चर्चा के दौरान यह रेखांकित किया कि व्यक्ति अपनी तरक्की और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए कई बार रिश्तों और भावनाओं को भी पीछे छोड़ने लगता है. ‘चीफ की दावत’ इसी बदलते सामाजिक मनोविज्ञान को समझने के लिए महत्वपूर्ण कहानी के रूप में सामने आती है.
सनातन संस्कृति को बचाने की जरूरत
हिंदी के सेवानिवृत्त प्राध्यापक और शकुराबाद कॉलेज के पूर्व प्राचार्य शिवशंकर सिंह ने अपने संबोधन में भारतीय सनातन संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि केवल पिछली पीढ़ी को दोष देने से समस्या का समाधान नहीं होगा. वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह आने वाली पीढ़ी को भी भारतीय संस्कृति और उसके मूल्यों से जोड़ने का प्रयास करे.
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश में परिवार, रिश्ते और संवेदनाएं प्रभावित हो रही हैं. ऐसे समय में साहित्य समाज को अपने मूल्यों और परंपराओं पर विचार करने का अवसर देता है.
साहित्यिक आयोजनों को बताया शहर की उपलब्धि
टिकारी शहर के प्रतिष्ठित हिंदी शिक्षक डॉ. राजन ने कहा कि ‘कहानी विथ कॉफी’ का 25वीं कड़ी तक पहुंचना पूरे शहर के लिए खुशी और उपलब्धि का विषय है. उन्होंने कहा कि एक कहानी को केंद्र में रखकर इतने गंभीर स्तर पर चर्चा में शामिल होना साहित्य के प्रति शहर की रुचि को दर्शाता है.
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन केवल साहित्य प्रेमियों तक सीमित नहीं रहते, बल्कि नई पीढ़ी को भी साहित्य, संवेदना और सामाजिक सरोकारों से जोड़ने का काम करते हैं. कहानी के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना युवाओं के लिए भी विचार और संवाद का अवसर उपलब्ध कराता है.
शहर के साहित्यप्रेमियों की रही भागीदारी
कार्यक्रम में सुरेश सिंह, वरिष्ठ पत्रकार नारायण मिश्रा, खैरा विद्यालय के शिक्षक पवन कुमार, ब्रजेश कुमार सहित अन्य साहित्यप्रेमी और गणमान्य लोग शामिल हुए. कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने कहानी पाठ और वक्ताओं की परिचर्चा को गंभीरता से सुना. कई श्रोता ऑनलाइन माध्यम से भी कार्यक्रम से जुड़े रहे.
बीपीएन ग्लोबल स्कूल के निदेशक नामित राजा ने कार्यक्रम में शामिल होने वाले सभी वक्ताओं, श्रोताओं और ऑनलाइन जुड़े प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग से चल रही ‘कहानी विथ कॉफी’ की यह श्रृंखला शहर में एक अनूठा साहित्यिक आयोजन बन चुकी है.
उन्होंने कहा कि 25वीं कड़ी तक इस कार्यक्रम का लगातार जारी रहना सामूहिक सहयोग का परिणाम है. उन्होंने सभी प्रतिभागियों द्वारा अपने व्यस्त समय में से समय निकालकर कार्यक्रम में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया.
साहित्य और संवेदना को जोड़ने का प्रयास
कार्यक्रम का संचालन संजय अथर्व ने किया. पूरी परिचर्चा के दौरान ‘चीफ की दावत’ के बहाने बदलते सामाजिक मूल्यों, बाजारवाद, पारिवारिक संबंधों और मानवीय संवेदनाओं पर विचार-विमर्श हुआ.
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि तकनीक और बाजार के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है. साहित्य व्यक्ति को समाज, रिश्तों और संवेदनाओं से जोड़ने का काम करता है. ‘कहानी विथ कॉफी’ की 25वीं कड़ी में भीष्म साहनी की कहानी के बहाने इसी सामाजिक और सांस्कृतिक बदलाव पर गंभीर संवाद हुआ और उपस्थित लोगों ने साहित्यिक चर्चा की इस परंपरा को आगे बढ़ाने की आवश्यकता जताई.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

