एआई ट्रेडिंग में रोज 10 प्रतिशत मुनाफे का झांसा, कंपनी कर्मचारी से 7.20 लाख की साइबर ठगी

एआई ट्रेडिंग में रोज 10 प्रतिशत मुनाफे का झांसा, कंपनी कर्मचारी से 7.20 लाख की साइबर ठगी

प्रेषित समय :19:19:05 PM / Tue, Sep 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

इंदौर. परदेशीपुरा थाना क्षेत्र में एआई आधारित ट्रेडिंग एप के जरिए भारी मुनाफे का लालच देकर एक निजी कंपनी के कर्मचारी से 7.20 लाख रुपये की साइबर ठगी का मामला सामने आया है. आरोपितों ने पहले युवक को छोटे निवेश पर रकम वापस कर भरोसे में लिया और इसके बाद बोनस, मेगा ट्रेड, ब्रोकरेज चार्ज और टैक्स के नाम पर अलग-अलग किस्तों में बड़ी रकम जमा कराते रहे. जब पीड़ित ने रकम वापस निकालने का प्रयास किया तो आरोपित लगातार नए शुल्क और टैक्स की मांग करते रहे. संदेह होने पर युवक ने एप और कथित कंपनी की जांच की, जिसके बाद उसे ठगी का पता चला. शिकायत के आधार पर परदेशीपुरा पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

पुलिस के अनुसार निजी कंपनी में काम करने वाले विजय बैरवा को सात अगस्त को मोबाइल पर अंकित पाल नाम के व्यक्ति का फोन आया था. फोन करने वाले ने उसे वैल्यू ट्रेड नाम के एआई आधारित ट्रेडिंग एप के बारे में बताया. आरोपित ने दावा किया कि एप में निवेश करने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ट्रेडिंग होती है और रोजाना पांच से दस प्रतिशत तक मुनाफा कमाया जा सकता है.

शुरुआत में आरोपित ने विजय से केवल 100 डॉलर निवेश करने के लिए कहा. ठगों ने ऐसा तरीका अपनाया कि पीड़ित को शुरुआत में किसी तरह का संदेह न हो. विजय के एप की लिंक नहीं खोल पाने पर आरोपित ने उनके दस्तावेज लेकर खुद ही ट्रेडिंग अकाउंट बनाने की बात कही.

पहले छोटी रकम लौटाकर जीता भरोसा
10 अगस्त को विजय ने करीब 10 हजार रुपये एप से जुड़े खाते में जमा किए. अगले दिन एप पर उनका बैलेंस 104 डॉलर दिखाई दिया. कुछ दिन बाद यह रकम बढ़कर 152 डॉलर बताई गई. विजय ने जब 50 डॉलर निकालने का प्रयास किया तो रकम उनके बैंक खाते में वापस आ गई.

शुरुआती निवेश की राशि से अधिक रकम वापस मिलने पर विजय को एप और आरोपित पर भरोसा हो गया. साइबर ठगी करने वाले आरोपितों ने इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए इसके बाद निवेश की रकम बढ़ाने के लिए लगातार नए प्रस्ताव देने शुरू कर दिए.

बोनस और मेगा ट्रेड के नाम पर बढ़ाया निवेश
20 और 21 अगस्त को आरोपित ने विजय को पांच हजार डॉलर का बोनस दिलाने का झांसा दिया. इसके लिए उनसे 500 डॉलर यानी करीब 47 हजार रुपये जमा करवाए गए. इसके अगले दिन मेगा ट्रेड के नाम पर करीब 62 हजार रुपये और जमा कराए गए.

आरोपितों की ओर से लगातार एप पर बढ़ता बैलेंस दिखाया जा रहा था. 28 अगस्त को विजय के खाते में 19 हजार डॉलर से अधिक की राशि दिखाई गई. बड़ी रकम देखकर उन्हें लगा कि ट्रेडिंग में अच्छा मुनाफा हो चुका है और अब वह आसानी से अपना पैसा निकाल सकेंगे.

रकम निकालने पर शुरू हुई शुल्क और टैक्स की मांग
जब विजय ने एप पर दिखाई जा रही रकम निकालने की कोशिश की तो आरोपितों ने कंपनी की पालिसी बदलने का हवाला दिया. उनसे कहा गया कि रकम निकालने के लिए पहले ब्रोकरेज चार्ज जमा करना होगा. इसके नाम पर विजय से करीब एक लाख रुपये और जमा करा लिए गए.

इसके बाद एक सितंबर को अशोक नाम के व्यक्ति ने खुद को अकाउंट सेक्शन का कर्मचारी बताया. उसने 15 हजार डॉलर निकालने के लिए 750 डॉलर यानी करीब 71 हजार रुपये क्रास कंट्री टैक्स के नाम पर मांगे. इसके बाद मनीष नाम के व्यक्ति ने भी विजय से अलग-अलग मदों में रकम जमा कराने के लिए कहा.

अलग-अलग खातों में जमा कराए 7.20 लाख रुपये
पुलिस के मुताबिक आरोपितों ने बोनस, मेगा ट्रेड, ब्रोकरेज, टैक्स और अन्य शुल्क के नाम पर विजय से बार-बार रकम ट्रांसफर कराई. शुरुआत में छोटी रकम से शुरू हुआ निवेश धीरे-धीरे लाखों रुपये तक पहुंच गया. विजय ने आरोपितों के कहने पर कुल 7.20 लाख रुपये अलग-अलग किस्तों में जमा कर दिए.

हालांकि रकम जमा करने के बाद भी उन्हें अपनी राशि वापस नहीं मिली. हर बार पैसे निकालने के लिए कोई नया शुल्क या टैक्स बताए जाने लगा. लगातार रकम मांगने पर विजय को संदेह हुआ. उन्होंने एप और कंपनी के बारे में जानकारी जुटानी शुरू की.

कंपनी का कोई अधिकृत अस्तित्व नहीं
विजय ने जब कथित कंपनी और एआई ट्रेडिंग एप की जांच की तो उन्हें इस नाम से किसी अधिकृत एआई ट्रेडिंग कंपनी के मौजूद होने की जानकारी नहीं मिली. इसके बाद उन्हें समझ आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुके हैं. उन्होंने मामले की शिकायत साइबर हेल्पलाइन पर की.

शिकायत के आधार पर परदेशीपुरा पुलिस ने अज्ञात आरोपितों के खिलाफ धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है. पुलिस अब आरोपितों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, बैंक खातों, लेनदेन और ट्रेडिंग एप से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है. पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस ठगी के पीछे कितने लोग शामिल हैं और रकम किन खातों में ट्रांसफर कराई गई.

यह मामला एक बार फिर साइबर ठगी के उस तरीके को सामने लाता है, जिसमें ठग शुरुआत में छोटी रकम का लाभ देकर पीड़ित का भरोसा जीतते हैं और बाद में मुनाफा निकालने के नाम पर लगातार अलग-अलग शुल्क व टैक्स वसूलते रहते हैं.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-