हेमंत सोरेन के खिलाफ PMLA केस में आरोप तय, 8.86 एकड़ जमीन मामले में अब शुरू होगी ट्रायल की कार्रवाई

हेमंत सोरेन के खिलाफ PMLA केस में आरोप तय, 8.86 एकड़ जमीन मामले में अब शुरू होगी ट्रायल की कार्रवाई

प्रेषित समय :21:26:14 PM / Wed, Sep 30th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

रांची. झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में बुधवार को रांची की विशेष PMLA अदालत ने आरोप तय कर दिए. अदालत की इस कार्रवाई के साथ मामले में अब ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और साक्ष्यों को रिकॉर्ड करने का चरण शुरू होगा. इस मामले में सोरेन के अलावा 16 अन्य लोग भी आरोपित हैं.

विशेष PMLA अदालत ने हेमंत सोरेन के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 3 के तहत आरोप तय किए हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अदालत में मामले को मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा बताया गया है. वहीं सोरेन ने आरोपों से इनकार किया है और आरोप तय किए जाने के दौरान खुद को निर्दोष बताया.

8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है मामला
यह मामला रांची के बरियातू/बरगेन क्षेत्र में स्थित 8.86 एकड़ जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और हस्तांतरण से संबंधित है. जांच एजेंसी का आरोप है कि जमीन के रिकॉर्ड में हेरफेर और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए जमीन के लेनदेन की प्रक्रिया को अंजाम दिया गया.

इस मामले में कुल 17 आरोपित हैं. हेमंत सोरेन के अलावा 16 अन्य आरोपितों के खिलाफ पहले ही आरोप तय किए जा चुके थे. सोरेन इस मामले में अंतिम आरोपित थे, जिनके खिलाफ आरोप तय होना बाकी था.

PMLA की धारा 3 के तहत आरोप
अदालत ने सोरेन के खिलाफ PMLA की धारा 3 के तहत आरोप तय किए हैं. इस धारा के तहत अपराध से अर्जित संपत्ति से संबंधित गतिविधियों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल होना, ऐसी संपत्ति को छिपाना, अपने कब्जे में रखना, उसका इस्तेमाल करना या उसे बेदाग संपत्ति के रूप में पेश करना मनी लॉन्ड्रिंग अपराध के दायरे में आता है.

आरोप तय होना अदालत द्वारा दोष सिद्ध किया जाना नहीं है. मामले में अब अभियोजन पक्ष अपने साक्ष्य पेश करेगा और बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा.

अदालत में वर्चुअली पेश हुए हेमंत सोरेन
आरोप तय किए जाने के दौरान हेमंत सोरेन अदालत के समक्ष वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए. रिपोर्ट के अनुसार विशेष PMLA अदालत के न्यायाधीश योगेश कुमार ने उन्हें आरोप पढ़कर सुनाए. सोरेन ने आरोपों को स्वीकार नहीं किया और अपनी निर्दोषता की बात कही.

सोरेन के वकील संजीव कुमार के अनुसार आगे की सुनवाई और साक्ष्य से जुड़ी कार्रवाई के लिए 30 नवंबर की तारीख तय की गई है. वहीं ED की ओर से कहा गया कि मामला अब साक्ष्य के चरण में प्रवेश कर चुका है.

हाई कोर्ट से तत्काल रोक की मांग को झटका
अदालत में आरोप तय होने से कुछ घंटे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने सोरेन की उस याचिका पर तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने की मांग की गई थी. इसके बाद विशेष PMLA अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया आगे बढ़ी.

इससे पहले सितंबर में भी मामले की कार्यवाही को रोकने की कोशिश की गई थी. 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार आरोप तय करने की प्रक्रिया को 30 सितंबर तक टाला गया था, क्योंकि सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय की ओर से उपलब्ध कराए गए कुछ दस्तावेजों की समीक्षा के लिए समय मांगा था.

PMLA की धारा 44(1)(d) को हाई कोर्ट में चुनौती
मामले में केवल ट्रायल ही नहीं, बल्कि PMLA के प्रावधानों को लेकर भी कानूनी चुनौती जारी है. सोरेन के बचाव पक्ष ने झारखंड हाई कोर्ट में PMLA की धारा 44(1)(d) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी है.

बचाव पक्ष के अनुसार इस प्रावधान के तहत विशेष PMLA अदालत को अनुसूचित अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग अपराध की सुनवाई साथ करने की व्यवस्था है. हाई कोर्ट ने इस चुनौती पर केंद्र सरकार और प्रवर्तन निदेशालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 28 अक्टूबर को निर्धारित है, जबकि जवाब दाखिल करने के लिए 20 अक्टूबर की समयसीमा बताई गई है.

ED का क्या है आरोप
प्रवर्तन निदेशालय की जांच का केंद्र रांची में जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और लेनदेन से जुड़ा नेटवर्क है. 25 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार ED का आरोप है कि बरगेन क्षेत्र में सरकारी रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर जमीन के स्वामित्व और लेनदेन से जुड़ी प्रक्रिया को प्रभावित किया गया. जांच में फर्जी दस्तावेजों और जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव की बात भी सामने रखी गई है.

हालांकि ये जांच एजेंसी के आरोप हैं और मामले में अंतिम न्यायिक निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है. अब ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष को अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने होंगे.

पहले गिरफ्तार हो चुके हैं सोरेन
इस मामले के मनी लॉन्ड्रिंग पहलू में प्रवर्तन निदेशालय ने हेमंत सोरेन को 31 जनवरी 2024 को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी से पहले उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दिया था. बाद में झारखंड हाई कोर्ट ने 28 जून 2024 को उन्हें जमानत दी, जिसके बाद उन्होंने दोबारा मुख्यमंत्री पद संभाला.

इसके बाद मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ती रही. सितंबर 2026 में ट्रायल पर रोक की मांग सहित विभिन्न कानूनी प्रयास किए गए, लेकिन विशेष अदालत में आरोप तय करने की प्रक्रिया अंततः 30 सितंबर को पूरी हुई.

अब साक्ष्यों पर होगी सुनवाई
आरोप तय होने के बाद मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण साक्ष्य की रिकॉर्डिंग है. अभियोजन पक्ष अपने गवाह और दस्तावेज अदालत के समक्ष पेश करेगा. इसके बाद बचाव पक्ष को उन साक्ष्यों पर सवाल उठाने और अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा.

फिलहाल अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं और मामले में अगली प्रक्रिया के लिए 30 नवंबर की तारीख बताई गई है. दूसरी ओर PMLA की धारा 44(1)(d) की संवैधानिक चुनौती पर हाई कोर्ट में 28 अक्टूबर को सुनवाई होगी. इस तरह मामले की न्यायिक प्रक्रिया ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट, दोनों स्तरों पर आगे बढ़ रही है.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-