जबलपुर. एमपी के जबलपुर में नाबालिगा की आत्महत्या मामले शिक्षक संतोष पटेल ने गिरफ्तारी की जानकारी शिक्षा विभाग से छिपाई. किशोरी को चोर और डायन कहने के मामले में शिक्षक को 19 अगस्त 2026 को जेल भेजा गया था. मामले में 3 और आरोपी थे.
खबर है कि आरोपी शिक्षक जमानत पर बाहर आ गया, इसके बाद मेडिकल लीव का आवेदन लगाकर दोबारा स्कूल में पढ़ाने पहुंच गया. करीब डेढ़ महीने तक विभाग को जानकारी नहीं दी. स्कूल की प्राचार्या ने 3 सितंबर को डीईओ को पत्र भेजा, तब मामले का खुलासा हुआ. शिक्षक के स्कूल लौटने के बाद सगड़ा-छपनी स्कूल की प्राचार्या ने बताया- उन्हें शिक्षक संतोष कुमार पटेल का आवेदन मिला था. इसमें शिक्षक ने दावा किया था कि पारिवारिक विवाद के चलते उसके खिलाफ झूठा प्रकरण दर्ज कराया गया है. प्राचार्या को पत्र में शिक्षक की 19 अगस्त की गिरफ्तारी, सेंट्रल जेल भेजे जाने और जमानत के बाद रिहाई की जानकारी भी दी गई थी. इसके बाद प्राचार्या ने शिक्षा विभाग को जानकारी दी. पत्र 8 सितंबर को डीईओ कार्यालय में प्राप्त हुआ.
नाबालिग को पंचायत बुलाकर वीडियो दिखाया था-
पुलिस जांच के मुताबिक, 19 अक्टूबर 2025 को संतोष पटेल, राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल ने किशोरी के रिश्तेदारों और परिवार के लोगों को बुलाकर पंचायत की थी. इसमें किशोरी के चरित्र और उसकी गतिविधियों को लेकर आरोप लगाए गए. वहां मौजूद लोगों को वीडियो स्क्रीन पर दिखाया गया. यह वीडियो 15 अक्टूबर को कैमरे लगाकर बनवाया गया था. किशोरी और उसके माता-पिता की मौजूदगी में हुई पंचायत में उस पर चोरी समेत अन्य आपत्तिजनक आरोप लगाए गए. अपमानित करने वाले शब्द कहे गए. पिता से कथित तौर पर 3 लाख रुपए हर्जाने के रूप में मांगने की धमकी भी दी गई.
पंचायत के बाद मामा के घर भेजा, नाबालिग ने जहर खाया-
इस घटना के बाद माता-पिता ने किशोरी को कुछ दिनों के लिए मामा के घर भेज दिया था. 10 नवंबर 2025 को उसने वहीं जहर खा लिया. परिजन उसे बरगी स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे. हालत गंभीर होने पर जबलपुर के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. लार्डगंज थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की. बाद में घटनास्थल बरगी पुलिस चौकी क्षेत्र से जुड़ा होने के कारण जांच बरगी पुलिस को ट्रांसफर कर दी गई. लार्डगंज और बरगी पुलिस ने मामले की जांच की.
शिक्षक सहित 4 आरोपियों के खिलाफ दर्ज की थी एफआईआर-
बरगी पुलिस ने करीब 10 महीने बाद संतोष पटेल समेत चारों आरोपियों के खिलाफ स्नढ्ढक्र दर्ज की. नाबालिग को प्रताडि़त करने और आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में कार्रवाई की. आरोपी संतोष पटेल, राममिलन पटेल, अशोक पटेल और राजेश पटेल को कोर्ट ने जेल भेज दिया था.
जेल जाने से पहले मेडिकल लीव का आवेदन-
संतोष पटेल सगड़ा-छपनी स्कूल में 7 अप्रैल 2015 से पदस्थ हैं. पॉलिटिकल साइंस पढ़ाते हैं. गिरफ्तारी से पहले उन्होंने स्कूल रजिस्टर में मेडिकल लीव का आवेदन लगाया था. करीब 10 दिन बाद जमानत मिलने पर वह जेल से बाहर आया. दोबारा स्कूल पहुंच गया. गिरफ्तारी और जेल जाने की जानकारी शिक्षा विभाग को नहीं दी.
डीईओ बोले- गिरफ्तारी की जानकारी नहीं थी-
जिला शिक्षा अधिकारी गौतम बर्वे ने कहा- उन्हें शिक्षक की गिरफ्तारी और जेल जाने की जानकारी पहले नहीं थी. स्कूल से आए पत्र की जानकारी भी उनके संज्ञान में नहीं थी. उन्होंने मामले की जांच कराने की बात कही. मामले में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच में सामने आया कि किशोरी पर चोरी के आरोप लगाए गए थे. उसका वीडियो परिवार के लोगों की मौजूदगी में पंचायत बुलाकर दिखाया गया था. किशोरी व्यथित हुई. इसके बाद आत्महत्या कर ली. मामले में चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था.
Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-

