₹260 में अखरोट का ऑनलाइन ऑफर पड़ा भारी, ग्वालियर के युवक को मिलेगा ₹21,260, गूगल पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा आदेश

₹260 में अखरोट का ऑनलाइन ऑफर पड़ा भारी, ग्वालियर के युवक को मिलेगा ₹21,260, गूगल पर उपभोक्ता आयोग का बड़ा आदेश

प्रेषित समय :19:30:03 PM / Tue, Sep 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

ग्वालियर. ऑनलाइन खरीदारी के दौरान आकर्षक छूट देखकर किसी विज्ञापन पर आंख मूंदकर भरोसा करना उपभोक्ता को भारी पड़ सकता है. ग्वालियर में एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां गूगल नेटवर्क पर प्रदर्शित एक विज्ञापन के जरिए एक किलो अखरोट महज 260 रुपये में मिलने का दावा किया गया. 87 प्रतिशत की छूट देखकर युवक ने ऑनलाइन भुगतान तो कर दिया, लेकिन अखरोट की डिलीवरी नहीं हुई. शिकायत के बाद जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग, ग्वालियर ने मामले में गूगल कंपनी को उपभोक्ता को कुल 21 हजार 260 रुपये देने का आदेश दिया है. आयोग ने विज्ञापन को आकर्षक और भ्रामक मानते हुए इसे सेवा में कमी के दायरे में माना है.

जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने 28 सितंबर 2026 को बृजमोहन महाजन की ओर से प्रस्तुत परिवाद पर यह आदेश पारित किया. मामले में गूगल इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के अधिकृत अधिकारी को पक्षकार बनाया गया था. आयोग ने कंपनी को निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान करने के साथ ही अपने मंच पर इस तरह के भ्रामक विज्ञापनों को लेकर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं.

गूगल पर समाचार देखते समय दिखा अखरोट का विज्ञापन
परिवाद के अनुसार, 3 अक्टूबर 2023 को बृजमोहन महाजन गूगल नेटवर्क पर समाचार देख रहे थे. इसी दौरान उनकी नजर "हैप्पी अवर्स-6 दिवाली सेल ऑनलाइन" नाम की वेबसाइट के विज्ञापन पर पड़ी. विज्ञापन में एक किलो अखरोट की गिरी महज 260 रुपये में उपलब्ध होने का दावा किया गया था. विज्ञापन में करीब 87 प्रतिशत की छूट बताई गई थी. साथ ही यह संकेत दिया गया था कि ऑफर सीमित समय के लिए उपलब्ध है.

कम कीमत और भारी छूट देखकर महाजन ने विज्ञापन में दिए गए प्रस्ताव पर भरोसा किया और वेबसाइट के माध्यम से 260 रुपये का भुगतान कर दिया. भुगतान होने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि निर्धारित समय में अखरोट की डिलीवरी उनके पते पर पहुंच जाएगी. हालांकि ऐसा नहीं हुआ.

भुगतान के बाद नहीं मिली अखरोट की डिलीवरी
रकम का भुगतान करने के बाद जब काफी समय तक अखरोट की डिलीवरी नहीं हुई तो महाजन ने संबंधित विक्रेता से संपर्क करने का प्रयास किया. उन्हें न तो उत्पाद मिला और न ही खरीदारी के संबंध में संतोषजनक जानकारी दी गई. इसके बाद उन्हें महसूस हुआ कि जिस ऑफर को देखकर उन्होंने भुगतान किया था, उसमें गड़बड़ी हो सकती है.

महाजन ने इस मामले की शिकायत गूगल से भी की. उनका आरोप था कि जिस प्लेटफॉर्म पर वह समाचार देख रहे थे, उसी दौरान उन्हें संबंधित विज्ञापन दिखाई दिया था. उन्होंने विज्ञापन और भुगतान की जानकारी कंपनी के सामने रखी और कार्रवाई की मांग की.

शिकायत के बाद भी कार्रवाई की जानकारी नहीं मिली
परिवादी के अनुसार, गूगल की ओर से उन्हें शिकायत दर्ज कराने के लिए संबंधित वेबसाइटों और माध्यमों की जानकारी दी गई. हालांकि विज्ञापन प्रदर्शित करने वाले संबंधित विज्ञापनदाता के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसकी स्पष्ट जानकारी उन्हें नहीं दी गई.

महाजन का कहना था कि यदि किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपभोक्ताओं को आकर्षित करने वाला कोई विज्ञापन प्रदर्शित किया जाता है और उस विज्ञापन के आधार पर उपभोक्ता लेनदेन करता है, तो शिकायत सामने आने के बाद प्लेटफॉर्म को मामले में उचित कार्रवाई करनी चाहिए. इसी आधार पर उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.

चार लाख रुपये मानसिक क्षतिपूर्ति की मांग
महाजन ने अपने परिवाद में 260 रुपये की भुगतान की गई राशि वापस दिलाने के साथ मानसिक परेशानी के लिए चार लाख रुपये की क्षतिपूर्ति की मांग की थी. इसके अलावा प्रकरण में हुए खर्च के लिए 10 हजार रुपये दिलाए जाने की मांग भी की गई थी.

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग की ओर से गूगल कंपनी को नोटिस जारी किया गया. उपलब्ध विवरण के अनुसार कंपनी की ओर से आयोग के समक्ष प्रभावी उपस्थिति नहीं होने के कारण मामले में एकपक्षीय कार्यवाही की गई. परिवादी ने अपने दावे के समर्थन में शपथपत्र और संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत किए.

आयोग ने विज्ञापन को माना आकर्षक और भ्रामक
आयोग ने मामले में प्रस्तुत दस्तावेजों और तथ्यों पर विचार करते हुए कहा कि एक किलो अखरोट की गिरी को 87 प्रतिशत छूट के साथ केवल 260 रुपये में उपलब्ध कराने का प्रस्ताव उपभोक्ता को आकर्षित करने वाला था. इस प्रकार के विज्ञापन का उद्देश्य उपभोक्ता को तत्काल खरीदारी के लिए प्रेरित करना हो सकता है.

आयोग ने यह भी माना कि गूगल के मंच पर प्रदर्शित विज्ञापन के संबंध में शिकायत किए जाने के बावजूद कंपनी संबंधित विज्ञापनदाता के खिलाफ की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध नहीं करा सकी. आयोग ने इस स्थिति को सेवा में कमी के रूप में माना.

हालांकि आयोग ने उपभोक्ता की ओर से की गई चार लाख रुपये की मानसिक क्षतिपूर्ति की पूरी मांग को स्वीकार नहीं किया. आयोग ने यह भी टिप्पणी की कि उपभोक्ताओं को असामान्य रूप से अधिक छूट या बेहद कम कीमत वाले ऑनलाइन ऑफर देखकर खरीदारी करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए.

21 हजार 260 रुपये देने का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग ने मामले में गूगल कंपनी को कुल 21 हजार 260 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है. इसमें उपभोक्ता द्वारा उत्पाद के लिए भुगतान किए गए 260 रुपये वापस करने के अलावा मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और प्रकरण व्यय के रूप में एक हजार रुपये शामिल हैं.

आयोग ने कंपनी को आदेश का पालन 45 दिन के भीतर करने के निर्देश दिए हैं. निर्धारित अवधि में राशि का भुगतान नहीं किए जाने की स्थिति में आदेश की तारीख से वास्तविक भुगतान तक पूरी राशि पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज देय होगा.

भ्रामक ऑनलाइन विज्ञापनों पर भी उठे सवाल
यह मामला ऑनलाइन विज्ञापनों की विश्वसनीयता और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित होने वाले ऑफर को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है. इंटरनेट पर खरीदारी करने वाले उपभोक्ताओं को अक्सर भारी छूट, सीमित समय के ऑफर और बाजार मूल्य से बेहद कम कीमत जैसे दावों के जरिए आकर्षित किया जाता है. ऐसे में किसी भी वेबसाइट से सामान खरीदने से पहले उसके बारे में जानकारी जुटाना जरूरी है.

उपभोक्ता आयोग के इस आदेश से यह संदेश भी सामने आया है कि ऑनलाइन खरीदारी से जुड़े विवादों में उपभोक्ता अपने अधिकारों के लिए उपभोक्ता आयोग का रुख कर सकते हैं. हालांकि आयोग ने उपभोक्ता को राहत देते हुए क्षतिपूर्ति और प्रकरण व्यय के भुगतान का आदेश दिया है, साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बेहद आकर्षक ऑफर देखकर खरीदारी करने वाले उपभोक्ता की ओर से भी सावधानी अपेक्षित है.

ग्वालियर के इस मामले में 260 रुपये के अखरोट के ऑनलाइन ऑफर से शुरू हुआ विवाद अब उपभोक्ता आयोग के आदेश तक पहुंचा है. आयोग के आदेश के अनुसार, गूगल को उपभोक्ता को 21 हजार 260 रुपये का भुगतान करना होगा और निर्धारित समय में भुगतान नहीं करने पर छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-