SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में गरजे उद्धव-राज ठाकरे, इस्तीफे की मांग के साथ निकला गर्जना मोर्चा

SIR और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में गरजे उद्धव-राज ठाकरे, इस्तीफे की मांग के साथ निकला गर्जना मोर्चा

प्रेषित समय :16:09:09 PM / Sun, Oct 4th, 2026
Reporter : पलपल रिपोर्टर

मुंबई संवाददाता. महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद रविवार को सड़क पर उतर आया. शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आए. दोनों नेताओं ने मुंबई में विराट गर्जना मोर्चा का नेतृत्व करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया को रद्द करने की मांग उठाई.

मोर्चा दक्षिण मुंबई के मेट्रो सिनेमा से शुरू होकर बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) मुख्यालय के सामने पहुंचा, जहां उद्धव और राज ठाकरे ने सभा को संबोधित किया. प्रदर्शन में कांग्रेस और शरद पवार गुट वाली NCP (SP) के नेताओं ने भी हिस्सा लिया. प्रदर्शनकारियों से पार्टी के झंडों के बजाय केवल तिरंगा लेकर शामिल होने की अपील की गई थी.

SIR रद्द करने की राज ठाकरे की मांग
सभा को संबोधित करते हुए राज ठाकरे ने महाराष्ट्र में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की. उन्होंने चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग भी उठाई.

राज ठाकरे ने 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच महाराष्ट्र में मतदाताओं की संख्या में कथित बढ़ोतरी पर सवाल उठाया. उन्होंने दावा किया कि करीब छह महीने की अवधि में मतदाताओं की संख्या में 40 लाख से 60 लाख तक की वृद्धि हुई.

राज ठाकरे ने इस सवाल को चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जोड़ते हुए कहा कि यदि SIR और मतदान व्यवस्था में बदलाव की उनकी मांगें स्वीकार की जाती हैं तो चुनावी प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी. हालांकि, मतदाता संख्या में बदलाव और SIR को लेकर उनके दावों को संबंधित आधिकारिक आंकड़ों और चुनाव आयोग के जवाब के संदर्भ में देखा जाना होगा.

पूर्व गृह सचिव के बयान का राज ने दिया हवाला
राज ठाकरे ने अपने भाषण में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव आरके सिंह की ओर से व्यक्त कानूनी राय का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि SIR जैसी प्रक्रिया असाधारण परिस्थितियों में इस्तेमाल की जानी चाहिए, जैसे प्राकृतिक आपदा या बड़े पैमाने पर आबादी का विस्थापन.

राज ठाकरे ने इसी आधार पर महाराष्ट्र में मौजूदा SIR प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाया और इसे समाप्त करने की मांग की. यह उनका राजनीतिक और कानूनी तर्क है; SIR की वैधानिकता पर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी और चुनावी प्राधिकरणों के निर्णय से स्पष्ट होगी.

उद्धव ठाकरे बोले तानाशाही के खिलाफ है मोर्चा
उद्धव ठाकरे ने अपने संबोधन में कहा कि रविवार का आंदोलन एक ऐसी व्यवस्था के खिलाफ है, जिसे उन्होंने तानाशाही से जोड़कर पेश किया. उन्होंने आरोप लगाया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं.

उद्धव ने पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में मतदाता सूची से जुड़े विवादों का भी उल्लेख किया और कहा कि कई लोग अपने मतदान अधिकार को लेकर अदालत का रुख कर चुके हैं.

उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया और इसे पक्षपातपूर्ण बताया. हालांकि ये आरोप उद्धव ठाकरे के राजनीतिक बयान हैं और चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया को भी पूरे संदर्भ में देखना होगा.

‘वोट चोर’ के नारे का किया जिक्र
उद्धव ठाकरे ने अपने भाषण में कांग्रेस के पुराने ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि मौजूदा समय में देश में ‘वोट चोर’ के खिलाफ आवाज उठ रही है.

उन्होंने भाजपा पर भी राजनीतिक हमला बोला और आरोप लगाया कि पार्टी के लिए सत्ता चलाना और शासन व्यवस्था अलग-अलग चीजें हैं. उद्धव ने कहा कि सरकार चलाने के तरीके को वह शासन के बजाय बदले की राजनीति के रूप में देखते हैं.

इन बयानों पर भाजपा या चुनाव आयोग की ओर से प्रतिक्रिया मिलने पर तस्वीर का दूसरा पक्ष सामने आ सकता है.

लंबे समय बाद एक मंच पर दिखे ठाकरे बंधु
रविवार के मोर्चे की सबसे बड़ी राजनीतिक तस्वीर उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे का एक साथ मंच साझा करना रही. दोनों चचेरे भाइयों की राजनीतिक राह लंबे समय से अलग रही है, लेकिन चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर दोनों ने साझा मंच बनाया.

मोर्चे में कांग्रेस और NCP (SP) से जुड़े नेताओं की मौजूदगी ने इसे व्यापक विपक्षी प्रदर्शन का रूप दिया. कांग्रेस नेताओं बाळासाहेब थोरात और विजय वडेट्टीवार तथा NCP (SP) के जयंत पाटिल, शशिकांत शिंदे, जितेंद्र आव्हाड और अनिल देशमुख के शामिल होने की जानकारी सामने आई है.

इस प्रदर्शन में राजनीतिक दलों के झंडे नहीं रखने का फैसला भी चर्चा में रहा. नेताओं ने समर्थकों से केवल तिरंगा लेकर आने की अपील की थी, ताकि आंदोलन का केंद्र किसी एक पार्टी के बजाय चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR का मुद्दा रहे.

महाराष्ट्र में SIR बना बड़ा राजनीतिक मुद्दा
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर महाराष्ट्र में विपक्षी दल लगातार सवाल उठा रहे हैं. उनका आरोप है कि प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए हैं और इससे मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र में 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट सूची में करीब 2.07 करोड़ मतदाताओं के नामों से जुड़े enumeration forms जमा नहीं होने की बात सामने आई थी, जबकि करीब 1.22 करोड़ लोगों को नोटिस दिए जाने की जानकारी भी रिपोर्ट में दी गई. ये आंकड़े चुनावी प्रक्रिया को लेकर चल रही बहस के संदर्भ में हैं और इनके अंतिम प्रभाव का आकलन आधिकारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही किया जा सकता है.

विपक्ष इसे मतदाता अधिकार और चुनावी पारदर्शिता से जोड़ रहा है, जबकि चुनावी सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के तहत नामों के सत्यापन और आपत्तियों की प्रक्रिया भी चलती है.

EVM बनाम बैलेट पेपर का मुद्दा भी उठा
राज ठाकरे ने SIR के साथ मतदान के लिए EVM के बजाय बैलेट पेपर इस्तेमाल करने की मांग भी उठाई. उनका कहना है कि यदि चुनाव प्रक्रिया में इन दोनों बदलावों को लागू किया जाता है तो पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान किया जा सकता है.

EVM को लेकर राजनीतिक दलों की अलग-अलग राय रही है. राज ठाकरे का बयान इसी राजनीतिक बहस का हिस्सा है. फिलहाल चुनाव आयोग की मौजूदा व्यवस्था EVM आधारित मतदान पर कायम है.

चुनाव आयोग पर बढ़ा राजनीतिक दबाव
विराट गर्जना मोर्चे के जरिए ठाकरे नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को सीधे राजनीतिक आंदोलन का मुद्दा बना दिया है. प्रदर्शन के दौरान SIR को रद्द करने और चुनाव प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी प्रमुखता से उठी.

हालांकि, चुनाव आयोग एक संवैधानिक संस्था है और उसके कामकाज को लेकर लगाए गए राजनीतिक आरोपों की पुष्टि या खंडन संबंधित आधिकारिक जवाब और दस्तावेजों से ही किया जा सकता है.

रविवार का प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि इसमें लंबे समय से अलग राजनीतिक राह पर चल रहे उद्धव और राज ठाकरे एक साथ दिखाई दिए.

आगे क्या होगा
अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि चुनाव आयोग महाराष्ट्र की SIR प्रक्रिया को लेकर उठाए गए सवालों पर क्या प्रतिक्रिया देता है और विपक्षी दल अपनी मांगों को किस स्तर तक आगे ले जाते हैं.

उद्धव और राज ठाकरे की संयुक्त मौजूदगी ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक अलग राजनीतिक घटनाक्रम जरूर सामने रखा है, लेकिन इस मोर्चे का आगे का असर क्या होगा, इसका आकलन फिलहाल करना जल्दबाजी होगा.

रविवार के प्रदर्शन का तत्काल मुद्दा SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली रहा. राज ठाकरे ने SIR रद्द करने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग रखी, जबकि उद्धव ठाकरे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर सरकार और चुनावी व्यवस्था पर निशाना साधा. अब इन आरोपों और मांगों पर चुनाव आयोग तथा अन्य संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया आगे की राजनीतिक बहस की दिशा तय करेगी.

Source : palpalindia ये भी पढ़ें :-