जबलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने पांच विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित, हाई कोर्ट ने दूसरे शहरों में भी समिति पर पूछा सवाल

जबलपुर की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने पांच विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित, हाई कोर्ट ने दूसरे शहरों में भी समिति पर पूछा सवाल

प्रेषित समय :19:44:49 PM / Tue, Sep 29th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

जबलपुर. शहर की लगातार बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था, जाम, अतिक्रमण और यातायात प्रबंधन से जुड़ी समस्याओं को लेकर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने विशेषज्ञ समिति के गठन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने कोर्ट के समक्ष जबलपुर में ट्रैफिक व्यवस्था के सुधार और उसकी नियमित मॉनिटरिंग के लिए पांच विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित किए हैं. हालांकि इन नामों को अभी अंतिम रूप दिया जाना बाकी है. सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सरकार से यह भी जानना चाहा कि क्या जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के दूसरे शहरों में भी ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए ऐसी विशेषज्ञ समितियों का गठन किया जा सकता है.

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई. याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से उप-महाधिवक्ता स्वप्निल गांगुली ने सरकार का पक्ष रखते हुए प्रस्तावित विशेषज्ञों के नाम कोर्ट के सामने रखे. अब मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी.

ट्रैफिक सुधार के लिए विशेषज्ञों की राय लेने की तैयारी
जबलपुर शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर लंबे समय से शिकायतें सामने आती रही हैं. प्रमुख मार्गों पर जाम, यातायात संकेतकों की स्थिति, सड़क किनारे अतिक्रमण, पार्किंग की समस्या और यातायात संचालन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है. इसी पृष्ठभूमि में हाई कोर्ट के समक्ष दायर याचिका में शहर की यातायात व्यवस्था को व्यवस्थित करने और प्रभावी मॉनिटरिंग की आवश्यकता उठाई गई है.

पूर्व की सुनवाई में कोर्ट ने शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की दिशा में कदम उठाने के निर्देश दिए थे. इसके बाद राज्य सरकार ने विशेषज्ञों के नामों पर विचार किया और सोमवार की सुनवाई में पांच नाम प्रस्तावित किए.

सरकार की ओर से प्रस्तुत प्रस्ताव का उद्देश्य केवल यातायात व्यवस्था की मौजूदा स्थिति का आकलन करना नहीं, बल्कि शहर में ट्रैफिक संचालन से जुड़ी समस्याओं का विशेषज्ञ दृष्टिकोण से अध्ययन कर सुधार के उपाय सुझाना भी बताया गया है.

पांच अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों को शामिल करने का प्रस्ताव
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने जिन पांच विशेषज्ञों के नाम प्रस्तावित किए, उनमें अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव रखने वाले लोगों को शामिल करने की बात सामने आई है. प्रस्तावित समिति में शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज जबलपुर के प्राचार्य, मैनिट भोपाल के विशेषज्ञ, सेवानिवृत्त एडीशनल एसपी ट्रैफिक, स्मार्ट सिटी से जुड़े ट्रैफिक विशेषज्ञ और एक आईटी विशेषज्ञ को शामिल करने का प्रस्ताव है.

समिति में तकनीकी, पुलिसिंग, शहरी नियोजन और सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किए जाने का उद्देश्य ट्रैफिक समस्या का अलग-अलग स्तर पर अध्ययन करना माना जा रहा है. यातायात प्रबंधन में सड़क की क्षमता, वाहनों का दबाव, सिग्नल व्यवस्था, पार्किंग, सार्वजनिक परिवहन, अतिक्रमण और तकनीकी निगरानी जैसे कई पहलू शामिल होते हैं. ऐसे में विशेषज्ञों की बहु-विषयक टीम इन पहलुओं को एक साथ देखने में सक्षम हो सकती है.

हालांकि सरकार की ओर से पेश किए गए नाम अभी प्रस्तावित हैं. समिति के अंतिम स्वरूप और उसके सदस्यों को लेकर आगामी सुनवाई में स्थिति और स्पष्ट हो सकती है.

हाई कोर्ट ने दूसरे शहरों को लेकर भी पूछा सवाल
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केवल जबलपुर तक विशेषज्ञ समिति के गठन को सीमित रखने के बजाय व्यापक स्तर पर सवाल उठाया. युगलपीठ ने राज्य सरकार से पूछा कि क्या जबलपुर की तर्ज पर प्रदेश के अन्य शहरों में भी ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए विशेषज्ञ समितियों का गठन किया जा सकता है.

कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद मामला केवल जबलपुर की यातायात व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा. यदि राज्य सरकार दूसरे शहरों में भी इसी तरह की व्यवस्था तैयार करती है तो वहां की स्थानीय ट्रैफिक समस्याओं का विशेषज्ञ स्तर पर अध्ययन कराया जा सकता है. हालांकि दूसरे शहरों के संबंध में सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाएंगे, यह आगामी सुनवाई में स्पष्ट होने की संभावना है.

याचिका में ट्रैफिक समस्या को बताया गया गंभीर
याचिकाकर्ता डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से दायर याचिका में जबलपुर की यातायात व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को सामने रखा गया है. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने सुनवाई के दौरान कहा कि शहर में यातायात संबंधी समस्याओं का असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है.

याचिका में ट्रैफिक सिग्नल, जाम और अतिक्रमण जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया है. याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क रखा गया कि पूर्व में कोर्ट के निर्देशों के बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था में अपेक्षित सुधार नहीं हो पाया है. इसके कारण वाहन चालकों और आम नागरिकों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है.

सिग्नल से लेकर अतिक्रमण तक कई चुनौतियां
जबलपुर जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर कई स्तरों पर चुनौतियां हैं. शहर के प्रमुख मार्गों पर पीक आवर्स में वाहनों का दबाव बढ़ जाता है. इसके अलावा सड़क किनारे बेतरतीब पार्किंग, व्यस्त बाजार क्षेत्रों में अतिक्रमण और कुछ स्थानों पर यातायात संचालन की दिक्कतें जाम की स्थिति को प्रभावित करती हैं.

यातायात सिग्नल की टाइमिंग और विभिन्न मार्गों पर वाहनों की संख्या के बीच संतुलन भी प्रभावी ट्रैफिक प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसी तरह शहर के बढ़ते यातायात दबाव को देखते हुए तकनीक आधारित निगरानी और डेटा के इस्तेमाल की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है.

प्रस्तावित विशेषज्ञ समिति इन सभी पहलुओं का अध्ययन कर यदि आवश्यक समझे तो संबंधित विभागों को सुधार संबंधी सुझाव दे सकती है. हालांकि समिति की भूमिका और अधिकार क्षेत्र को लेकर अंतिम निर्णय अभी सामने आना बाकी है.

9 सितंबर की सुनवाई के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया
इस मामले में नौ सितंबर को हुई सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने जबलपुर में ट्रैफिक सुधार और मॉनिटरिंग के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने की दिशा में निर्देश दिए थे. इसके बाद राज्य सरकार ने विशेषज्ञों के नाम तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई.

अब 29 सितंबर की सुनवाई में सरकार ने पांच विशेषज्ञों के नाम कोर्ट के समक्ष प्रस्तावित कर दिए हैं. कोर्ट ने राज्य सरकार को शहर में ट्रैफिक सुधार से संबंधित प्रगति रिपोर्ट भी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. इससे अगली सुनवाई में यह स्पष्ट हो सकेगा कि अब तक यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए गए और उनके क्या परिणाम सामने आए.

13 अक्टूबर को फिर होगी सुनवाई
मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है. उस दौरान विशेषज्ञ समिति के गठन, प्रस्तावित सदस्यों और ट्रैफिक सुधार की प्रगति से संबंधित स्थिति पर आगे चर्चा हो सकती है. इसके साथ ही दूसरे शहरों में भी इसी तरह की विशेषज्ञ समितियां गठित करने को लेकर हाई कोर्ट के सवाल पर राज्य सरकार का रुख सामने आने की संभावना है.

फिलहाल हाई कोर्ट की कार्यवाही के बाद जबलपुर की यातायात व्यवस्था को लेकर विशेषज्ञ निगरानी की प्रक्रिया आगे बढ़ती दिखाई दे रही है. पांच प्रस्तावित विशेषज्ञों में तकनीकी, पुलिस, स्मार्ट सिटी और आईटी क्षेत्र से जुड़े लोगों को शामिल करने की योजना है. अब निगाहें 13 अक्टूबर की सुनवाई पर हैं, जहां समिति के गठन और शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के लिए आगे की कार्रवाई को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-